आँख फड़कना: (Myokymia) 6 मुख्य कारण, प्रकार, लक्षण, रोकथाम, मेडिकल उपचार और सम्पूर्ण गाइड

आँख फड़कना जिसमे आंख या पलक अपने आप हिलने या फड़कने लगती है और यह एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली स्थिति है, जिसे मेडिकल भाषा में मायोकिमिया (Myokymia) कहा जाता है और मेडिकल साइंस के अनुसार इसके पीछे कई कारण होते है और अधिकांश (Myokymia) हल्के होते हैं

जीवनशैली में बदलाव से ठीक हो जाते हैं, लेकिन बार-बार या गंभीर फड़कन किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। इस लेख में हम आँख फड़कने के कारण प्रकार लक्षण रोकथाम और इसके मेडिकल उपचार के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप इसे समय रहते नियंत्रित कर सकें और आंखों की सेहत बनाए रखें।

आँख फड़कना क्या है?

आँख फड़कना (Myokymia) एक ऐसी स्थिति है जिसमें पलक की मांसपेशियाँ बार-बार सिकुड़ती हैं और यह सिकुड़न आमतौर पर ऊपरी या निचली पलक में होती है और हल्की कंपन या झटके जैसा महसूस होता है, और शारीरिक रूप से यह पलकों में स्थित ऑर्बिकुलरिस ओकुली मांसपेशी की अनैच्छिक गतिविधि के कारण होता है

यह मांसपेशी आँखों को बंद करने और झपकने का काम करती है, जब इस मांसपेशी के तंतु अनियंत्रित रूप से सक्रिय हो जाते हैं तो फड़कन की अनुभूति होती है, और यह आमतौर पर कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक चलता है और फिर अपने आप रुक जाता है और यह आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है, लेकिन बार-बार या लंबे समय तक होने पर यह असुविधा और चिंता का कारण बन सकता है।

आंख फड़कने के प्रकार

  • माइल्ड मायोकिमिया (Mild Myokymia): यह सबसे सामान्य और हानिरहित प्रकार है और इसे मामूली पलक फड़कना भी कहा जाता है यह केवल ऊपरी या निचली पलक और कभी-कभी दोनों पलकों की हल्की अनैच्छिक ऐंठन होती है और इसका ​कारण अक्सर तनाव, नींद की कमी, शराब धूम्रपान और अत्यधिक कैफीन के सेवन से जुड़ा होता है और यह आमतौर पर जीवनशैली में बदलाव करने से कुछ दिनों या हफ्तों में अपने आप ठीक भी हो जाता है।
  • एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म (Essential Blepharospasm): यह (Myokymia) का एक अधिक गंभीर और दुर्लभ रूप है जो दोनों आँखों को प्रभावित करती है हालांकि यह एक तंत्रिका संबंधी स्थिति है और यह पलक झपकने की दर में वृद्धि के रूप में शुरू होता है और धीरे-धीरे इतना बढ़ जाती है कि पलकें ज़बरदस्ती बंद होने लगती हैं जिससे दृष्टि बाधित हो सकती है और पढ़ने लिखने जैसी दैनिक गतिविधियों में बाधा डाल सकती है।
  • हेमीफेसियल ऐंठन (Hemifacial Spasm): यह आँख फड़कने का सबसे गंभीर और ख़तरनाक रूप है इसमें चेहरे की एक तरफ की मांसपेशियाँ अचानक और अनैच्छिक रूप से सिकुड़ने लगती हैं जैसे लकवा मार दिया हो जबकि ​यह आमतौर पर चेहरे की तंत्रिका पर किसी छोटी रक्त वाहिका द्वारा दबाव पड़ने के कारण होता है, जो अक्सर रुक-रुक कर आँख फड़कने से शुरू होता है और धीरे-धीरे गाल, मुंह और गर्दन की मांसपेशियों तक फैल जाता है, और इसके लिए चिकित्सा उपचार और माइक्रोवस्कुलर डीकंप्रेसन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

आँख फड़कने का कारण

आँख फड़कना (Myokymia) किसी एक कारण से नहीं होता है और इसके पीछे की वजह हमेशा कोई गंभीर बीमारी नहीं होती है बल्कि यह जीवनशैली और तनाव संबंधी कारकों से जुड़ा होता है, और इसके कारणों को पहचानकर और जीवनशैली मे बदलाव लाकर इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है

  • स्क्रीन टाइम ज्यादा होने से आँख फड़कना: आज के डिजिटल युग में हर कोई छोटा हो या बड़ा मोबाइल लैपटॉप टीवी कंप्यूटर का लंबे समय तक और बिना ब्रेक के इस्तेमाल कर रहा है जिस्से आँखों में जलन होना और सूखापन जैसी समस्या बनती हैं और आँखों को लगातार फोकस बनाए रखने के लिए ज़्यादा काम करना पड़ता है, जिससे मांसपेशियां थक जाती हैं और आँख फड़कने लगती हैं।
  • थकान और नींद की कमी: शरीर और मस्तिष्क को ठीक से काम करने के लिए पर्याप्त नींद और आराम की आवश्यकता होती है, क्यों की नींद की कमी या खराब नींद का पैटर्न आँखों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे आँखों पर तनाव बनने लगता है और फड़कने लगती हैं, और प्रतिदिन कम से कम 7-8 घंटे की अच्छी नींद आवश्यक लें।
  • धूम्रपान और अल्कोहल सेवन: आँख फड़कने (Myokymia) का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान जैसे सिगरेट तम्बाकू और शराब का सेवन ही बनता है और जो लोग कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक का अधिक सेवन करते है उनमे ये सब उत्तेजक पैदा करता है जो तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर देता है, और अधिक मात्रा में इसका सेवन मांसपेशियों में कंपन पैदा कर सकता है, और अल्कोहल का सेवन शरीर को और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगाड़ देता है, जो फड़कन का कारण बनता है।
  • दृष्टि संबंधी समस्याएं: बहोत से लोगों मे निकट दृष्टिदोष, दूर दृष्टिदोष, या दृष्टि वैषम्य जैसी समस्या होती है और उनकी आँखों को साफ देखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, इससे आँखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और फड़कन हो सकती है, इसलिए नियमित आँखों की जांच और सही नंबर के चश्मे या लेंस का उपयोग इसे रोक सकता है।
  • तनाव और चिंता: जो लोग मानसिक दबाव मे रहेते है जैसे हर वक़्त उनके मन मे कुछ ना कुछ सोचते रहेते है जिस्से तनाव बढ़ता है और यही तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है, और चिंता या मानसिक तनाव की स्थिति में चेहरे और पलकों की मांसपेशियाँ अक्सर तनावग्रस्त हो जाती हैं, जिससे अनैच्छिक फड़कन शुरू हो जाती है।
  • पोषक तत्वों की कमी: स्वस्थ आँखों मांसपेशियों और तंत्रिका कार्य के लिए कुछ पोषक तत्व बहोत महत्वपूर्ण होते हैं, जैसे मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन का एक प्रमुख कारण बनता है और इसी तरह, पोटैशियम, विटामिन B12, और विटामिन D की कमी भी तंत्रिका-मांसपेशी समन्वय को प्रभावित कर सकती है, जिससे फड़कन (Myokymia) हो सकती है।

आँख फड़कने के लक्षण

आँखों का फड़कना कई तरह से प्रकट हो सकता है हल्का से लेकर गंभीर लक्षणों तक और ऊपरी पलक में ज्यादा तर होता है लेकिन निचली पलक को भी प्रभावित कर सकता है और इसका सबसे आम संकेत है पलक की अनैच्छिक हरकत है जो एक या दोनों आँखों को प्रभावित कर सकता है और कुछ लोगों में आँखों का फड़कना ज़्यादा बार होता है और लंबे समय तक बना रहता है  जबकि अन्य लोगों में आँखों के फड़कने के लक्षण चले जाते हैं और वापस नहीं आते। इसके साथ पलकों में फड़कन के ये लक्षण भी दिख सकते हैं:

  • पलक झपकने की दर में वृद्धि
  • प्रकाश संवेदनशीलता
  • सूखी आँखें
  • दृष्टि संबंधी समस्याएं

जबकि अधिक गंभीर मामलों में, आंखों के फड़कने के साथ-साथ चेहरे में ऐंठन भी हो सकती है।

यह किन भागों को प्रभावित करता है और कैसा दीखता है

यह चेहरे की मांसपेशियां विशेषकर आपकी आंखों के आसपास या पलकों में  छोटा या तेज़ झटका महेसूस होता है और दूसरों के लिए देखना मुश्किल होता है औरकुछ देर या एक घंटे तक रह सकता है और एक या दोनों आँखों को प्रभावित कर सकता है

आंख फड़कने से जुड़ी गलतफहमियाँ

आंख फड़कने (Myokymia) को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएँ और अंधविश्वास प्रचलित हैं जैसे हमारे देश भारत में अक्सर लोग बताते और मानते है की दाईं आंख फड़के तो शुभ संकेत है और बाईं आंख फड़के तो अशुभ जब की ऐसा कुछ नहीं है और मेडिकल साइंस के अनुसार इन धारणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

  • बहोत से लोग कहेते है दाईं आंख फड़कना शुभ होता है पर हकीकत यह है की आँख फड़कने (Myokymia) का शुभ या अशुभ से कोई संबंध नहीं है और यह सिर्फ मांसपेशियों की हल्की ऐंठन है।
  • आंख फड़कना बीमारी का संकेत है कुछ लोग यह भी कहेते है दरअसल आँख फड़कना कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह शरीर का एक संकेत है और अधिकतर मामलों में यह मामूली और अस्थायी होता है।
  • बहोत से लोग यह भी कहेते है की विटामिन की गोली लेने से तुरंत आराम मिलता है जबकि विटामिन की कमी एक कारण हो सकता है, लेकिन हर फड़कन विटामिन की कमी से नहीं होती है।

बच्चों में आंख फड़कना

बच्चों में भी आँख फड़कने (Myokymia) की समस्या देखी जा सकती है, और इसके कारण आमतौर पर अलग हो सकते हैं और अधिकतर मामलों में यह हानिरहित होता है यदि फड़कन बार-बार हो तो अपने बच्चों की आँखों की जाँच जरूर करवाएँ:

  • मोबाइल या गेम खेलने का अधिक समय बिता रहा है
  • बच्चों में नींद की कमी से आँख फड़कना
  • आँखों मे खुजली होना और बार बार आँख मलना
  • बच्चों में पोषण की कमी की वजह से आँख फड़कना
  • आँखों पर तनाव या दृष्टि संबंधी समस्याएं
  • चिंता या स्कूल का दबाव

गर्भावस्था में आंख फड़कना

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई हॉर्मोनल और पोषण संबंधी बदलाव होते हैं, जिससे इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं और प्रेगनेंसी के दौरान हल्का दर्द या फड़कन सामान्य है, लेकिन यदि लंबे समय तक बना रहेता है तो हानिकारक हो सकता है और इसकी वजह बनती है:

  • तनाव
  • नींद की कमी
  • मैग्नीशियम या B-कॉम्प्लेक्स की कमी
  • थकान
  • डिहाइड्रेशन

आंख फड़कने Myokymia) से जुड़े जोखिम कारक

बहोत से लोगों में आंख फड़कने की संभावना दूसरों की तुलना में अधिक होती है और कुछ जोखिम कारक ऐसे है जो आँख फड़कने (Myokymia) की संभावना को बढ़ा सकते है जैसे:

  • लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का उपयोग करना
  • अत्यधिक धूम्रपान या शराब सेवन करना
  • अत्यधिक कैफीन या चाय कोल्ड्रिंक्स का इस्तेमाल करना
  • अत्यधिक मानसिक तनाव जैसे हर वक़्त कुछ ना कुछ सोचना
  • जिन लोगों को माइग्रेन या न्यूरोलॉजिकल विकार हैं
  • 40 वर्ष की उम्र के बाद होना
  • नींद की कमी

आंख फड़कने को रोकने के तरीके

  • अगर आप मोबाइल कम्प्यूटर लैपटॉप पर काम करते है तो स्क्रीन से ब्रेक लें और हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
  • पलक झपकाना न भूलें क्यों की मोबाइल लैपटॉप या कम्प्यूटर पर काम करते वक़्त पलक झपकाना कम हो जाता है जिस्से समस्या बढ़ सकती है।
  • धूम्रपान और शराब की मात्रा कम करें और योग, प्राणायाम और मेडिटेशन को अपने डेली के दिनचर्या में शामिल करें और पोषक तत्व से भरपूर भोजन लें।
  • आंखों को गंदे हाथ या तौलिया से बार-बार रगड़ने से बचें और अपनी सेफ्टी पर धयान दे काम करते वक़्त और बाहर जाते समय एक अच्छी क्वालिटी का चस्मा पहने।
  • यदि आप को दृष्टि संबंधी समस्याएं है तो सही नंबर का चश्मा पहनें क्यों की गलत पावर आंखों पर तनाव डालता है और अपनी आँखों की जाँच समय पर करवाते रहे।

घरेलू उपचार और देखभाल

ज्यादातर मामलों में आँख फड़कना (Myokymia) अपने आप ठीक हो जाता है और दवा की आवश्यकता नहीं होती है और इसके लक्षणों को कम करने में आपकी अपनी खुद की देखभाल और कुछ आसान उपायों से यह जल्दी ठीक हो सकता है।

लेकिन गंभीर इस्थिति में आँख फड़कने का उपचार स्थिति के अंतर्निहित कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है और कुछ कारणों के लिए अन्य उपचार विधियों की आवश्यकता हो सकती है जैसे सुधारात्मक चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस या विशिष्ट प्रकार की सर्जरी चूँकि इसके कई अलग-अलग कारण और उपचार है।

  • आँख फड़कने का सबसे आसान और फायदेमंद उपचार आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव आपके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं जैसे स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट और कैफीन का सेवन कम करना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित करना अक्सर फायदेमंद होता है।
  • हाइड्रेटेड रहने के लिए रोज़ कम से कम 8–10 गिलास पानी पिएँ क्यों की हाइड्रेटेड रहना बहुत ज़रूरी है और इससे (Myokymia) आँख फड़कने से राहत और इसके साथ ही शरीर के अन्य रोगों से भी छुटकारा मिलेगा रोज़ाना 8-10 गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें।
  • आंखों पर गर्म सेंक और बिना डॉक्टर के मिलने वाली लुब्रिकेंट आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें इससे आँख में फड़कन जलन और सूखापन के लिए बहुत लाभदायक है।
  • मैग्नीशियम युक्त भोजन जैसे केले बादाम पालक कद्दू के बीज सूरजमुखी के बीज का सेवन करें क्यों की मैग्नीशियम मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करता है।
  • गहरी सांस लेने या व्याम जैसी विश्राम तकनीकों का अभ्यास करें इससे आँख से लेकर शरीर तक के तनाव के स्तर को कम करने में मदद मिलती है जिस्से आँख फड़कने से छुटकारा और पुरे शरीर का व्याम हो जाता है।
  • धूम्रपान और शराब जैसी उत्तेजना बढ़ाने वाली चीजों से दूरी बनाये अगर आप चाय कॉफ़ी एनर्जी ड्रिंक और कोल्ड ड्रिंक का सेवन करते है तो उनको भी सीमित करें क्यों की ये सब आँख फड़कने (Myokymia) का कारण बनते है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

आँख फड़कना (Myokymia) आमतौर पर एक सामान्य और अस्थायी समस्या होती है, लेकिन फड़कन अगर आपके दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करती है या आपकी दृष्टि को प्रभावित करती है या लम्बे समय तक बनी रहेती है और इसके साथ नए लक्षण भी दिखाई देने लगते है तो इस कंडीशन मे फिर चिकित्सीय सलाह लेना आवश्यक होता है क्योंकि ये गंभीर अंतर्निहित स्थितियों जैसे ब्लेफेरोस्पाज्म या हेमीफेसियल ऐंठन के संकेत हो सकते हैं जैसे:

  • पलक कई दिनों से लगातार फड़क रही हो।
  • पलक पूरी तरह बंद या खुल न रही हो।
  • आँख सूज जाए लाल हो जाए या दर्द हो।
  • फड़कन चेहरे के अन्य हिस्सों तक फैल जाए।
  • रोशनी से असामान्य संवेदनशीलता हो।
  • दृष्टि धुंधली हो जाए।

डॉक्टर आँख फड़कने का निदान और परीक्षण कैसे करते है?

आँख फड़कने (Myokymia) का निदान अधिकतर मामलों मे क्लिनिकल इतिहास और शारीरिक परीक्षण से ही हो जाता है, लेकिन आमतौर पर डॉक्टर कुछ गहन जाँच करते है जैसे:

रोग-इतिहास: सबसे पहेले आपका डॉक्टर आपसे कुछ बातें पूछ सकता है जैसेफड़कन कब से हो रही है ये दिन भर मे कितनी बार ऐसा होता है और सिर्फ पलक फड़कती है या पूरा चेहरा और आप की नींद पूरी होती है या नहीं और किसी चीज का तनाव और मोबाइल स्क्रीन पर आप कितना टाइम बिताते है और चाय, कॉफी या कैफीन का सेवन करते है या नहीं और कोई दवा का सेवन या पुरानी बीमारी के बारे मे पूछ सकते है

नेत्र परीक्षण: आप का डॉक्टर आपकी पलक की मांसपेशियों का निरीक्षण करेंगे और आँखों में सूखापन की भी जाँच कर के पता करेंगे कही (Drey Eye) तो नहीं है और इसके साथ हीआँखों की थकान या इंफेक्शन औरदृष्टि की जाँच करेंगे

सामान्य कारणों की पहचान: आपका डॉक्टर अगर आपकी आँख फड़कने के कारणों जैसे तनाव थकान या नींद की कमी से हो रहा है या आप ज्यादा मोबाइल लैपटॉप उपयोग कर रहे है या फिर कैफीन अधिक सेवन कर रहे है और ये सब कारण बन रहे है तो इसे साधारण मायोकाइमिया माना जाता है और विशेष टेस्ट की जरूरत नहीं होती है

विशेष जाँच: यदि आपके आँख फड़कने के गंभीर लक्षण जैसे काफ़ी दिन से है औरपूरा चेहरा या होंठ भी हिलने लगता है या आँख पूरी तरह बंद होने लगती है और सिरदर्द कमजोरी या बोलने में दिक्कत होने लगती है तो इस मामले मे आपका डॉक्टर जैसे न्यूरोलॉजिकल एग्ज़ामिनेशन MRI, CT Scan की जाँच और कुछ दुर्लभ मामलों में और ब्लड टेस्ट की जाँच कर सकता है

आँख फड़कने (Myokymia) का मेडिकल उपचार

आँख फड़कना (Myokymia) आमतौर पर जीवनशैली में बदलाव से ठीक हो जाता है,लेकिन ब्लेफेरोस्पाज्म और हेमीफेसियल ऐंठन जैसे गंभीर मामलों में विशिष्ट चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है:

बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन

​यह एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म और हेमीफेसियल ऐंठन के लिए सबसे आम और सुरक्षित उपचार है,​यह पलक की मांसपेशियों में इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है, जिससे मांसपेशियां अस्थायी रूप से रिलैक्स हो जाती हैं और ऐंठन कम हो जाती है, और इसका प्रभाव आमतौर पर 3 से 4 महीने तक रहता है।

दवाइयाँ

कुछ मामलों में डॉक्टर मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाइयाँ भी लिख सकते हैं, जैसे क्लोनाज़ेपम और ये धयान रखें की यह केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जाती हैं क्योंकि इनके साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

सर्जरी

हेमीफेसियल ऐंठन के दुर्लभ और गंभीर मामलों में, यदि तंत्रिका पर रक्त वाहिका का दबाव हो, तोहेमीफेसियल ऐंठन के दुर्लभ और गंभीर मामलों में, यदि तंत्रिका पर रक्त वाहिका का दबाव हो, तो दबाव को हटाने के लिए माइक्रोवस्कुलर डीकंप्रेसन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है और यह प्रक्रिया केवल विशेष केंद्रों और अनुभवी न्यूरोसर्जन द्वारा की जाती है। दबाव को हटाने के लिए माइक्रोवस्कुलर डीकंप्रेसन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है और यह प्रक्रिया केवल विशेष केंद्रों और अनुभवी न्यूरोसर्जन द्वारा की जाती है।

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