बच्चों की आँख से कीचड़ आना इसके 4 प्रमुख कारण, लक्षण, रोकथाम और इलाज (Complate guide)

बच्चों की आँख से कीचड़ आना (Baby eye discharge) एक बहुत ही आम समस्या है लेकिन यह स्थिति कभी-कभी सामान्य और हानिरहित भी होती है, जिसका सामना अक्सर माता-पिता करते हैं और कुछ मामलों में यह किसी गंभीर संक्रमण या बीमारी का संकेत भी हो सकता है, और कई बार यह हल्की एलर्जी या नींद के दौरान जमा हुए म्यूकस की वजह से होता है, लेकिन अगर कीचड़ ज्यादा मात्रा में आता हो और पीले या हरे रंग का हो या आँख लाल और सूजन हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है

इस लेख में हम बच्चों की आँख से कीचड़ आना (Baby Eye Discharge) के कारणों पर चर्चा करेंगे और जानेंगे की क्या यह सामान्य है या असामान्य, और इसके लक्षण, उपचार, बचाव और रोकथाम के उपाय और कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है एक एक करके हम बच्चों की आँखों से कीचड़ आने के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बच्चों की आँख से कीचड़ आना (Baby Eye Discharge) सामान्य है या असामान्य?

Baby eye discharge होना सामान्य भी हो सकता है और असामान्य भी क्यूंकि ज्यादातर मामलों में और विशेषकर जन्म के बाद कुछ दिनो तक नवजात शिशुओं में यह एक सामान्य प्रक्रिया ही होती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि कीचड़ का रंग कैसा है और उसके साथ अन्य लक्षण क्या हैं और कितने दिनों से यह समस्या है ​और कीचड़ के साथ कुछ अन्य बदलाव दिखें, तो यह संक्रमण या कंजंक्टिवाइटिस (Pink Eye) का संकेत हो सकता है।​

बच्चों की आँख से कीचड़ क्यों आता है?

बच्चों की आँखों से कीचड़ आना सामान्य रूप से आँखों से निकलने वाला गाढ़ा चिपचिपा सा स्त्राव होता है, जो सफ़ेद पीला हरा या कभी कभी पानी जैसा दिख सकता है और आमतौर पर आँखों के कोनों में जमा होता है और कुछ मामलों में कभी-कभी पलकों को चिपका देता है, लेकिन बच्चों में यह समस्या विभिन्न कारणों से भी हो सकती है, जिनमें संक्रमण, एलर्जी या आँखों में कोई बाहरी पदार्थ चला जाना और अन्य कारण भी शामिल है।

बच्चों की आँख से कीचड़ आना

जबकि नवजात शिशुओं में आँखों से थोड़ा स्राव होना सामान्य ही माना जाता है, क्योंकि उनकी आँखों की नलिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, हालाँकि, अगर स्राव अधिक मात्रा में हो, रंग में बदलाव दिखे या अन्य लक्षण हों, तो आपको अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूरी लेना चाहिए।

बच्चों की आँख से कीचड़ आने का कारण (Causes of Baby eye discharge)

बच्चों की आँखों से कीचड़ आने के पीछे कई चिकित्सीय और प्राकृतिक कारण हो सकते हैं जैसे:

कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis): कंजंक्टिवाइटिस, जिसे आम बोलचाल में आई फ्लू या पिंक आई भी कहा जाता है और Baby eye discharge का सबसे आम कारण माना जाता है लेकिन Conjunctivitis के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से बच्चों की आँखों में कीचड़ की समस्या हो सकती है:

  • वायरल कंजंक्टिवाइटिस: यह अत्यधिक संक्रामक होता है और आमतौर पर साफ पानी जैसा स्राव पैदा करता है।
  • बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस: Baby eye discharge पीले या हरे रंग का गाढ़ा स्राव या चिपचिपा सा कीचड़ आता है और सुबह आँख चिपक जाती है जिस्से आँख लाल और सूजी हुई रहेती है तो यहबैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस का संकेत हो सकता है।
  • एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस: यह एलर्जी के कारण होता है और इसमें आँखों से साफ पानी जैसा स्राव होता है, साथ ही आँखों मे खुजली होना और लालिमा भी होती है जिसकी वजह से बच्चा बार बार आँखे मलने लगता है।

आँख में गंदगी या बाहरी कण का होना: साफ सफाई पर धयान ना देना धूल डस्ट या कोई अन्य छोटा कण और काजल या साबुन का अंश आँख में जाने से आँखों मे जलन और लालिमा होने लगती है, इसके जवाब में आँख सुरक्षात्मक रूप से अतिरिक्त कीचड़ बनाने लगती है।

आँसू नलिका का बंद होना (Blocked Tear Duct): नवजात शिशुओं में यह समस्या बहुत आम है और लगभग 10 हजार मे से 1 नवजात शिशु बंद अश्रु नलिका के साथ पैदा होते हैं, जिसमें नवजात शिशुओं की आँसू नलिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, जिसके कारण आँसू ठीक से नहीं निकल पाते और आँखों में जमा होकर संक्रमण का कारण बनते हैं और इस स्थिति में आमतौर पर एक आँख या दोनो आँखों से पानी आता रहता है और कीचड़ साफ करने के बाद भी दोबारा जमा हो जाता है।

सर्दी-जुकाम: जब बच्चों को सर्दी या जुकाम होता है, तो उनकी नाक और आँखों के बीच का मार्ग सूज जाता है और इसकी वजह से आँखों से पानी आना और हल्का पीला कीचड़ आना स्वाभाविक हो जाता है क्योंकि नाक और आँखों की नलिकाएं आपस में जुड़ी होती हैं इसलिए इसे ‘सिम्पैथेटिक डिस्चार्ज‘ भी कहा जाता है।

बच्चों की आँख से कीचड़ आने के लक्षण (Symptomps of Baby eye discharge)

बच्चों की आँखों से कीचड़ आने के साथ-साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, यदि Baby eye discharge का रंग पीला या हरा है, तो यह गंभीर संक्रमण हो सकता है जो अंतर्निहित कारण पर निर्भर करते हैं लेकिन जब आप अपने बच्चे की आँखों का निरीक्षण करें, तो निम्नलिखित लक्षणों पर ध्यान दें:

  • सुबह उठते समय बच्चे की पलकों का आपस मे चिपकना।
  • बच्चे की आँख का सफेद हिस्सा गुलाबी या लाल दिखाई देना।
  • बच्चा बार-बार आँखें मलता है और प्रकाश के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
  • बच्चे की एक आँख या दोनो आँखों से अत्यधिक पानी आना।
  • पीला, हरा या सफेद, पानी जैसा या गाढ़ा और चिपचिपा कीचड़ आना।
  • बच्चे की पलकों के किनारों पर सूखी हुई पपड़ी जमना।
  • नाक बहना या छींक आना और पलकों का भारी होना या सूज जाना।

बच्चों की आँख से कीचड़ आने का घरेलू उपचार और बचाव

Baby eye discharge अक्सर हल्की एलर्जी, धूल-मिट्टी, सर्दी-जुकाम या नींद के दौरान जमा म्यूकस की वजह से होता है और ऐसे हल्के मामलों में कुछ सुरक्षित घरेलू उपाय बच्चों को राहत दिला सकते हैं इसलिए यहाँ केवल वही उपाय बताए गये हैं जो नेत्र विशेषज्ञों द्वारा सुरक्षित माने जाते हैं, खासकर बच्चों और नवजात शिशुओं के लिए क्यूंकि बच्चों की आँख से कीचड़ आने के हल्के मामलों में सही और सुरक्षित घरेलू उपचार बहुत प्रभावी होते हैं।

  • गुनगुने पानी से सफाई: आपको अपने बच्चे की आँखों को साफ सफाई पर धयान देना बहुत जरुरी है उसके लिए आपको एक साफ कॉटन या गॉज को गुनगुने पानी में भिगोकर निचोड़ लें और आँख के बाहरी कोने से अंदर की ओर धीरे-धीरे साफ करें और दिनभर में 2–3 बार करें लेकिन हर बार नया कॉटन इस्तेमाल करें इससे जमा हुआ कीचड़ निकल जाता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
  • नवजात शिशुओं में आँखों की हल्की मालिश: अगर आपके छोटे बच्चे की आँख से बार-बार पानी और कीचड़ आता है, तो यह आँसू नलिका (Tear duct) बंद होने का संकेत हो सकता है लेकिन ऐसे मे आपको अपने साफ हाथों से अपने बच्चे की नाक के पास आँख के कोने पर हल्का दबाव दें ऊपर से नीचे की ओर 5–10 बार और दिनभर में 2–3 बार ऐसे मालिश करें यह आँसू नलिका खोलने में मदद करता है।
  • स्वच्छता बनाये रखें: ज्यादातर समस्या की जड़ गंदे हाथों से आँखें मलना होती है और ऐसे मे बच्चे के हाथ को साबुन से धोएँ नाखून छोटे रखें आँखें मलने की आदत से रोकें और धयान दें माता-पिता भी आँख साफ करने से पहले अपने हाथ धोएँ इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है और घरेलू उपचार ज्यादा प्रभावी होता है।
  • पर्याप्त आराम नींद और बचाव के उपाय: नींद की कमी से आँखों में सूखापन और कीचड़ बढ़ सकता है ऐसे मे बच्चे को पूरी नींद दिलाएँ मोबाइल और स्क्रीन टाइम सीमित रखें ध्यान दें अगर बच्चे को बार-बार आँखों में पानी और कीचड़ आता है, तो एलर्जी भी एक बड़ा कारण हो सकती है इसके लिए घर में धूल गर्दा कम रखें तकिए, चादर और रजाई, तकिया को साफ सुथरा रखें और धूल धुआँ, अगरबत्ती और तेज खुशबू से बचाएँ यदि पालतू जानवरों से लगाव है तो इस इस्थिति में दूरी रखें क्यूंकि एलर्जी कम होगी तो आँखों की समस्या बार-बार नहीं होगी।

साफ-सफाई, धैर्य और सही जानकारी से माता-पिता अपने बच्चे की आँखों को सुरक्षित रख सकते हैं, लेकिन याद रखें अगर कीचड़ बहुत ज्यादा हो, पीले या हरे रंग का हो या दर्द और सूजन बढ़ रही हो, घरेलू उपचार से कुछ आराम ना मिले तो ऐसे मे समय पर डॉक्टर को दिखाना ही सबसे सही निर्णय होता है।

बच्चों की आँख से कीचड़ आने पर क्या न करें?

बच्चों की आँख से कीचड़ आने पर माता-पिता जल्दी राहत पाने के लिए कई घरेलू या सुने-सुनाए उपाय अपनाने लगते हैं और ऐसे मे कुछ आम गलतियाँ समस्या को ठीक करने के बजाय और गंभीर बना सकती हैं जैसे:

  • गुलाब जल या देसी नुस्खे आँख में डालना: गुलाब जल, शहद, फिटकरी या कोई भी देसी तरल छोटे बच्चों की आँख में डालना खतरनाक हो सकता है क्यूंकि बाजार का गुलाब जल स्टेराइल नहीं होता इससे एलर्जी या इंफेक्शन बढ़ सकता है और आँख की नाजुक सतह को नुकसान पहुँच सकता है
  • साफ सफाई पर ध्यान ना देना: एक ही कॉटन या कपड़ा बार बार और दोनों आँखों में इस्तेमाल करने से यह छोटी-सी लापरवाही संक्रमण को दोगुना कर सकती है क्यूंकि एक आँख से दूसरी आँख में संक्रमण फैल सकता है इसलिए हमेशा दोनों आँखों के लिए अलग-अलग कॉटन या गॉज का इस्तेमाल करें।
  • माँ का दूध आँख में डालना: अक्सर यह सुना और माना जाता है कि माँ का दूध संक्रमण ठीक कर देता है, लेकिन आँखों के लिए यह बिल्कुल सुरक्षित नहीं है और सबसे आम और खतरनाक गलती बन जाती है क्यूंकि माँ के दूध में शुगर और बैक्टीरिया पनप सकते हैं इससे आँख का संक्रमण बढ़ सकता है कंजंक्टिवाइटिस गंभीर हो सकता है और मेडिकल रूप से भी माँ का दूध आँख में डालना गलत माना जाता है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप डालना: यह गलती बहुत गंभीर परिणाम दे सकती है क्यूंकि गलत ड्रॉप से इंफेक्शन भड़ सकता है और खासकर बिना डॉक्टर के स्टेरॉइड ड्रॉप आँखों मे डालने से आँखों को नुकसान पहुँचा सकती है क्यूंकि हर आई ड्रॉप हर समस्या के लिए सही नहीं होती।

Baby eye discharge का रंग क्या बताता है?

बच्चों की आँख से कीचड़ आता है, तो उसका रंग, गाढ़ापन और मात्रा यह समझने में आपको बहुत मदद करता है कि समस्या सामान्य है या किसी संक्रमण का संकेत जैसे:

  • सफेद या हल्का चिपचिपा कीचड़: नींद के दौरान जमा हुआ कीचड़ हल्की जलन या सूखापन और आँखों की सामान्य सफाई की कमी की वजह से होता है और आमतौर पर सुबह उठते समय या लंबे समय तक आँख बंद रहने के बाद दीखता है और गुनगुने पानी से नियमित सफाई करने पर यह अपने आप ठीक हो जाता है।
  • साफ पानी जैसा स्राव: यह वायरल कंजंक्टिवाइटिस और एलर्जी जैसे धूल, पराग, धुआँ और सर्दी-जुकाम के दौरान पानी जैसा स्राव आने लगता है और साथ में आँखों में खुजली लालिमा बार-बार पानी आना जैसी समस्या पैदा करता है और यह आमतौर पर हल्का और अस्थायी होता है जो 4-5 रोज मे ठीक हो जाता है लेकिन अगर ज्यादा दिन रहे तो अपने नजदीकी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  • आँखों से पीला कीचड़ आना: यह खासकर बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस आँख का संक्रमण होता है इसकी वजह से सुबह आँखों की पलकें आपस मे चिपक जाती है जो गाढ़ा और बदबूदार स्राव होता है इसमें आँखों की लालिमा और सूजन तक आजाती है और यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जाती है इसमें अक्सर डॉक्टर द्वारा एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स की ज़रूरत होती है।
  • आँखों से हरा कीचड़ आना: यह गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से कीचड़ का बनना शुरू हो जाता है और इसकी वजह से आँखों मे तेज सूजन दर्द रोशनी से डर आँख खोलने में परेशानी जैसी समस्या होने लगती है और ऐसे में तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना ज़रूरी है।

बच्चों की आँखों से कीचड़ आने पर रोकथाम कैसे करें?

Baby eye discharge एक आम समस्या है, लेकिन सही समय पर सावधानी और उचित देखभाल और घरेलु उपचार से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है की थोड़ी-सी लापरवाही संक्रमण का कारण बन सकती है।

  • बच्चों को आँखें मलने से रोकें: अक्सर छोटे बच्चे बार-बार आँखे मलने की आदत अपना लेते है और यही आदत आँखों से कीचड़ आने, लालिमा और संक्रमण का एक प्रमुख कारण बनती है, क्यूंकि जब बच्चा गंदे हाथों से आँखें मलता है, तो हाथों पर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस सीधे आँखों में पहुँच जाते हैं, जिससे कंजंक्टिवाइटिस, सूजन और कीचड़ आने की समस्या बढ़ सकती है और ऐसे में माता-पिता को बच्चे को आँखें मलने से रोकना चाहिए।
  • साफ-सफाई बनाए रखें: बच्चों की आँखों से कीचड़ आने की रोकथाम के लिए नियमित और सही साफ-सफाई सबसे ज़रूरी है, और रोज़ाना अपने बच्चे की आँखों को गुनगुने साफ पानी से हल्के हाथों से साफ करते रहें इस्से आँखों में जमा गंदगी, म्यूकस और कीटाणु आसानी से निकल जाते हैं और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
  • सर्दी-जुकाम का समय पर इलाज करें: बच्चों में सर्दी-जुकाम को हल्के में लेना कई बार आँखों से कीचड़ आने की समस्या को बढ़ा सकता है, अगर सर्दी-जुकाम का समय पर और सही इलाज न किया जाए, तो आँखों में जमा स्राव संक्रमण का रूप ले सकता है और कंजंक्टिवाइटिस जैसी समस्या हो सकती है, इसलिए ज़रूरी है कि बच्चे की नाक को साफ रखें, और सर्दी-जुकाम का सही समय पर इलाज करने से बच्चों की आँखों को कीचड़ और संक्रमण से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

क्या बच्चों की आँख से कीचड़ दूसरों को लग सकता है?

कुछ परिस्थितियों में बच्चों की आँख से कीचड़ दूसरों को भी लग सकता है, और खासकर जब इसका कारण वायरल या बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस हो क्यूंकि यह संक्रमण बहुत आसानी से फैलता है, विशेषकर बच्चों में क्यूंकि यह गंदे हाथों से आँख छूने पर और एक ही तौलिया, रुमाल या तकिया इस्तेमाल करने से और आँखों से निकलने वाले स्राव के संपर्क में आने से फैल सकता है जबकि एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और आँसू नलिका बंद होने की समस्या पर ऐसा नही होता है।

अपने बच्चों के आहार और पोषण पर भी ध्यान दें

संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और उम्र के अनुसार सही पोषण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है, जिससे आँखों का संक्रमण जल्दी ठीक होता है और बार-बार कीचड़ आने की समस्या भी कम होती है, और दवाओं पर निर्भरता घटती है इसलिए आँखों की समस्या के लिए और इलाज में खान-पान को कभी नज़र अंदाज़ न करें

और सबसे जरुरी बात नवजात शिशुओं के लिए माँ का दूध सबसे अच्छी एंटीबॉडी प्रदान करता है जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है इसमें लापरवाही ना करें और बच्चे को पर्याप्त पानी या तरल पदार्थ पिलाते रहें ताकि आँखों में नमी बनी रहे अगर बच्चा ठोस आहार लेता है, तो उसे गाजर, पपीता और शकरकंद दें क्यूंकि ये सब Best foods for eye health मे आते है।

बच्चों की आँख से कीचड़ आने पर डॉक्टर को कब दिखाएँ?

हालाँकि Baby eye discharge अदीखतर मामलों में घरेलु उपचार और खुद की देखभाल से ठीक हो जाता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसे हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है, यदि बच्चे की आँख से कीचड़ आने पर घरेलु उपचार से आराम ना हो और उसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे, तो बिना देर किए अपने बच्चों की आँखों की जाँच करवा लेना चाहिए, निचे अन्य लक्षण दिये गये है जैसे:

बच्चों की आँख से कीचड़ आना
  • कीचड़ की मात्रा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हो
  • आँखों से पीला या हरा गाढ़ा स्राव निकल रहा हो
  • बुखार के साथ आँखों से कीचड़ आ रहा हो
  • 4–5 दिन से अधिक समय तक लगातार कीचड़ आ रहा हो
  • नवजात शिशु में जन्म के कुछ दिनों बाद भी लगातार कीचड़ आ रहा हो
  • आँखों में तेज लालिमा, सूजन दिख रही हो
  • सुबह के समय पलकें आपस मे चिपक जा रही हो
  • बच्चा रोशनी या उजाले मे आँख बंद कर ले रहा हो

Baby eye discharge बार बार क्यों होता है?

बच्चों की आँखों से बार बार कीचड़ आना किसी छुपे हुए संक्रमण या एलर्जी का संकेत हो सकता है.

बच्चे की सिर्फ एक आँख से कीचड़ आ रहा है इसका क्या मतलब है?

अगर कीचड़ सिर्फ एक आँख में है, तो यह अक्सर ‘बंद अश्रु नलिका’ (Blocked Tear Duct) का संकेत होता है, क्यूंकि संक्रमण (Infection) आमतौर पर दोनों आँखों को प्रभावित करता है, लेकिन बंद नली की समस्या अक्सर एक ही आँख में देखी जाती है।

क्या काजल लगाने से बच्चों की आँख में कीचड़ आता है?

काजल लगाने से भी बच्चों की आँखों में कीचड़ आने लगता है क्यूंकि काजल में मौजूद रसायन और बैक्टीरिया संक्रमण पैदा कर सकते हैं, जिससे कीचड़ आने की समस्या बढ़ जाती है।

आँखें साफ करने के लिए किस तरह के पानी का उपयोग करना चाहिए?

आँखें साफ करने के लिए हमेशा पानी को पहले उबालें और फिर उसे हल्का गुनगुना होने तक ठंडा करें, सीधे नल के पानी का उपयोग न करें, क्योंकि उसमें सूक्ष्म कीटाणु हो सकते हैं जो आँखों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

निष्कर्ष

ज्यादातर मामलों में Baby eye discharge सामान्य होता ह, और एक आम समस्या है, जिसे सही जानकारी और साफ सफाई से आसानी से ठीक किया जा सकता है, क्यूंकि यह ज्यादातर मामलों में, यह केवल धूल-मिट्टी या बंद अश्रु नलिका की वजह से होता है, जो घरेलू देखभाल और सही मालिश से ठीक हो जाता है, लेकिन इसे नजर अंदाज करना सही नही है, यदि घरेलू उपचार से 2-4 दिनों में सुधार न दिखे तो अपने नजदीकी डॉक्टर से मिलें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उदेश्य के लिए लिखा गया है, यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है, आंखों से संबंधित किसी भी समस्या के लिए स्वयं उपचार करने के बजाय अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।