Newborn Baby का जन्म होना हर परिवार के लिए खुशी का पल होता है, लेकिन उसी नन्हे मेहमान का शुरुआती दिनों में सर्दी, जुखाम होना लगा रहेता है जो एक आम बात होती है, उसी में शामिल है आंखों से कीचड़ आना, जो जन्म के कुछ ही दिनों बाद बच्चे की आंखो से पीला या सफेद कीचड़ आना, पानी या चिपचिपाहट दिखाई देना शुरू हो जाती है और ऐसे मे माता-पिता के मन में चिंता होने लगती है। दरअसल अधिकतर मामलों में यह समस्या सामान्य और अस्थाई होती है, जबकि कुछ स्थितियों में यह संक्रमण, आँसू की नली का पूरी तरह विकसित न होना और अन्य कारण का संकेत हो सकता है।
आइये इस लेख में हम जानें कि Newborn Baby की आंखो में कीचड़ क्यों आता है, इसके मुख्य कारण क्या हैं, क्या यह किसी गंभीर इन्फेक्शन का संकेत है, या फिर एक सामान्य प्रक्रिया है। इसकी रोकथाम और देखभाल कैसे करें, इसका उपचार और किस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Newborn baby की आंखो में कीचड़ क्यों आता है?
एक नवजात शिशु की आंखो से पीला, सफेद या हल्का हरा कीचड़ निकलना शुरुआती दिनों मे एक आम समस्या होती है, जो हर नवजात शिशु की आंखो मे दीखता है। यहाँ तक की कुछ मामलों में सुबह सोकर उठने पर बच्चे की पलकें आपस में चिपकी हुई भी रहेती हैं, जिसे देखकर माता पिता या पेरेंट्स के मन में कई सवाल और डर पैदा होने लगते हैं।
आंखो में कीचड़ आना, पानी भरा होना या चिपचिपाहट जैसे दिखने के पीछे मुख्य रूप से जैविक और शारीरिक कारण होते हैं, जो आंखो की प्राकृतिक संरचना के पूरी तरह विकसित न होने पर या हल्के बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से होती है, लेकिन यह कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया होती है, जो कुछ हफ्तों या महीनों में खुद की देखभाल से अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन, फिर भी अगर कीचड़ बहुत ज्यादा हो, आंख लाल हो, सूजन दिखे या बच्चा बार-बार आंख रगड़ता हो, तो यह चिंताजनक बात हो सकती है।
नवजात शिशुओं की आंखो में कीचड़ आने का कारण?
Newborn baby की आंखो से कीचड़ आना, पानी भरा होना या चिपचिपाहट जैसा दिखना ज्यादातर शिशुओं में होता है, लेकिन यह समस्या अलग-अलग कारणों से हो सकती है, जिन्हें समझना और सही कारण की पहचान करना समय पर उचित देखभाल के लिए बेहद जरूरी है।
जन्म के दौरान बैक्टीरिया का संपर्क
जब बच्चा माँ के जन्म मार्ग से बाहर आता है, तो उसकी आंखे वहाँ मौजूद कुछ बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाती हैं, जो बच्चे की आंख से कीचड़ आने का कारण बन जाती है, यदि माँ को गर्भावस्था के दौरान हल्का संक्रमण, यूरिन इन्फेक्शन या बिना लक्षण वाला बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो तो, ये बैक्टीरिया नवजात शिशु की आंखो में पहुँच जाते हैं। इसके कारण जन्म के 4-5 दिनों के भीतर या उसके बाद बच्चे की आंखों से पीला या हरा कीचड़, पलकों में सूजन और लालिमा या बच्चे की तबीयत खराब महसूस होने जैसे अन्य लक्षण दिखाई देने लगते है।
नवजात शिशु की आंखो का संक्रमण
नवजात शिशुओं में होने वाला आंखो का संक्रमण जिसे मेडिकल भाषा मे Neonatal Conjunctivitis कहा जाता है, जो बहुत हानिकारक होता है और जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर हो सकता है। जबकि यह बैक्टीरिया, वायरस या अन्य संक्रमणकारी तत्व के कारण होता है, लेकिन यह समस्या तभी होती है, जब बच्चे की आंखे बैक्टीरिया, वायरस या अन्य संक्रमणकारी तत्वों के संपर्क में आती हैं। दरअसल इस स्थिति में शिशु की आंखो से पीला या हरा गाढ़ा कीचड़ आना, आंखो में लालिमा या पलकों का सूजकर बंद हो जाना, बुखार या चिड़चिड़ापन का होने जैसे अन्य गंभीर लक्षण दीखते हैं, जबकि यह संक्रमण का समय पर उपचार न होने पर आंखो की रोशनी को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
आँसू की नली का पूरी तरह विकसित न होना
जन्म के समय कई शिशुओं की आँसू नली पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, जिसे Tear Duct कहा जाता है, जो नवजात शिशु की आंखों से कीचड़ आने का सबसे आम और सबसे बड़ा कारण होता है। जिससे आँसू आंखों से बाहर निकलने के बजाय अंदर ही जमा होने लगते हैं और देखने पर ऐसा लगता है की आंखों में पानी भरा हो, जबकि यही जमा हुआ आँसू जब धूल, गंदगी और बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तो आंखों से सफेद या पीले रंग का चिपचिपा कीचड़ बनने लगता है। लेकिन यह समस्या एक आंख मे भी हो सकती है और दोनों आंखों मे भी, जिसके कारण लगातार पानी आना, सुबह उठते समय पलकों का चिपक जाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
सामान्य सर्दी-जुकाम
एक नवजात शिशु का शुरुआती दिनों में सर्दी-जुकाम का होना यहाँ तक की पाचन तंत्र का भी ठीक ना होना एक आम बात होती है, लेकिन इस समस्या का असर उनकी आंखों पर भी पड़ता है। जो कीचड़ आने की वजह बनता है,
साफ़-सफाई की कमी
नवजात शिशु की आंखे बेहद नाज़ुक और संवेदनशील होती हैं, ऐसे मे थोड़ी-सी भी साफ़-सफाई की कमी आंखो में कीचड़, पानी और संक्रमण का कारण बन सकती है, जैसे आंख साफ़ करने के लिए एक ही रूमाल या कपड़े का बार-बार इस्तेमाल करना, जो आंखो में जलन जैसी समस्या को भी पैदा कर सकते हैं और कीचड़ आने की समस्या को बढ़ा सकते है।
इसके अन्य संभावित कारण भी हो सकते हैं, जैसे जन्मजात समस्या और एलर्जिक रिएक्शन या आंखो में कोई बाहरी कण चला जाना या रोएँ धूल का कण जैसी अन्य तत्व की वजह से भी हो सकता है और काजल लगाने से भी और कुछ मामलों में दवाई के साइड इफेक्ट की वजह से भी कीचड़ आने लगता है।
Newborn Baby की आंखो से कीचड़ आए तो क्या करें?
सबसे पहले घबराएँ नहीं क्यूंकि एकनवजात शिशुओं में आंखो से कीचड़ आना बहुत आम बात है, लेकिन इसकी सही देखभाल ज़रूरी है ताकि इन्फेक्शन न बढ़े और खुदकी देखभाल से ठीक हो जाए जैसे:
- आंखो की सही तरीके से सफाई करें: यह सबसे ज़रूरी और पहला कदम है जो आपके बच्चे की आंखो से कीचड़ आने, पानी आने या चिपचिपाहाट को रोक सकता है, एक साफ़ सूती कपड़े या रुई को गुनगुने पानी में भिगोकर नरम हाथों से धीरे-धीरे साफ़ करें और इस तरीके से दिनभर मे 3-4 मर्तबा साफ करें लेकिन हर बार नई रुई इस्तेमाल करें और एक ही रुई से दोनों आंखे साफ़ न करें।
- बंद आँसू नली के लिए मसाज करें: आँसू की नली का विकसित न होना कीचड़ आने, आंखो से पानी आने का का सबसे बड़ा कारण है, ऐसे मे अपनी साफ़ उंगली को बच्चे की नाक और आंख के कोने के बीच रखें और हल्के दबाव के साथ नीचे की तरफ मसाज करे। इससे जमा हुआ पानी और कीचड़ बाहर निकल जाता है और आँसू की नली खुलने में मदद मिलती है, जबकि ऐसा जरुरी नही है की केवल बच्चों के लिए ही मसाज किया जाए यदि आपको भी आँसू आने की समस्या है तो आप भी कर सकते है।

- अगर सर्दी-जुकाम हो: यदि आपके बच्चे को अगर सर्दी-जुकाम है, तो यह आंखो से कीचड़ आने, पानी आने का कारण बनती है, क्यूंकि इसकी वजह से नाक बंद हो जाती है और आंखो में पानी और कीचड़ आने का खतरा बढ़ जाता है, ध्यान दें अगर आपके बच्चे को सर्दी जुकाम जैसी समस्या है तो इसका समय पर उपचार करें।
नवजात शिशु की आंखों में कीचड़ आने पर क्या नही करना चाहिए?
- माँ का दूध: कई जगहों पर यह मान्यता है कि माँ का दूध आंखों में डालने से बच्चे की आंखो से कीचड़ आना बंद हो जाता है, ऐसा आप बिलकुल भूल कर भी न करें क्यूंकि मेडिकल रूप से यह सुरक्षित नहीं है। दरअसल माँ के दूध में मौजूद शुगर बैक्टीरिया को बढ़ावा दे सकती है, जो कीचड़ कम होने की जगह कीचड़ और अधिक आने के खतरे को बढ़ा सकती है, जिसके कारण आंखों में जलन और सूजन हो भी हो सकती है।
- घरेलू नुस्खे: अक्सर लोग सुने सुनाये घरेलू नुस्खे अपनाने लगते है जैसे गुलाब जल, शहद, हल्दी पानी या अन्य घरेलू नुस्खे, लेकिन यह आपके नवजात शिशु के लिए सुरक्षित नहीं हैं, क्यूंकि यह आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकता है और आंखों की संवेदनशील सतह को नुकसान पहुँचा सकता है।
- मसाज तेज से ना करें: ध्यान दें मसाज करते समय आंखों को ज़ोर से न रगड़ें और न दबाएँ, क्यूंकि आंखों पर ज़ोर डालने से आंखों की सतह पर असर पड़ सकता है, उसी की वजह से संक्रमण भी पैदा हो सकता है और आँसू की नली पर बुरा असर पड़ सकता है।
- दवा न डालें: खुद से और बिना कोई आंखो के डॉक्टर के दिखाए बिना जैसे मेडिकल से या झोलाछाप से आई ड्रॉप या मलहम लेकर आंखो मे डालना आपके नवजात शिशु की आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। क्यूंकि गलत दवा से एलर्जी या जलन हो सकती है, आंखो मे लाली या सूजन भी आ सकती है, खासकर स्टेरोइड वाली दवाएँ जो बिना डॉक्टर की सलह के डालना तेजाब डालने के बराबर साबित हो सकती हैं और इंफेक्शन बढ़ा सकती है।
- डॉक्टर को दिखाने में देर न करें: अगर आपके शिशु की आंखों से बदबूदार या हरा कीचड़ आए आंखें लाल और सूजी रहें 2–4 दिनों में कोई सुधार न हो और घरेलू उपाय काम न करे और ठीक हो जायेगा ये सोच कर समय बर्बाद न करें।
Newborn baby की आंखों में कीचड़ आने के सामान्य लक्षण
जब भी आप अपने नन्हे शिशु की आंखो में कीचड़ आने, चिपचिपाहट होने या अन्य बदलाव देखें, तो समझें कि उन्हें विशेष देखभाल की ज़रूरत है, क्यूंकी इसके कुछ स्पष्ट और आसानी से पहचाने जाने वाले लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण हल्के भी हो सकते हैं और कुछ मामलों में गंभीर समस्या की ओर भी इशारा कर सकते हैं जैसे:
- शिशु की आंखों से पीला, सफेद या हरे रंग का चिपचिपा कीचड़ निकलता हुआ दिखाई दे
- आंखों के अंदर या आंखो के आसपास लालिमा या सूजन दिखती हो
- जब बच्चा रोता हो तो सामान्य आँसु के बजाय अधिक मात्रा में चिपचिपा कीचड़ निकलने लगे
- बिना रोए भी बच्चे की आंखो से लगातार पानी आये और बाद में सूखकर कीचड़ बन जाए
- बच्चा बार-बार आंखें मिचमिचाता हो, उन्हें रगड़ने की कोशिश करता हो या बेचैनी महसूस करता हो
- सुबह सोकर उठने के बाद बच्चे की पलकों का आपस में कीचड़ की वजह से चिपकी हुई हो
- बच्चे की आंखों से लगातार पानी आता रहता हो, या आंखो में पानी भरा हो और आंखें गीली-सी दिखती हो
अगर इन लक्षणों के साथ बुखार हो, दूध पीने में कमी आए, बच्चा ज्यादा सुस्त या चिड़चिड़ा रहने लगे, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Newborn Baby की आंखो की देखभाल और कीचड़ की रोकथाम
नवजात शिशु की आंखे बेहद कोमल और संवेदनशील 4-5 महीने रहेती हैं और शुरुआती दिनों मे उनकी सही देखभाल करना और संक्रमण से बचाव करना बहुत ज़रूरी होता है, क्यूंकि सही साफ-सफाई और कुछ ज़रूरी सावधानियाँ अपनाकर आप अपने शिशु की आंखो में कीचड़, पानी और इंफेक्शन की समस्या से बचाव और रोकथाम कर सकते है जैसे:
- हाथों की साफ़-सफाई का ध्यान रखें: शिशु की आंखो को साफ करने या छूने से पहले हमेशा अपने हाथ साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएँ क्यूंकि गंदे हाथों से आंख छूने पर बैक्टीरिया और वायरस आंखो में पहुँच सकते हैं जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- आंखो में काजल और घरेलु चीज ना लगाएँ: हमारे देश भारत मे नवजात शिशु की आंखो में काजल लगाने की लोगों ने एक परंपरा बना दी है, लेकिन नवजात शिशु की आंखो में काजल या कोई भी घरेलू चीज़ शुरुआती दिनों मे न लगाएँ, क्यूंकि इनमे मौजूद केमिकल्स और गंदगी से आंखो में संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- तौलिया और कपड़ा: बच्चे के चेहरे और आंखो के लिए हमेशा एक अलग और साफ मुलायम कपड़े का इस्तेमाल करें और किसी दूसरे की तौलिया कपड़े का इस्तेमाल न करें, कोशिश करें की बच्चे को अगर घर मे जानवर जैसे कुत्ता, बिल्ली हो तो उसके आस पास न रहे, बाकी ऊपर बताई गई चीजों का पालन करें और उससे बचें।
नवजात शिशु की आंखो में कीचड़ आने पर डॉक्टर को कब दिखाएँ?
ज्यादातर मामलों में नवजात शिशु की आंखो में कीचड़ आने पर सही साफ-सफाई व देखभाल से कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह समस्या गंभीर संक्रमण या आंखो की बीमारी का संकेत भी हो सकती है, ऐसे मे आपको अपने नवजात शिशु को अपने नजदीकी आंखो के डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
- एक या दोनों आंखो से बदबूदार कीचड़ आ रहा हो
- बच्चा आँख खोलने में दर्द महसूस कर रहा हो या रोते समय बहुत ज़्यादा परेशानी दिखे
- जन्म के 7–10 दिन बाद भी कीचड़ कम न हो रहा हो
- आंखो मे लालिमा, सूजी हुई या बंद होने लगी हों
- शिशु की आंखो से बहुत ज़्यादा पीला या हरा गाढ़ा कीचड़ लगातार निकल रहा हो
- बच्चे को बुखार हो, दूध पीने में कमी या ज़्यादा चिड़चिड़ापन दिखे
- सुबह उठने के बाद कीचड़ की वजह से आंखे चिपकी रहे
- लगातार पानी आ रहा हो या चिपचिपाहाट जैसा दिख रहा हो
ध्यान दें ये सब लक्षण Neonatal Conjunctivitis, बैक्टीरियल इन्फेक्शन और Tear Duct की जटिल समस्या का संकेत हो सकते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर बच्चे की आंखो की रोशनी को नुकसान पहुँचा सकते हैं, इसलिए अगर खुदकी देखभाल से 2-4 दिनों मे आराम ना मिले तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
नवजात शिशु की आंखों में कीचड़ का इलाज
अधिकांश नवजात शिशुओं में आंखों से कीचड़ आना खुदकी देखभाल से ठीक हो जाता है और ज़्यादातर मामलों में दवा की ज़रूरत नहीं होती है, लेकिन हर बच्चे की आंखो से कीचड़ आने की स्थिति अलग अलग हो सकती है और इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आंखों में कीचड़ आने का मुख्य कारण क्या है, इसलिए सही समय पर सही उपचार बेहद ज़रूरी होता है।
- आई ड्राप: यदि आपके नवजात शिशु की आंखों से बहुत ज़्यादा पीला या हरा गाढ़ा कीचड़ आता है, आंखें लाल रहेती है, सूजी हुई या बंद रहने लगें और बुखार या चिड़चिड़ापन दिखाई दे तो ऐसे मामलों में आपका डॉक्टर जांच के बाद एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स या आइंटमेंट लिख सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें बिना डॉक्टर की सलाह से कोई गलत दवा न इस्तेमाल करें क्यूंकि ऐसा करने से आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है।
- सर्जरी: शिशु की आँसू की नली मसाज के बावजूद भी न खुले और बार-बार इंफेक्शन हो रहा हो तब बच्चे की आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने के लिए सर्जरी की जाती है, लेकिन बहुत ही कम मामलों में जैसे 10000 बच्चों मे से किसी एक को सर्जरी की जरुरत होती है, ओ भी जब बच्चा 1 साल का हो जाए तब एनेस्थीसिया देकर की जाती है, जो कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।
ध्यान दें सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका होता है सही साफ-सफाई और नियमित मसाज इससे समस्या धीरे-धीरे ठीक हो जाती है और 6 से 12 महीनों के भीतर आँसू की नली भी अपने-आप खुल जाती है।
निष्कर्ष
नवजात शिशु की आंखो से कीचड़ आना शुरुआती दिनों मे और ज़्यादातर मामलों में एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया होती है, जो सही साफ़-सफाई और टियर डक्ट मसाज से यह समस्या कुछ ही हफ़्तों में ठीक हो जाती है। लेकिन अगर आपको संक्रमण के कोई भी गंभीर लक्षण दिखें, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है, इसे डॉक्टरी सलाह का विकल्प न मानें और अपने बच्चे की आंखो से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ या नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।