मोतियाबिंद (Cataract) क्या है? लक्षण, कारण और उपचार की पूरी जानकारी

मोतियाबिंद जिसे मेडिकल भाषा मे (Cataract) कहा जाता है और मोतियाबिंद उम्र से संबंधित एक आम नेत्र रोग है जिसमें आँख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है और भारत में लगभग 62.6% नेत्रहीनता का कारण मोतियाबिंद ही है और इसके हर साल देश में 20 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं शुक्र है कि आधुनिक सर्जरी तकनीकों ने इसका इलाज बहुत सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है जिससे पिछले कुछ वर्षों में इसके कारण होने वाली नेत्रहीनता में कमी आई है, इस लेख मे हम मोतियाबिंद के हर पहलू कारणों, लक्षणों, प्रकारों से लेकर उपचार के आधुनिक विकल्पों तक की पूरी जानकारी शामिल की गई है।

मोतियाबिंद क्या होता है?

एक साधारण आँख का लेंस सामान्यत पारदर्शी होता है और रेटिना पर प्रकाश केंद्रित करके स्पष्ट छवि बनाने में मदद करता है लेकिन मोतियाबिंद (Cataract) तब होता है जब इस लेंस में मौजूद प्रोटीन गुच्छे बनाने लगते हैं जिससे लेंस धुंधला या अपारदर्शी हो जाता है और इस धुंधलेपन के कारण प्रकाश लेंस से आसानी से गुजर नहीं पाता और रेटिना तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुँच पाता जिसके परिणामस्वरूप दृष्टि धुंधली हो जाती है फिर चाहे आप चस्मा पहने या दवा खाये या डाले कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है लेकिन यह स्थिति आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो अंधेपन का कारण भी बन सकती है।

मोतियाबिंद के प्रमुख कारण

मोतियाबिंद (Cataract) का सबसे आम कारण है उम्र का बढ़ना है उम्र के साथ लेंस में प्राकृतिक बदलाव होते हैं जिस्से मोतियाबिंद विकसित होने लगता है हालांकि इसके कई अन्य कारक भी जोखिम को बढ़ाते हैं जैसे:

  • इसका सबसे प्रमुख कारण उम्र का बढ़ना है
  • अन्य रोग जैसे मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियाँ
  • वर्तमान मे या पिछली आँख की चोट या सर्जरी
  • स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक सेवन
  • UV किरणों के अत्यधिक संपर्क मे रहेना
  • धूम्रपान या शराब का अत्यधिक सेवन
  • परिवार में मोतियाबिंद (Cataract) का इतिहास होना
मोतियाबिंद Cataract

मोतियाबिंद के लक्षण

मोतियाबिंद (Cataract) के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं जैसे:

  • दृष्टि में धुंधलापन और बादलदार या धुएं जैसा दिखाई देना इसका सबसे आम लक्षण है।
  • रात की दृष्टि में कमी और रात में या कम रोशनी में देखने मे चलने फिरने मे और खासकर गाड़ी चलाने में कठिनाई होना।
  • सर मे दर्द होना जो काला मोतियाबिंद का संकेत हो सकता और इसमें टपकन जैसा दर्द होता है और नज़र धीरे धीरे कम होने लगती और कुछ समय सीमा बाद बहुत ज्यादा नज़र कम हो जाती है।
  • चकाचौंध एवं प्रभामंडल जैसे रोशनी के चारों ओर चकाचौंध या तेज रोशनी से आँखें चौंधियाना या प्रभामंडल दिखाई देना।
  • रंगों का फीकापन जैसे रंग पहले जैसे चमकीले न दिखाई देना बल्कि पीले या भूरे रंग के फिल्टर से देखने जैसा अनुभव होना।
  • एक आँख से दोहरी दृष्टि दिखना खासकर एक ही आँख से किसी एक वस्तु के दो प्रतिबिंब दिखाई देना।
  • चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव जैसे निकट दृष्टिदोष में लगातार बढ़ोतरी होना।

मोतियाबिंद के प्रकार

Nuclear Cataract (न्यूक्लियर मोतियाबिंद)

न्यूक्लियर मोतियाबिंद में लेंस का बीच वाला हिस्सा धीरे-धीरे कठोर और धुंधला होने लगता है और यह उम्र बढ़ने के साथ सबसे अधिक देखा जाने वाला और सबसे आम मोतियाबिंद है और इसमें दूर की नजर धीरे-धीरे धुंधली होती जाती है लेकिन कभी-कभी पास की नजर में अस्थायी सुधार होता है जैसे पढ़ने लिखने या बारीक काम करने में कुछ समय के लिए आसानी होती है लेकिन दूर की दृष्टि खराब बनी रहती है।

Cortical Cataract (कॉर्टिकल मोतियाबिंद)

कॉर्टिकल मोतियाबिंद मे लेंस के बाहरी किनारे से सफेद त्रिकोणीय या स्पोक जैसे धब्बे धीरे धीरे बनना सुरु होते है और केंद्र की ओर बढ़ते हैं जिसकी वजह से यह प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बनना और रात में गाड़ी चलाते समय तेज चकाचौंध पैदा होना और अन्य समस्या भी बनती है।

Posterior Subcapsular Cataract (पोस्टीरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद)

पोस्टीरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद में लेंस के पीछे की सतह पर धुंधलापन बनने लगता है और तेजी से बढ़ता है और इसकी वजह से पढ़ने में दिक्कत चकाचौंध खासकर रात में और उजाले में भी देखने में परेशानी पैदा करता है और यह मधुमेह रोगियों मे और स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग करने वालों में आम है लेकिन यह कम उम्र में भी हो सकता है।

Congenital Cataract (जन्मजात मोतियाबिंद)

बच्चा पैदा होता है तो उसकी आँखों मे मोतियाबिंद होता है इसलिए इसको जन्मजात मोतियाबिंद कहा जाता है जो जन्म के समय मौजूद होता है और यह आनुवंशिक कारणों या गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से हो सकता

Radiation-Induced Cataract (विकिरण-प्रेरित मोतियाबिंद)

यह मोतियाबिंद तब बनता है जब कैंसर उपचार जैसी विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) के बाद धीरे धीरे विकसित होने लगता है जिसकी वजह से नजर अचानक खराब हो जाती है और लेंस में सफेदपन आ जाता है डबल दिखाई देना उसके साथ चकाचौंध और धुंधलापन भी महसूस होता है

मोतियाबिंद (Cataract) की रोकथाम

मोतियाबिंद (Cataract) ज्यादा तर उम्र बढ़ने के साथ होता है और उम्र के साथ मोतियाबिंद बनने का खतरा बढ़ता है लेकिन सही आदतों और खान पान से इसे देरी से आने या तेजी से बढ़ने से रोकना काफी हद तक संभव है

  • आँखों की नियमित जाँच: आपको अपनी आँखों की निमित्त जाँच करवाना चाहिए अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो हर साल आँखों की जाँच कराएँ क्यों की शुरुआती अवस्था में मोतियाबिंद की पहचान होने पर उसको चश्मे दवा और अपनी खुद की देखभाल से उसको काफ़ी हद तक रोक सकते है
  • धूप से आँखों का बचाव: आँखों को सूरज की हानिकारक UV किरणों से बचाने के लिए धूप के चश्मे का उपयोग करना चाहिए और टोपी या कैप का उपयोग भी करें क्यों की UV किरणें लेंस को नुकसान पहुँचाकर मोतियाबिंद को तेज करती हैं
  • स्वास्थ्य प्रबंधन: अगर आपको मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कोई बीमारी है तो उसको कंट्रोल में रखें क्यों की अनियंत्रित शुगर से मोतियाबिंद जल्दी हो सकता है और नियमित ब्लड शुगर जाँच और दवा और परहेज करते रहें
  • धूम्रपान छोड़ना: यदि आप धूम्रपान और शराब का सेवन करते है तो उससे दूरी बनाये और कोसिस करें की छोड़ ही दें क्यों की धूम्रपान मोतियाबिंद का बड़ा कारण है और अधिक शराब का सेवन भी जोखिम को बढ़ाता है
  • संतुलित आहार: विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ अपने रोज के भोजन मे शामिल करें जैसे हरी सब्जियां गाजर पालक और नींबू संतरा आँवला बादाम सूरजमुखी के बीज अलसी अखरोट मछली ये सब आपकी आँखों के सवस्थ के लिए फायदेमंद है और मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण को कम करता है
  • स्टेरॉइड दवाओं चोट और संक्रमण से बचाव: बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉइड आई ड्रॉप या दवाएँ न लें और ना ही लम्बे समय तक बिना डॉक्टर की सलह के उपयोग करें क्यों की इस्से मोतियाबिंद का खतरा और आँख के प्रेसर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है और काम के दौरान प्रोटेक्टिव आई गॉगल्स पहनें और आँखों में चोट लगने या इंफेक्शन होने पर तुरंत अपने नज़दीकी डॉक्टर से सम्पर्क करें

मोतियाबिंद (Cataract) का इलाज

मोतियाबिंद (Cataract) का सही और स्थायी इलाज केवल सर्जरी है और समय पर ऑपरेशन कराने से दृष्टि न केवल साफ होती है बल्कि आँख की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है और मोतियाबिंद ऑपरेशन में धुंधले हो चुके प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह उच्च गुणवत्ता वाला कृत्रिम लेंस (IOL) लगाया जाता है जिससे दृष्टि फिर से स्पष्ट हो जाती है और मोतियाबिंद का जितनी जल्दी और सही समय पर ऑपरेशन कराया जाए उतनी ही सुरक्षित और बेहतर दृष्टि सुनिश्चित होती है।

क्या मोतियाबिंद दवा चश्मा और घरेलू उपचार से ठीक हो सकता है

मोतियाबिंद (Cataract) का अस्थाई इलाज ऑपरेशन ही है और इसे घरेलू उपचार दवा या चश्मे से ठीक नहीं किया जा सकता चाहे आप शहद गुलाब जल एलोवेरा त्रिफला आदि का सेवन करें फिर भी मोतियाबिंद को खत्म नहीं कर सकते और कोई भी दवा या आई ड्रॉप मोतियाबिंद को ठीक नहीं कर पाते है और कुछ विटामिन या एंटीऑक्सीडेंट सिर्फ आँखों की सेहत के लिए होते हैं और चश्मा भी सिर्फ शुरुआती अवस्था में थोड़ी देर के लिए देखने में मदद करता है लेकिन चश्मा मोतियाबिंद को ठीक या रोक नहीं सकता।

डॉक्टर के पास कब जाये

अगर आपको अपनी आँखों मे मोतियाबिंद (Cataract) के लक्षण दिखने के साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे जैसे धुंधला दिखने लगे चीज़ें पहले जैसी साफ़ न दिखें बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़े रात में देखने में परेशानी हो तेज़ रोशनी या गाड़ी की लाइट चुभने लगे रंग फीके या पीले नज़र आने लगें पढ़ने-लिखने मोबाइल देखने टीवी देखने या चलने-फिरने में दिक्कत होने लगे तो आपको अपने नज़दीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

और 40 साल की उम्र के बाद भले कोई परेशानी न हो तब भी हर साल आँखों की जाँच ज़रूर करवाएं अगर आपको डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर है या लंबे समय से स्टेरॉइड दवाएँ ले रहें है तो धुंधलापन दिखने पर और अन्य लक्षण दिख रहें है या आँख में चोट लगने के बाद ऐसा हो रहा है तो देर देर ना करें और सबसे ज़रूरी बात अगर बच्चों में आँख की पुतली सफ़ेद दिखे या बच्चा ठीक से न देख पा रहा हो तो बच्चों की आँखों की जाँच और अपने नज़दीकी डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए क्यों की अन्य रोगों की वजह से Cataract विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

मोतियाबिंद का निदान कैसे किया जाता है?

  • Slit Lamp Examination: आपका डॉक्टर आपकी आँखों की और लेंस की धुंधलाहट को माइक्रोस्कोप से देखेगा।
  • Visual Acuity Test: आपका डॉक्टर आपको दूर और पास की दृष्टि की क्षमता देखने के लिए चार्ट पढ़वाकर दृष्टि की क्षमता मापेगा।
  • Retina Examination: आपका डॉक्टर आपकी आँखों मे पुतली फैलाने वाली ड्राप डाल कर रेटिना की जाँच करेगा।
  • Tonometry: आपका डॉक्टर आँख के प्रेशर की जांच करेगा और काला मोतियाबिंद जैसी स्थिति तो नहीं है उसको देखेगा।
  • Dilated Eye Examination: आपका डॉक्टर लेंस की डिग्री और मोतियाबिंद की कठोरता जांचे गा और मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद की स्थिति में पहुँच तो नहीं गया है ये भी देखेगा।
मोतियाबिंद Cataract

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?

मोतियाबिंद (Cataract) का एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज सर्जरी है और यह किसी भी दवा चश्मे या आई ड्रॉप से यह ठीक नहीं होता है लेकिन ज्यादा तर मरीज और उसके फैमली मेंबर्स अक्सर यह पूछते हैं कि ऑपरेशन कब कराना चाहिए दरअसल जैसे ही मोतियाबिंद आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगता है तो आपका डॉक्टर आपको सर्जरी की सलाह दे सकता हैं जैसे:

  • रोजमर्रा के कामों में परेशानी आने लगे
  • पढ़ने लिखने दूर और पास का काम करने मे कठिनाई होना
  • जब दृष्टि अत्यधिक धुंधली हो जाये
  • उजाले या रोशनी से चकाचौंध महेसूस ज्यादा हो
  • रात में गाड़ी चलाना मुश्किल हो
  • मोतियाबिंद (Cataract) सम्बलबाई बन गया हो
  • मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद बन जाये
  • चश्मे का नंबर बार-बार बदलने लगे

मोतियाबिंद ऑपरेशन के प्रकार

Cataract दुनियाभर मे दृष्टिहीनता का एक प्रमुख कारण है और यह एक इलाज योग्य बीमारी है और मोतियाबिंद विकसित हो जाने पर इसका एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज मोतियाबिंद का ऑपरेशन ही है और आधुनिक तकनीकों जैसे फैकोइमल्सिफिकेशन और उन्नत IOL लेंस के कारण यह सर्जरी अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित है लेकिन मोतियाबिंद ऑपरेशन किस प्रकार से किस तकनीक से करवा रहें है ये जानना बहुत ज़रूरी है

फैकोइमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification Surgery)

यह आज के समय में सबसे ज़्यादा फेमस और उन्नत तकनीक है और दुनिया भर मे मोतियाबिंद का ऑपरेशन इसी तकनीक से सबसे ज्यादा किया जाता है इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों से लेंस को तोड़ा जाता है और छोटे चीरे के साथ लेंस निकाला जाता है उसके बाद ( IOL ) लेंस लगाया जाता है और इसकी रिकवरी बहुत तेज़ होती है और दर्द ना के बराबर होता है और एक ही दिन में छुट्टी मिल जाती है और 24 घंटे के अंदर दिखने भी लगता है

स्मॉल इन्सीजन कैटरैक्ट सर्जरी (SICS)

यह हमारे देश भारत में ग्रामीण और सरकारी अस्पतालों में सबसे आम है इसमें आँखों के निचे और ऊपर इंजेक्शन लगा कर ऑपरेशन किया जाता है और थोड़ा बड़ा चीरा लगा कर लेंस निकला जाता है और इसमें हार्ड लेंस का उपयोग किया जाता है जिस्से दूर की नज़र ठीक हो जाती है लेकिन रिकवरी में समय थोड़ा ज्यादा लगता है और ऑपरेशन के बाद चश्मे की जरूरत ज्यादा होती है

लेज़र मोतियाबिंद ऑपरेशन (Laser Cataract Surgery)

इस तकनीक से मोतियाबिंद का ऑपरेशन ज्यादा कीमत मे होता है मतलब फेकोइमल्सिफिकेशन सर्जरी से काफी अधिक कीमत मे होता है और चुने गए लेंस व अस्पताल के आधार पर काफी बढ़ सकती है और बड़े हॉस्पिटल मे होता है इसमें चीरा और लेंस कट लेज़र से किया जाता है और यह कंप्यूटर-गाइडेड 3डी इमेजिंग पर आधारित होता है और तेज रिकवरी और कम तनाव के कारण दृष्टि में तेजी से सुधार और जल्दी सामान्य गतिविधियों में वापसी हो जाती है

एक्स्ट्रा कैप्सुलर कैटरैक्ट एक्सट्रैक्शन (ECCE)

यह एक पुरानी तकनीक है और आजकल ना के बराबर उपयोग होती है और इसमें इंजेक्शन टांके लगाए जाते हैं और बड़ा चीरा लगा कर लेंस निकला जाता है और लम्बे समय तक दर्द बना रहेता है और रिकवरी भी बहुत धीरी होती है और परहेज भी बहुत करना पड़ता है

सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले लेंस (IOL) के प्रकार

Cataract ऑपरेशन के दौरान लगाया जाने वाला कृत्रिम लेंस (IOL) भी कई प्रकार का होता है और सही लेंस चुनना उतना ही जरूरी है जितना आपको इस संसार को देखना ज़रूरी है।

  • मोनोफोकल लेंस: यह लेंस एक निश्चित दूरी जैसे दूर की दृष्टि साफ कर देता है और पढ़ने के लिए चश्मे की आवश्यकता होती है लेकिन फिर भी यह हमारे देश भारत मे 50% से ज्यादा लोगों को यही लगाया जाता है और इसकी कीमत थोड़ा कम होती है।
  • मल्टीफोकल या ट्राइफोकल लेंस: यह लेंस दूर पास और बीच की दूरी की दृष्टि साफ कर देता और इसमें चश्मे पर निर्भरता ना के बराबर होती है और इसका खर्च थोड़ा ज्यादा आता है लेकिन रिजल्ट बहुत अच्छा देता है।
  • टॉरिक लेंस: यह लेंस खास तौर पर मोतियाबिंद और दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) दोनों का इलाज को ठीक करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है और यह लेंस दूर और पास दोनों की दृष्टि में सुधार करता है।

मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च

मोतियाबिंद (Cataract) का ऑपरेशन हमारे देश भारत मे लगाये जाने वाले लेंस पर और ऑपरेशन किस जगह और कैसे किस तकनीक से करवा रहें है इसके ऊपर डिपेंड रहेता है लेकिन सबसे अच्छी बात यह है की बिलकुल मुफ्त मे भी हो जाता है लेकिन ऑपरेशन मरीज़ की इस्थिति उसकी उम्र क्या काम करता है कैसी जीवन सैली है इन सब बातों पर निर्भर करता है और इसके लिए आपका डॉक्टर आपको अच्छी सलाह दे सकता है.

ऑपरेशन की तकनीकअनुमानित खर्च (₹)अस्पताल का प्रकार
सरकारी योजना जैसे (आयुष्मान कार्ड्स से या आधार कार्ड्स से) Cataract का ऑपरेशन होता है और ये ऑपरेशन SICS के तरीके से किये जाते हैआयुष्मान कार्ड्स से होने वाला ऑपरेशन केवल आपको पंजीकरण के लिए 2-3 सौ रुपया देना होता है बाकि सब कुछ फ्री मे जबकि आधारकार्ड से कुछ जगह और कुछ लोग मुफ्त या ₹2,000 चार्ज लेते हैं आयुष्मान कार्ड्स से केवल ऑपरेशन वहा होता हैं जहाँ अस्पताल आयुष्मान सुविधा देते हैं सरकारी भी हो सकते हैं aur प्राइवेट भी लेकिन आधार कार्ड्स से केवल सरकारी अस्पताल मे ही सुविधा होती हैं
Laser (MICS/Femto) अगर आप इस विधी से cataract का ऑपरेशन करवा रहें हैं जो आज के समय की सबसे एडवांस तकनीक है ₹45,000 – ₹1,00,000मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल मे केवल ये सुविधा मिलती है जैसे बड़े शहर के बड़े हॉस्पिटल मे होता है
फैकोइमल्सिफिकेशन के तरीके से अगर आप ऑपरेशन करवा रहें जिसमें बिना चीरा पट्टी और इंजेक्शन लगे जो होता हैं ₹15,000 – ₹35,000प्राइवेट आई हॉस्पिटल मे ही केवल होता हैं

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद देखभाल और परहेज

  • Cataract ऑपरेशन के बाद सही देखभाल और परहेज न किया जाए तो आँखों में इंफेक्शन सूजन या देखने में समस्या हो सकती है इसलिए कुछ समय सीमा के लिए आपको कुछ चीज़ों का परहेज और देखभाल करना पड़ता है क्यों की मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद हल्की गड़न चुभन हो सकती है और सर्जरी के बाद आंख कुछ समय तक संवेदनशील बनी रहती है और ऐसे मे आपका परहेज आपकी आँखों मे इंफेक्शन का खतरा कम करता है सूजन और दर्द से बचाव होता है दृष्टि जल्दी साफ होती है ऑपरेशन का परिणाम बेहतर रहता है
  • मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आपको डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर उपयोग करें और कम से कम 4-5 दिन अच्छे से आराम करें और आंख को साफ और सुरक्षित रखें और डॉक्टर द्वारा दिया गया काला चश्मा इस्तेमाल करें और बच्चों और खेलकूद से थोड़ा दूरी बना के रखें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें और खान पियन हल्का ही करें जैसे हरी सब्जियां फल और विटामिन युक्त हो और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सामान्य समस्या

मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन के बाद कुछ सामान्य लक्षण दिख सकते है और इस्से घबराने की ज़रूरत नहीं है जैसे ऑपरेशन के बाद हल्की जलन या चुभन होना और थोड़ा पानी आना हल्का दर्द 1–2 दिन तक हो सकता है और धीरे-धीरे नजर साफ होना और आँख से कीचड़ आना ये सब सामान्य समस्या है लेकिन कोई चिंता या घबराने की बात नहीं है

ऑपरेशन के बाद इमरजेंसी में डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए

मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन के बाद 4-5 दिन सबसे संवेदनशील होते हैं और ऐसे मे कोई समस्या पैदा हो रही है और दवा डाल लेने से ठीक हो जाएगा ये सोचकर देर न करें अगर कोई गंभीर लक्षण दिखे या शक होने पर आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जैसे

  • अचानक तेज़ दर्द होने लगे क्यों की असहनीय दर्द खतरनाक हो सकता है
  • अचानक धुंधलापन या काला दिखने लगे और नज़र एकदम कम हो जाए
  • आँख में बहुत ज़्यादा लालि या सूजन हो क्यों की पलकों की सूजन इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है
  • आँख से पीला कीचड़ ज्यादा आने लगे क्यों की बदबूदार स्राव गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है
  • तेज़ रोशनी से बहुत दर्द या चुभन हो क्यों की यह आँख के अंदर सूजन या इन्फेक्शन की वजह से हो सकता है
  • मतली उल्टी या सिरदर्द के साथ आँख में दर्द हो तो यह आँख का प्रेशर बढ़ने का लक्षण हो सकता है
  • आँख पर चोट लगना या ज़ोर से रगड़ लग जाना भले ही दर्द कम हो फिर भी तुरंत दिखाना ज़रूरी है
  • अचानक बहुत ज़्यादा आँसू आना और आँख खुलने में दिक्कत होने लगे तो यह कॉर्निया की समस्या या इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है

निष्कर्ष:

मोतियाबिंद (Cataract) आज के समय 70% से अधिक लोगों मे पाया जाने वाला एक सामान्य नेत्ररोग है जो उम्र के साथ होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सही समय पर इसकी पहचान और इलाज से आप काफ़ी लम्बे समय तक बच सकते है और अपनी आँखों की रोशनी को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन अगर मोतियाबिंद विकसित हो जाता है तो फिर उसका एकमात्र इलाज केवल ऑपरेशन है लेकिन आज की आधुनिक तकनीक ने इस ऑपरेशन को बहुत आसान और दर्द रहित बना दिया है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी धुंधला दिखाई देने की समस्या हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें क्यों की मोतियाबिंद (Cataract) बुजुर्ग लोगों मे ज्यादा होने का खतरा बना रहेता है। याद रखें, स्पष्ट दृष्टि ही बेहतर जीवन की कुंजी है।