मोबाइल देखने से आँखों में दर्द और जलन होना ? इसका प्रमुख कारण, बचाव और रोकथाम

मोबाइल देखने से आंखो मे दर्द और जलन होना

आज के डिजिटल युग में हमारा ज्यादातर समय स्मार्टफोन या लैपटॉप की स्क्रीन पर बीतता है। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से आँखों में दर्द या धुंधलापन महसूस होने लगता है. इसका मुख्य कारण क्या है और मोबाइल हमारी आँखों को कैसे प्रभावित करता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे मोबाइल आंखो के लिए कितना नोकसान दे है.

मोबाइल देखने से आँखों में कौन सी बीमारी होती है?

आज के समय मोबाइल हो या लैपटॉप, इन सब डिजिटल चीजों का इस्तेमाल करना एक आम बात है, लेकिन लगातार स्क्रीन देखने से आंखो पर बहुत बुरा असर पड़ता है, खासकर उनको जो बिना UV प्रोटेक्शन के इस्तेमाल करते हैं. इसलिए स्क्रीन देखने से होने वाली आंखों की समस्याओं को मेडिकल भाषा में डिजिटल विज़न सिंड्रोम या कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम कहा जाता है।क्यों कीयह कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि आंखों से जुड़ी कई समस्याओं का समूह होता है, जिसके अपने मुख्य लक्षण होते हैं और यह समस्या बच्चों, युवाओं और बुज़ुर्गों में तेजी से बढ़ रही है जैसे:

  • आँखों में भारीपन और थकान महसूस होना
  • आँखों से पानी आना या सूखापन
  • धुंधला दिखाई देना
  • सिर मे या गर्दन और कंधों में दर्द होना
  • आँखों में जलन होना या चुभन होना

मोबाइल देखने से आँखों में दर्द और जलन होने का कारण

मोबाइल हो या कोई भी डिजिटल स्क्रीन उसपे लंबे समय तक देखने से आँखों में दर्द, जलन, थकान या सूखेपन का अनुभव होना आम है। लेकिन इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं जिन्हें समझना ज़रूरी है जैसे:

  • कम पलक झपकाना: हर व्यकित सामान्य स्थिति में एक मिनट में लगभग 15–20 बार पलकें झपकाता हैं, लेकिन मोबाइल या लैपटॉप देखते समय यह संख्या घटकर 5–7 बार रह जाती है, इसके कारण आंखों की नमी जल्दी सूख जाती है, जिससे ड्राई आई की समस्या होने लगती है, जिसके कारण जलन और दर्द महसूस होता है
  • ड्राई आई सिंड्रोम: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में बनने वाली आंसुओं की परत जल्दी सूख जाती है, जो सुखी आंख का कारण बनती है, जिससे आंखों में जलन होना, लालिमा और किरकिरापन महसूस होना या कभी-कभी ज्यादा पानी आना हो सकता है।
  • मोबाइल की ब्लू लाइट: यह सबसे प्रमुख कारण है, क्यूंकि लंबे समय तक ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से डिजिटल आई स्ट्रेन बढ़ता है और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर ज्यादा दबाव डालती है, जो आंखों की सतह को नोकसान पहुँचती है और आंखों को जल्दी थका देती है।
  • बिना रुके मोबाइल देखना: बिना रुके लंबे समय तक मोबाइल देखने या लगातार कई घंटों तक मोबाइल देखने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं, जिससे के कारण फोकस करने की क्षमता कम हो जाती है, जबकि इसी कारण आंखों में दर्द और जलन बढ़ती है
  • अंधेरे में मोबाइल चलाना: रात में लाइट बंद करके मोबाइल देखने से आंखों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, क्यूंकि स्क्रीन की तेज रोशनी सीधे आंखों पर पड़ती है जिसके कारण आंखों में दर्द, जलन और सिरदर्द हो सकता है।
  • गलत दूरी और गलत पोज़िशन: अगर आप मोबाइल आंखों के बहुत पास रख कर इस्तेमाल करते हैं या लेटकर इस्तेमाल करते हैं तो ये आपकी आंखों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती जिससे आंखों की मांसपेशियां जल्दी थकती हैं जबकि आंखो की अन्य समस्याओं का कारण भी बनती हैं

एक दिन में मोबाइल कितना चलाना चाहिए?

एक दिन में मोबाइल कितना इस्तेमाल करना चाहिए यह उपयोग के उद्देश्य, व्यक्ति की उम्र और जीवनशैली पर निर्भर करता है। इसलिए सबसे पहली चीज यह है की मोबाइल आपको नियंत्रित न करे आप मोबाइल को नियंत्रित करें.अगर मोबाइल का उपयोग काम, शिक्षा या उत्पादक कार्यों के लिए है, तो इस्तेमाल करें लेकिन ब्रेक जरूरी हैं। क्यूंकि बच्चों और किशोरों के लिए (अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के दिशा-निर्देश) के अनुसार 1-2 घंटे बहुत हैं.

बच्चों को मोबाइल देखने से क्या नुकसान होता है?

आज के समय हर घर की यह एक सामान्य बात हो चुकी है की बच्चों को मोबाइल दे दो बच्चों से कुछ देर के लिए फुर्सत मिल जाती है. जबकि माता पिता को यह बात पता होती है की बच्चों की आंखें बड़ों की तुलना में ज्यादा नाज़ुक होती हैं। लेकिन सायद ये बात ना पता हो की ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल से बच्चों की आंखो मे क्या समस्याएं हो सकती हैं जैसे:

  • कम पलक झपकाने से आंखों की नमी खत्म हो जाती है जिसके कारण बच्चे की आंखों में जलन और लालिमा होने का खतरा बना रहेता है
  • सबसे प्रमुख कारण यही है की बच्चों मे मायोपिया विकसित होने लगता है जिसके कारण कम उम्र में ही दूर की चीजें अस्पस्ट नही दिखती है
  • बच्चों का पढ़ाई से मन भटकने लगता है जबकि ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ता है जिसके कारण बच्चे की फोकस छमता कम हो जाती है
  • रात में मोबाइल देखने से नींद प्रभावित होती है जो अन्य समस्या का कारण बनती है
मोबाइल देखने से बच्चों की आंखो मे क्या होता है

आँखों को सुरक्षित रखने का 20-20-20 नियम

​यदि आप स्क्रीन पर काम करते हैं या ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करते है तो आंखों की देखभाल के लिए यह नियम बहुत प्रभावी है बस ये तीन स्टेप्स याद रखें जैसे:

  • लगातार मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन न देखें हर 20 मिनट के बाद एक छोटा सा ब्रेक लें।
  • ब्रेक के दौरान अपनी आँखों को स्क्रीन से हटाकर कम से कम 20 सेकंड का आराम दें
  • इस समय के दौरान अपनी आँखों से कम से कम 20 फीट दूर रखी कोई भी चीज जैसे खिड़की के बाहर कोई पेड़ या दीवार पर लगी घड़ी को देखें।

यह नियम आँखों की उन मांसपेशियों को रिलैक्स करता है जो स्क्रीन पर फोकस करते-करते थक जाती है,​जबकि बार-बार ब्रेक लेने से आँखों में सूखापन नहीं होता, जिससे आँखों में जलन की समस्या कम हो जाती है और इसकी वजह से​ आँखों पर कम दबाव पड़ने लगता है जो डिजिटल स्क्रीन के कारण होने वाले सिरदर्द में भी कमी आती है

मोबाइल चलाते समय इन बातों का खास ध्यान रखें

आज के समय मोबाइल का इस्तेमाल हर उम्र के लोग करते हैं, खासकर बड़ों से ज्यादा बच्चे और यही स्क्रीन पर अधिक समय बिताना आँखों में दर्द, जलन, सूखापन और धुंधलापन जैसी समस्याएँ पैदा करता हैं।लेकिन अगर आप मोबाइल का सही तरीके से उपयोग करते हैं, तो इन आँखों की समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं:

  • स्क्रीन की ब्राइटनेस सही रखें या फिर ऑटो-ब्राइटनेस फीचर का इस्तेमाल करें क्यूंकि बहुत तेज ब्राइटनेस आँखों पर दबाव डालती है
  • मोबाइल और आँखों के बीच 15–20 इंच की दूरी पर रख कर इस्तेमाल करें जो आँखों की सीध में हो लेकिन बहुत नीचे या ऊपर न हो
  • स्क्रीन देखते समय हर एक मिनट मे 10- 12 बार-बार पलकें झपकाएं या आदत बना लें इससे आँखों की नमी बनी रहती है और जलन कम होती है
  • लगातार मोबाइल देखने से बचें इससे आँखों की फोकस क्षमता कम हो जाती है इसलिए लंबे समय तक लगातार स्क्रीन पर काम करने के बाद ब्रेक लें
  • रात में हल्की रोशनी में मोबाइल का उपयोग करें औरनाइट मोड या डार्क मोड ऑन रखें
  • हाथ पैर धोते समय पानी से आँखों पर छींटे मारें इससे आँखों की थकान और जलन कम होती है

डिजिटल स्क्रीन से आँखों को होने वाले नोकसान से बचाव और रोकथाम का तरीका

मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर देखने से होने वाली आँखों की समस्या अगर शुरुआती स्तर पर हो, तो यह खुदकी देखभाल और आदतों से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है जो इसकी रोकथाम और बचाव के लिए बहुत अच्छा तरीका है जैसे:

  • पानी ज्यादा पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें और दिन भर पर्याप्त पानी पिएं क्यूंकि इससे आँखों में सूखापन बढ़ता है।
  • पर्याप्त नींद लें: रोज़ आना 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद जरूरी है क्यूंकि कम नींद लेने से आँखों की समस्या और बढ़ जाती है।
  • आँखों को आराम दें: लगातार स्क्रीन देखने के बाद 2–4 मिनट के लिए आँखें बंद करें इससे आँखों की थकान कम होती है और फोकस बना रहेता है।
  • संतुलित आहार लें: जैसे शरीर के लिए खान पान का होना जरुरी है वैसे ही आँखों की सेहत के लिए पोषण बहुत ज़रूरी है, इसलिए आपको अपने रोजाना के भोजन में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, आँवला और खट्टे फल, बादाम, अखरोट, गाजर, शकरकंद इन सब चीजों को अपने आहार मे शामिल करना चाहिए।

अगर मोबाइल या लैपटॉप देखने से आँखों में दर्द, जलन या धुंधलापन लगातार बना रहता है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और आँखों की जाँच ज़रूर कराएं.यदि आप या का बच्चा अगर नंबर का चश्मा लगाता है तो सही पावर का ही इस्तेमाल करें और कम से कम एक साल के अंदर आंखो की जाँच करवा लें यह बहुत ज़रूरी है।

कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है?

याद रखें मोबाइल ज़रूरी है, लेकिन आपकी आँखें उससे भी ज़्यादा ज़रूरी हैं, खासकर नीचे दिए गए लक्षण यदि आपको लंबे समय से है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें ऐसे मे अपने नजदीकी आँखों के डॉक्टर से परामर्श लें:

  • लगातार आँखों में दर्द या जलन होना
  • धुंधला दिखाई देना
  • आँखों में लालिमा या सूजन होना
  • सिरदर्द के साथ आँखों में परेशानी
  • बच्चों में आँखों से सम्बंधित कोई लक्षण दिखना

निष्कर्ष

मोबाइल देखने से आँखों में दर्द और जलन आज एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। क्यूंकि लगातार स्क्रीन देखने से डिजिटल विज़न सिंड्रोम, ड्राई आई और आँखों की थकान जैसी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। हालाँकि, इन्हें सही आदतें अपनाकर और संतुलित आहार, पर्याप्त नींद इन समस्याओं से काफी हद तक बचा सकती है, क्यूंकि स्मार्टफोन के इस दौर में इनकी सुरक्षा पूरी तरह आपके हाथ में है इसलिए आपको अपनी और अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम से जितना हो सके बचना चाहिए।

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आंखों की सेहत पर नजर रखें लेकिन कैसे?

आंखों की सेहत पर नजर

जैसे -जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर में कई बदलाव आते है।इनमे आंखों की सेहत भी शामिल है, जो 40 की उम्र पार करते ही बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।दरअसल, इस दौरान पढ़ते समय आंखों पर ज्यादा जोर पड़ना, आंखों में सुखपान, जलन, खुजली या जल्दी थकान होना आम समस्या बन जाती है।कई लोगों को रात के समय देखने में भी परेशानी महसूस होती है।शोधों में भी पाया गया है कि 45 से अधिक उम्र के हर छह वयस्कोंमें से एक किसी न किसी तरह की आंखों की समस्या से पीड़ित होता है।इसलिए दृष्टि संबंधी समस्याओं से बचने के लिए जितनी जल्दी हो सके अपनी आंखों की देखभाल शुरू कर दें।

आंखों की निमित जांच कराएं

50 की उम्र के बाद आंखों में कोई दिक्कत न होने पर भी साल में कम-से-कम एक बार आंखों की पूरी जांच करानी चाहिए।कई बार आंखों की बीमारियां शुरुआती दौर में बिना किसी लक्षण के बढ़ती रहती हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले सकती हैं, जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, मैक्युलर डिजनरेशन व शुगर से जुड़ी आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।इसलिए 50 की उम्र के बाद आंखों की देखभाल को प्राथमिकता देना जरुरी है।निमित जांच से नजर का नंबर, आंखों का दबाव व रेटिना की स्थिति का सही आकलन हो जाता है, जिससे समय रहते इलाज संभव हो जाता है।

क्या खाएं और क्यों

आंखे हमारे शरीर का सबसे सवेंदनशील हिस्सा है।डिजिटल युग में, जब स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है, सही पोषण ही आंखों की रोशनी को लंबे समय तक बनाए रख सकता है, जैसे विटामिन ए, सी और बिटा-कैरोटीन युक्त साग-सब्जियों का सेवन करें।ये आंखों की रोशनी के लिए सुपरफूड माने जाते हैं, जबकि Best Foods for Eye Health केटेगरी मे भी आते है, जैसे गाजर, शकरकंद, टमाटर, आंवला, हरी सब्जियां, पपीता, कद्दू आदि।जबकि अलसी, अखरोट, और मछली में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड आंखों को सुखापन और उम्र के असर से बचाने में मदद करते हैं।पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी आंखों की सेहत के लिए जरुरी है।

अपनी आंखों को आराम दें

यदि आप टीवी देखने या कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने में बहुत समय बिताते हैं और अकसर अपनी पलकें झपकाना भूल जाते हैं, तो आपकी यह आदत आंखों में सुखापन और थकान की वजह बन सकती है।असल में, मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर ज्यादा समय बिताने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे जलन, दर्द और धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होने लगती है।इसलिए लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें।आप चाहें तो आंखों के लिए व्यायाम भी कर सकते हैं, जैसे 20-20-20 का नियम।इसके तहत, हर 20 मिनट के स्क्रीन वर्क के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।

इससे आंखों को बहुत जरुरी आराम मिल जाता है और उन्हें तनावमुक्त होने में मदद मिलती है।इसके अलावा लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन की ब्राइटनेस अपनी आंखों के अनुसार रखें।अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक एसोसिएशन तो कंप्यूटर मॉनिटर को आपकी आंखों से 20 से 28 इंच की दूरी पर रखने की सलाह देता है।इसके अनुसार, आंखों को अधिकतम आराम देने के लिए कंप्यूटर का ऊपरी हिस्सा आंखों के स्तर पर या उससे थोड़ा नीचे होना चाहिए।

बाहर निकलते समय तेज धूप से बचाव के लिए युवी प्रोटेक्शन वाला चश्मा पहनें, क्योंकि धूप की हानिकारक किरणें आंखों की लेंस व रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती हैं और मोतियाबिंद व मैक्युलर डिजनरेशन का खतरा बढ़ा सकती हैं।साथ ही बढ़ती उम्र में आंखों को स्वस्थ रखने के लिए शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना जरुरी है।इनके बढ़ने से आंखों की नसें प्रभावित होती हैं, जिससे नजर कमजोर हो सकती है।अगर आंखों में अचानक दर्द, नजर कम होना या काले धब्बे दिखें, तो तुरंत अपने नजदीकी नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।

क्लॉक एक्सरसाइज आंखों के लिए आसान व्यायाम

यह व्यायाम आंखों की मांसपेशियों का तनाव कम करता है और सिरदर्द से राहत दिलाता है।अपना सिर सीधा रखें और सामने एक बड़ी एनालॉग घड़ी की कल्पना करें।पहले अपनी नजरें काल्पनिक तौर पर 6 पर लें जाएं, फिर काल्पनिक तौर पर 12 पर ले जाएं।यानी नीचे से ऊपर की ओर अपनी नजर ले जाएं।इसी तरह घड़ी के विपरीत नंबर जोड़ों पर ध्यान केंद्रित करें, जैसे 3 और 9, 4 और 10, 5 और 11 नंबर।प्रत्येक संख्या पर एक या दो सेकंड के लिए अपनी नजर टिकएं, फिर अगली संख्या पर जाएं।ऐसा रोजाना 4-5 मिनट तक करें।यह आपकी आंखों के फोकस को बेहतर बनाता है और स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने से होने वाली थकान को दूर करता है।

आंखों की सेहत

निष्कर्ष:

हमारी आँखें अनमोल हैं और 40 की उम्र के बाद इन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।इन्हें नजरअंदाज करना गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।इसलिए सही खान-पान, नियमित व्यायाम और समय पर डॉक्टरी जांच के जरिए आप अपनी आंखों की रोशनी को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। याद रखें, आंखों की छोटी सी भी लापरवाही बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए आज से ही अपनी आंखों की सेहत को प्राथमिकता दें।

चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी क्या है कैसे होती है सर्जरी के प्रकार Age Requirement खर्च फायदे नोकसान (Complate Guide 2026)

LASIK Surgery

आज के समय चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो चश्मे के वजन, खेल-कूद में होने वाली परेशानी या कॉन्टैक्ट लेंस के रख रखाव से थक चुके हैं, और चश्मा नही इस्तेमाल करना चाहते है, और उसके लिए एक स्थायी समाधान चाहते हैं, ऐसे में उनके लिए चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, जो इसी समाधान के रूप में लेसिक LASIK सर्जरी ने पिछले कुछ वर्षों में काफ़ी लोकप्रियता भी हासिल की है।

लेकिन क्यों यह हर किसी के लिए सुरक्षित नही माना जाता है? इसका खर्च क्या है? और सर्जरी के बाद किन बातों का ख्याल रखना पड़ता है? इसके फायदे नोकसान क्या है, सब कुछ एक एक कर के इस लेख मे हम आसान भाषा मे विस्तार से जानेंगे।

चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी क्या है?

इस डिजिटल दौर मे Lasik Surgery चश्मा हटाने की सबसे प्रभावी और लोकप्रिय आधुनिक विधियों में से एक बन गई है जिसका फूल फॉर्म Laser-Assisted In Situ Keratomileusis होता है,​ LASIK Surgery आँखों की एक ऐसी सर्जरी है जिसमें लेजर की मदद से आँख की अपवर्तक त्रुटियों (Refractive Error) को ठीक किया जाता है, दरअसल हमारी आंख में कॉर्निया एक लेंस की तरह काम करती है, जब कॉर्निया का आकार सही नहीं होता, तो प्रकाश की किरणें रेटिना पर सही ढंग से केंद्रित नहीं हो पातीं, जिससे धुंधला दिखाई देता है, जो Lasik Surgery से कॉर्निया के आकार को बदल दिया जाता है, जिससे विजन साफ़ हो जाता है और चश्मे की जरूरत खत्म हो जाती है

दरअसल यह प्रक्रिया ​Myopia (निकट दृष्टिदोष)​, Hyperopia (दूर दृष्टिदोष) और Astigmatism (दृष्टिवैषम्य) जैसी सामान्य अपवर्तक त्रुटियों को ठीक करने के लिए की जाती है, जब आंख के कॉर्निया का आकार अनियमित होने के कारण हर दूरी पर धुंधलापन होता है, सबसे बड़ी बात यह है की LASIK Surgery की पूरी प्रक्रिया में मात्र 5-10 मिनट का समय लगता है और यह लगभग दर्द रहित होती है।

LASIK Surgery कैसे की जाती है?

LASIK सर्जरी एक अत्याधुनिक, कम्प्यूटर-नियंत्रित प्रक्रिया है, जो आमतौर पर 15-20 मिनट में दोनों आँखों की पूरी हो जाती है, जो बेहद सटीक और दर्द रहित होती है, जिसमें मरीज पूरी तरह होश मे रहता है, और बिना चीरा पट्टी के सर्जरी हो जाती है

लेकिन सर्जरी से पहेले आंखों को सुन्न करने के लिए (Anesthetic Eye Drops) डाला जाता है, उसके बाद कॉर्नियल फ्लैप बनाया जाता है, फ्लैप बन जाने के बाद, उसे धीरे से एक तरफ हटा दिया जाता है फिर सर्जन लेजर का उपयोग करते हैं, और​ यह लेजर कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित होता है, जिसमें आपका सटीक नंबर पहले से फीड किया जाता है

फिर ​लेजर सूक्ष्म मात्रा में कॉर्निया के टिश्यू को हटाकर उसे नया आकार देता है, जब लेजर का काम पूरा हो जाता है, तो सर्जन उस फ्लैप को वापस उसकी सही जगह पर रख देते हैं, उसके बाद आपको सुरक्षा के लिए पारदर्शी चश्मा (Eye Shield) पहना दिया जाता है ताकि धूल या गलती से हाथ लगने से बचा जा सके।

चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी 
LASIK Surgery

LASIK Surgery के लिए इन 5 चीजों का होना ज़रूरी है

Lasik Surgery दुनिया भर में करोड़ों लोगों की दृष्टि सुधार चुकी है, लेकिन फिर भी हर किसी की आँख इस सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होती, दरअसल यह निर्णय सिर्फ चश्मे के नंबर से नहीं, बल्कि आपकी आँखों की संरचना, समग्र स्वास्थ्य, जीवनशैली और यहाँ तक कि आपकी उम्मीदों को जाँचने के बाद लिया जाता है, और यही 5 महत्वपूर्ण मापदंड तय करते हैं कि आप लेसिक करवा सकते हैं या नहीं जैसे:

  • आयु सीमा (Age Requirement): Lasik Surgery के लिए सबसे पहेली चीज उम्र कम से कम 18 से 21 वर्ष होनी चाहिए तभी हो सकती है, क्यूंकि​ किशोरावस्था तक आँखों का आकार और चश्मे का नंबर बदलता रहता है, और ऐसे में यदि अस्थिर नंबर पर सर्जरी कर दी जाए, तो भविष्य में नंबर दोबारा आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • स्थिर चश्मा नंबर (Stable Prescription): Lasik Surgery से पहले कम से कम 12 से 24 महीनों तक चश्मे का नंबर स्थिर होना चाहिए, ​यदि चश्मे के नम्बर मे पिछले एक साल में आधे नम्बर या एक नम्बर से ज्यादा का बदलाव आता है, तो ऐसे मे डॉक्टर कुछ समय और इंतजार करने की सलाह दे सकते है।
  • कॉर्निया की पर्याप्त मोटाई (Corneal Thickness): LASIK प्रक्रिया में लेजर द्वारा कॉर्निया के टिश्यू को रीशेप किया जाता है, इसलिए कॉर्निया की पर्याप्त मोटाई होना बहुत जरुरी होता है, क्यूंकि ऐसे में​ यदि आपकी कॉर्निया बहुत पतली है, तो लेसिक सर्जरी आपके लिए असुरक्षित हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में डॉक्टर (PRK या ICL) की सलाह देते हैं।
  • आँखों का सामान्य स्वास्थ्य (Overall Eye Health): Lasik Surgery से पहेले ​आपकी आँखों में लेसिक के अलावा कोई अन्य गंभीर समस्या नहीं होनी चाहिए, जैसे​ काला मोतियाबिंद और रेटीना सम्बंधित रोग ​केराटोकोनस जबकि कुछ मामलों में ​गंभीर ड्राई आई भी लेसिक स्थिति को बिगाड़ सकती है।
  • सामान्य शारीरिक स्वास्थ्य: LASIK सर्जरी में ​कुछ शारीरिक स्थितियां रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर शुगर यदि शुगर लेवल अनियंत्रित है, तो घाव भरने में दिक्कत हो सकती है, और ​गर्भावस्था के दौरान भी क्यूंकि इन सब इस्थिति में चश्मे का नंबर अस्थायी रूप से बदल सकता है।

LASIK Surgery के प्रमुख प्रकार और एडवांस तकनीकें

आज के समय टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि हर आँख की बनावट के हिसाब से अलग-अलग लेजर तकनीक उपलब्ध है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट प्रक्रिया, लाभ और लागत है, और यह प्रत्येक व्यक्ति की आँख की संरचना, नंबर, बजट और जीवनशैली पर निर्भर करता है, जो आँखों की स्थिति के अनुसार डॉक्टर इनका चुनाव करते हैं जो अधिक सुरक्षा और सटीकता प्रदान करते हैं, और हमारे देश भारत में आज पारंपरिक लेसिक से लेकर अत्याधुनिक फ्लैप-रहित SMILE प्रो तक के विकल्प उपलब्ध हैं।

कन्वेंशनल लेसिक (Conventional LASIK)

यह LASIK सर्जरी की सबसे पुरानी और बुनियादी तकनीक है, ​इसमें एक छोटे सर्जिकल ब्लेड, (Microkeratome) का उपयोग करके कॉर्निया की ऊपरी सतह पर एक पतला फ्लैप बनाया जाता है, इसके बाद लेज़र से नंबर हटाया जाता है, लेकिन ब्लेड का इस्तेमाल होने के कारण इसमें रिकवरी थोड़ी धीमी हो सकती है, और फ्लैप से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम थोड़ा अधिक रहता है।

फेम्टो-लेसिक (Femto-LASIK)

इसमें ब्लेड का नामोनिशान नहीं होता और​ फ्लैप बनाने के लिए माइक्रोकेराटोम ब्लेड की जगह Femtosecond Laser का उपयोग किया जाता है, और यह लेजर कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित होता है, जो बालों से भी पतला फ्लैप बनाता है, इसलिए यह ब्लेड वाली लेसिक से कहीं ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्यूंकि इसमें घाव जल्दी भरता है और इन्फेक्शन का खतरा बहुत कम होता है।

कोंटूरा विजन (Contoura Vision)

यह वर्तमान में चश्मा हटाने की सबसे एडवांस और प्रीमियम तकनीक मानी जाती है, क्यूंकि कोंटूरा विजन आपकी आँख के कॉर्निया के अलग-अलग पॉइंट्स को मैप करती है, यह आपकी आँख की सतह की हर छोटी-बड़ी असमानता को ठीक कर देती है, जबकि इसमें रात के समय ड्राइविंग में कोई दिक्कत नहीं होती है, विजन की शार्पनेस चश्मे से भी बेहतर हो सकती है, इसलिए यह उन लोगों के लिए बेस्ट है जो परफेक्ट विजन चाहते हैं।

स्माइल सर्जरी (SMILE – LASIK)

यह लेजर विजन करेक्शन की सबसे नई और फ्लैप-लेस क्रांति है, जबकि इसमें न तो ब्लेड चलता है और न ही बड़ा फ्लैप बनाया जाता है, इसमें लेजर से कॉर्निया के अंदर एक छोटा सा लेंस जैसा टुकड़ा बनाया जाता है और उसे 2 मिलीमीटर के एक छोटे से छेद के जरिए बाहर निकाल लिया जाता है, दरअसल इसमें फ्लैप नहीं होता, इसलिए (Dry Eyes) की समस्या बहुत कम होती है, जो स्पोर्ट्स या एथलेटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह सबसे सुरक्षित है, क्योंकि फ्लैप खिसकने का डर खत्म हो जाता है।

Lasik Surgery से पहले कौन-कौन सी जांच की जाती है?

चश्मा हटाने के लिए Lasik Surgery से पहले डॉक्टर आंखों की विस्तृत जांच करते है, और यह जांच यह सुनिश्चित करती हैं कि आपकी आंखें Lasik Surgery के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हैं या नहीं, क्यूंकि सही जांच के बिना की गई सर्जरी से परिणाम प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए यह चरण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • चश्मे के नंबर की जांच (Refraction Test): इस जांच में आपकी आंखों का सटीक नंबर मापा जाता है, कितने Dioptre की समस्या है, और पिछले कुछ समय से नंबर स्थिर है या नहीं।
  • कॉर्निया मैपिंग (Corneal Topography): इसमें कॉर्निया की सतह को कंप्यूटर से मैप किया जाता है, जिससे उसकी बनावट, घुमाव और असमानताओं का पता चलता है।
  • कॉर्निया की मोटाई (Pachymetry Test): LASIK सर्जरी में कॉर्निया का आकार लेज़र से कम किया जाता है, इसलिए इसकी मोटाई मापना जरूरी होता है ताकि सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सके।
  • ड्राई आई टेस्ट (Tear Film Evaluation): इस जांच से यह पता चलता है कि आंखों में आंसू पर्याप्त बन रहे हैं या नहीं, क्योंकि गंभीर ड्राई आई में Lasik Surgery के बाद परेशानी पैदा होने लगती है।
  • पुतली का आकार (Pupil Size Measurement): यह विशेष रूप से रात में देखने की समस्या से बचने के लिए पुतली के आकार की जांच की जाती है।
  • रेटिना की जांच (Retina Examination): इसमें आंख के पिछले हिस्से आँख के पर्दे की जांच की जाती है, ताकि कोई गंभीर रेटिनल बीमारी तो नही है उसका पता लागया जा सके।
  • आंखों का प्रेशर (Intraocular Pressure Test): इस जांच से काला मोतियाबिंद होने ना होने का पता लगाया जाता है और आंखों का प्रेशर ठीक है या नही जैसी समस्याओं को देखा जाता है।
चश्मा हटाने के लिए LASIK Surgery

इन सभी जांचों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आपकी आंखें Lasik Surgery के लिए सुरक्षित हैं या नही ताकी सर्जरी के बाद परिणाम स्थायी और स्पष्ट हो जिस्से जटिलताओं और जोखिमों की संभावना न्यूनतम रहे इसलिए ये जाँच सर्जरी से पहेले की जाती हैं।

LASIK Surgery के बाद क्या देखभाल करनी पड़ती है?

LASIK Surgery के बाद सही देखभाल करना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि इसी पर सर्जरी का अंतिम परिणाम निर्भर करता है, जबकि सर्जरी के तुरंत बाद आँखों में जलन, पानी आना या धुंधलापन महसूस हो सकता है, जो हर किसी को सर्जरी के बाद थोड़ी देर के लिए होता है और कुछ घंटों में कम हो जाता है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात जो ध्यान मे रखना होता है यह है की LASIK Surgery के पहले 24 घंटे आंखों को ज़्यादा से ज़्यादा आराम देना है, मोबाइल, टीवी या लैपटॉप देखने से बचना होता है, उसके साथ ही डॉक्टर द्वारा दी गई Eye Drops को समय पर और नियमित रूप से डालना बेहद जरूरी होता है, क्यूंकि ये सब कार्य इंफेक्शन से बचाते हैं और आंखों की हीलिंग को तेज़ करती हैं।

और सर्जरी के बाद आंखों को रगड़ना, दबाना या छूना सख्त मना होता है, क्योंकि की छोटी सी लापरवाही अन्य समस्या कारण बन सकती है, उसके साथ ही पहले एक हफ्ते तक आंखों में पानी सम्पू साबुन का गाज और अन्य चीजों विशेष सावधानी रखना पड़ता है, और मेकअप, काजल, आईलाइनर फेस क्रीम का उपयोग करने के लिए बहुत सावधानी रखनी पडती है, जबकि धूल, धुआं और तेज धूप से बचने के लिए बाहर निकलते समय काले चश्मे का प्रयोग करना पड़ता है।

जबकि 3–4 हफ्तों तक स्विमिंग, जिम और भारी एक्सरसाइज से दूरी बनाए रखना होता है, उसके साथ ही, डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप चेक-अप समय पर करवाना बहुत जरूरी होता है, क्यूंकि सही देखभाल से आंखें जल्दी ठीक होती हैं और विज़न लंबे समय तक साफ बना रहता है।

LASIK सर्जरी करवाने मे कितना रूपये लगते है?

हमारे देश ​भारत में Lasik Surgery का खर्च मुख्य रूप से आपके द्वारा चुनी गई तकनीक, अस्पताल की साख और आपके शहर पर निर्भर करता है, जिसमें शामिल है फीस Diagnostic tests और कौन सी lasik surgery आप करवा रहें है उसके बाद दवाइयां और फॉलो-अप विजिट शामिल है, जिसमें दोनों आँखों का खर्च ₹60,000 से लेकर ₹1,30,000 तक हो सकता है, लेकिन यह आपके शहर और अस्पताल के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है

LASIK सर्जरी के फायदे नुकसान और जोखिम कारक

LASIK सर्जरी ने दुनिया भर के करोड़ों लोगों का जीवन बदला है, लेकिन किसी भी मेडिकल प्रक्रिया की तरह, लेसिक LASIK सर्जरी के भी अपने फायदे और कुछ संभावित जोखिम होते हैं, हालांकि लेसिक की सफलता दर 96% से अधिक है लेकिन कुछ मरीजों को अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे:

LASIK सर्जरी के फायदे

  • LASIK सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप बिना चश्मे का सब कुछ साफ़ देख सकते हैं, यह आपकी लाइफस्टाइल को पूरी तरह बदल देता है और सर्जरी के बाद चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस से छुटकारा मिल जाता है।
  • LASIK सर्जरी के बाद अधिकांश मरीजों को सर्जरी के अगले ही दिन 20/20 Vision मिल जाता है और बिना चश्मे और कांटेक्ट लेंस के बहुत स्पष्ट दिखाई देने लगता है।
  • सबसे बड़ी बात सर्जरी के समय ​सुन्न करने वाली ड्रॉप्स का उपयोग होता है, इसलिए मरीज को सर्जरी के दौरान कोई दर्द महसूस नहीं होता।
  • LASIK सर्जरी में किसी टांके या पट्टी की जरूरत नहीं पडती है और ​तेज रिकवरी होती है, सर्जरी के बाद आप 24-48 घंटों के भीतर अपने सकारात्मक काम और सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं।
  • डिफेंस, एविएशन पायलट, मर्चेंट नेवी और पुलिस जैसी नौकरियों के लिए विजन का चश्मा मुक्त होना अनिवार्य होता है, जबकि Lasik Surgery इन सपनों को पूरा करने में मदद करती है।
  • LASIK सर्जरी का खर्च एक बार में ज्यादा लगता है, जबकि क्लीनिंग सॉल्यूशन के खर्चों से छुटकारा मिल जाता है।

लेसिक सर्जरी के नुकसान

  • फ्लैप से जुड़ी समस्याएं के कारण कुछ दुर्लभ मामलों में, कॉर्निया का फ्लैप अपनी जगह से हिल सकता है या उसमें सूक्ष्म झुर्रियां आ सकती हैं, और ऐसे मामलों में इसे फेम्टो-लेसिक या स्माइल तकनीक से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • LASIK सर्जरी के बाद कुछ महीनों तक आँखों में सूखापन के कारण आंसू कम बन सकते हैं, जिससे आँखों में चुभन या सूखापन महसूस होता है, और इसके लिए डॉक्टर लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स देते हैं।
  • LASIK सर्जरी के बाद कुछ लोगों को रात में देखने में कठिनाई हो सकती है जैसे रात के समय लाइट के चारों ओर घेरे या चमक दिखाई देना लेकिन यह समस्या अक्सर कुछ महीने में ठीक भी हो जाती है।
  • LASIK सर्जरी के समय यदि लेजर बहुत कम या बहुत ज्यादा टिश्यू हटा देता है, तो विजन पूरी तरह साफ़ नहीं होता और ऐसी स्थिति में दूसरी छोटी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
  • LASIK सर्जरी के बाद बहुत ही कम मामलों में और विशेषकर जिनका नंबर बहुत ज्यादा होता है उनमे समय के साथ थोड़ा सा नंबर वापस आ सकता है।

LASIK Surgery किसको नही करवानी चाहिए?

LASIK Surgery चश्मा हटाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है, लेकिन यह हर किसी के लिए सही साबित नहीं होती, खास कर कुछ परिस्थितियों में LASIK Surgery करवाना बिल्कुल जोखिम भरा हो सकता है, और ऐसे मामलों में डॉक्टर भी मना कर देते है या अन्य विकल्प सुझाते हैं, क्यूंकि जिन लोगों को Keratoconus या कॉर्निया से जुड़ी गंभीर बीमारी होती है, उनके लिए LASIK सुरक्षित नहीं मानी जाती है, और इसी तरह जिनकी कॉर्निया बहुत पतली होती है, उनमें सर्जरी के बाद आंख कमजोर होने का खतरा बना रहेता है, और चश्मे का नम्बर वापस आसकता है, और ड्राई आई सिंड्रोम है, तो LASIK Surgery के बाद आँखों मे जलन और विज़न की समस्या बढ़ सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण और आखरी बात अनियंत्रित डायबिटीज़, और Lupus या Rheumatoid Arthritis होने पर घाव भरने में परेशानी आती है, जबकि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण आंखों का नंबर बदल सकता है, इस मामलों मे इसके अलावा, 18 वर्ष से कम उम्र वाले और लगातार बदलते चश्मे के नंबर वाले लोग भी LASIK के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते, और इस मामले मे डॉक्टर सर्जरी को टाल सकता है और आपको करवाना भी नही चाहिए।

निष्कर्ष

चश्मा हटाने के लिए LASIK Surgery आज के समय में एक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक समाधान साबित हो रहा है, जिसने करोड़ों लोगों को चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस की झंझट से आज़ादी दिलाई है, यदि आप भी चश्मा हटाना चाहते हैं, तो LASIK Surgery करवाने से पहले आँखों की पूरी जाँच, सही तकनीक का चुनाव और अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद ज़रूरी है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपने डॉक्टर से पूरी जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें, क्यूंकि सही समय पर लिया गया एक सही निर्णय आपको जीवनभर के लिए स्पष्ट दृष्टि का उपहार दे सकता है।

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई सभी जानकारी केवल जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है, इसे किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, और ध्यान दें आँखों की स्थिति और सर्जरी के परिणाम हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से परामर्श अवश्य लें।

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गाजर (Carrot) एक जड़ वाली सब्ज़ी है और गाजर को वैज्ञानिक भाषा में Daucus carota कहा जाता है जिसको हर कोई जनता है जो नारंगी रंग की होती है, लेकिन लाल पीली और बैंगनी गाजर भी पाई जाती हैं और इसका उपयोग कच्चा पक्का किसी भी तरीके से किया जा सकता है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आँखों और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है जिसका उपयोग सलाद, सब्ज़ी, जूस और हलवे के रूप में किया जाता है

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आँखों को सवस्थ रखने के लिए क्या खाएं? 10 सबसे अच्छे खाद्य पदार्थ - Best foods for eye health जिन्हे आपको अपने आहार मे शामिल करना चाहिए

Best foods for eye health यानी आँखों के लिए सही पोषण अपने भोजन मे शामिल करना बहुत जरुरी है क्यों की आज के समय हर घर मे किसी ना किसी को आँखों से सम्बंधित समस्या है और ये समस्या बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक मे है और बढ़ती जा रही है

हालांकि उम्र बढ़ने के साथ दृष्टि स्वाभाविक रूप से कमजोर हो सकती है, लेकिन इसके कई जीवनशैली कारक भी होते है जो हमारी दृष्टि को प्रभावित कर सकते हैं लेकिन सही खान पियन और मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और डिजिटल स्क्रीन पर घंटों भर बिताए जाने वाले समय को कम करने तक, ऐसे कई तरीके हैं जिनसे हम सभी अपनी आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं

हालांकि इस डिजिटल दौर मे और भाग दौड़ भरी जिंदगी मे बढ़ते प्रदूषण और डिजिटल स्क्रीन पर घंटों भर बिताए जाने वाले समय के कारण कम उम्र में ही आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है और आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखना और सिरदर्द होने जैसी समस्याएं बनती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि Best Foods For Eye Health यानी सही पोषण से आप आंखों के स्वास्थ्य और दृष्टि में सुधार और अन्य समस्याओं को कम कर सकते हैं?

इस लेख में हम घर पे पाये जाने वाले कुछ ऐसे बेहतरीन खाद्य पदार्थों पर नज़र डालेंगे जिन्हें हम अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं और जो आंखों के स्वास्थ्य और दृष्टि में सुधार करने में सहायक सिद्ध हुए हैं।

आँखों की सेहत के लिए क्या खाएं? (Best foods for eye health)

आँखों और स्पष्ट दृष्टि के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व, विशेष रूप से खनिज और विटामिन, आवश्यक होते है और कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे है जिनमे इनकी मात्रा काफी ज्यादा होती है और इन्हे हम नियमित रूप से अपने आहार में शामिल कर सकते हैं:

गाजर (Carrots)

  • गाजर को दुनिया भर में Best Foods for eye health माना जाता है और गाजर में मौजूद पोषक तत्व Vitamin A, Beta Carotene, Antioxidants, से भरपुर होता है और आंखों के लिए बहुत फायदे मंद साबित होते है और शरीर को भी कई लाभ प्रदान करता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां (Green Leafy Vegetables)

  • हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी सब्जियों मे अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ पाये जाते है और इनका बराबर सेवन करने से आँखों और शरीर दोनों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है जैसे Retina को मजबूत बनाता हैं मोतियाबिंद का खतरा कम करता है और UV rays से आंखों की रक्षा करता है।

शिमला मिर्च (Bell Peppers)

  • शिमला मिर्च विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत है और मिर्च उन सब्जियों में से एक है जिनमें प्रति कैलोरी सबसे अधिक विटामिन सी पाया जाता है और विटामिन सी आपकी आंखों की रक्त वाहिकाओं के लिए बहुत अच्छा होता है जो मोतियाबिंद से बचाव और आँखों के लेंस को स्वस्थ रखता है जबकि शरीर के सवस्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

मछली (Fatty Fish)

  • मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है जो रेटिना की संरचना का मुख्य घटक हैं और खासकर ड्राई आई सिंड्रोम को रोकना और शिशुओं में दृष्टि विकास में बहुत फायदेमंद होता है और शरीर को भी कई लाभ प्रदान करती है।

अंडा (Eggs)

  • अंडा एक ऐसी चीज है जो आंखों से लेकर पुरे शरीर के लिए आधे से ज्यादा पोषक तत्व प्रदान करता है और अंडे की जर्दी मे पाए जाने वाले ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन जिंक काफ़ी मात्रा मे होता है और विटामिन भी जो Night Vision और आँखों की थकान कम करता है और स्वस्थ रखता है।

दूध (Milk)

  • दूध एक ऐसी चीज है जिस्से पनीर, लस्सी, घी, और अन्य चीज भी दूध से बनाई जाती है केवल नाम बदल जाता है लेकिन इसमें में मौजूद पोषक तत्व शरीर के साथ आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होते है जैसे Vitamin A आंखों के संक्रमण से बचाता है और Night Blindness जैसे कई अन्य रोगों से भी बचाता है।

ड्राई फ्रूट्स (Dry fruts)

  • ड्राई फ्रूट्स मे विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं जो उम्र से संबंधित आँखों की बीमारियों को धीमा करने में मदद करता है और आँखों की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है और खासकर ड्राई आई के लक्षणों में सुधार करता है और आँखों की थकान तनाव कम करता है उसके साथ शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है।

खट्टे फल (Citrus Fruits)

  • संतरा, नींबू और आंवला विटामिन-C से भरा होता है जो पुरे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है और आंवला तो आंखों की रोशनी बढ़ाने उन्हें ठंडक पहुँचाने और दृष्टि को पुनर्जीवित करने वाला और आँखों के सवस्थ के लिए आयुर्वेद में सबसे श्रेष्ठ माना गया है इसलिए Best foods for eye health की केटेगरी मे आता है।

फलियां और दालें (Legumes)

  • राजमा और मसूर की दाल केवल स्वादिष्ट ही नहीं होती है, बल्कि ये आँखों के लिए एक गुप्त अस्त्र की तरह काम करते हैं, क्यों की इसमें जिंक की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो आंखों के मैकुला को स्वस्थ रखता है और रतौंधी को रोकने और रात में देखने की क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है।

शकरकंद (Sweet Potatoes)

  • गाजर की तरह शकरकंद भी आंखों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्यों की इसमें विटामिन ई और ए दोनों काफ़ी ज्यादा मात्रा मे पाये जाते हैं, और इसे भी सवस्थ संगठनों द्वारा Best Foods For Eye Health की केटेगरी मे रखा गया है जो दृष्टि की स्पष्टता बढ़ाते हैं और साथ ही शरीर को भी सवस्थ रखने मे मदद करते है।
आँखों की सेहत के लिए क्या खाएं

आंखों के लिए पोषण क्यों जरूरी है? (Why Nutrition Matters for Eyes)

आंखों की सेहत और रोशनी बनाए रखने के लिए संतुलित पोषण बहुत आवश्यक होते है क्यों की आंखें लगातार काम करती हैं और मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहती हैं, ऐसे में आंखों के रेटिना और लेंस को सुरक्षित रखने के लिए खास पोषक तत्वों की जरूरत होती है और इस आधुनिक जीवनशैली में आँखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और इन सभी समस्याओं का एक बड़ा कारण है पोषण की कमी।

क्यों की आंखों की कोशिकाएं ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जल्दी प्रभावित होती हैं इसलिए आंखों को ऐसे पोषक तत्व चाहिए जो फ्री रेडिकल्स से बचाव करें, रेटिना की कोशिकाओं को मजबूत बनाएं, और आंखों में नमी बनाए रखें और उम्र के साथ होने वाली दृष्टि हानि को धीमा करें और यही कारण है कि Antioxidants और Essential Vitamins आंखों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।

Vitamin A

Vitamin A आंखों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन माना जाता है और इसकी कमी से रतौंधी (Night Blindness) आंखों में सूखापन और कॉर्निया को नुकसान हो सकता है, क्यों की Vitamin A रेटिना में मौजूद Rhodopsin Pigment के निर्माण में मदद करता है, जिससे कम रोशनी में देखने की क्षमता बनी रहती है, और Vitamin A गाजर, पालक, शकरकंद, दूध, अंडा, मछली मे ज्यादा मात्रा मे पाया जाता है

Vitamin C

Vitamin C एक शक्तिशाली Antioxidant है जो आंखों के लेंस को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है और इस्से मोतियाबिंद का खतरा कम होता है आंखों की रक्त नलिकाएं और आँख स्वस्थ रहती हैं और Vitamin C आंवला, संतरा, नींबू, शिमला मिर्च मे ज्यादा पाया जाता है

Omega-3 Fatty Acids

आजकल Dry Eye एक आम समस्या बन चुकी है, और खासकर मोबाइल और कंप्यूटर उपयोग करने वालों में ज्यादा होता है जबकि Omega-3 Fatty acids आंखों में आंसुओं की गुणवत्ता सुधारता है जलन और खुजली को कम करता है बच्चों में आंखों और दिमाग के विकास में मदद करता है और आंखों में नमी बनाए रखता है और Omega-3 अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स, मछली मे ज्यादा पाया जाता है

Lutein & Zeaxanthin

Lutein और Zeaxanthin प्राकृतिक Carotenoids हैं, और मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली Blue Light को फिल्टर करते हैं और Macular Degeneration के खतरे को कम करते हैं, आंखों की Contrast Sensitivity बढ़ाते हैं और आज के डिजिटल युग में ये पोषक तत्व बेहद जरूरी हो गए हैं और Lutein & Zeaxanthin हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, मक्का, ब्रोकली, और अंडे की जर्दी मे भरपुर होते है

आँखों को नोकसान पहुँचाने वाले खाद्य पदार्थ? (Foods Harmful for Eye Health)

​हमने तो यह देखा लिया की Best foods for eye health कौन से हैं, ताकी हम अपनी आँखों को सवस्थ रख सके लेकिन यह भी समझना जरूरी है की हमारी कौन सी खाने पिने की आदतें आँखों के लिए हानिकारक हैं और कौन से खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से दृष्टि समय से पहले कमजोर हो सकती है और अन्य नेत्ररोग पैदा हो सकते है।

  • शुगर और मीठे ड्रिंक्स (Sugary Foods and Drinks): चीनी का इस्तेमाल हर घर मे और हर कोई करता है लेकिन इसके ज्यादा सेवन से मोटापे का कारण बनता है और आँखों की नसों को सीधा नुकसान पहुँचाता है और ज्यादा शुगर से Diabetic Retinopathy का खतरा बढ़ता है, जिस्से धीरे-धीरे दृष्टि पूरी तरह खत्म हो सकती है जो अंधेपन का एक मुख्य कारण है इसलिए सोडा, ज्यादा मीठी चाय, काफी, कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा मिठाई का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • ज्यादा नमक वाला भोजन (High Sodium Foods): अगर आप नमक वाली चीज ज्यादा खाते है या खाने के ऊपर से नमक डालते हैं तो ये आपकी आँखों और शरीर के लिए नोकसान दे साबित हो सकता है क्यों की बहुत ज्यादा नमक शरीर में पानी को रोकता है जिससे आंखों में सूजन आ जाती है और इसके अलावा, यह ब्लड प्रेशर बढ़ाता है जो आंखों की नसों को कमजोर कर देता है, इसलिए आपको चिप्स, नमकीन, अचार, नूडल्स और बहुत ज्यादा नमक वाली चीज़ों को खाने से बचना चाहिए।
  • मैदा और प्रोसेस्ड कार्ब्स (Refined Carbohydrates): आज के समय हर घर के बच्चों को पास्ता, पिज्जा, सफेद ब्रेड और बिस्कुट खाना ज्यादा पसंद करते है दरअसल ये शरीर और आंखों के स्वास्थ्य को बिगाड़ सकते हैं क्यों की अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ Age-related Macular Degeneration के खतरे को बढ़ा देते हैं इसलिए अपने बच्चों को और खुद​ मैदे की जगह चोकर युक्त आटा या मल्टीग्रेन अनाज का उपयोग करें और मैदा से बनी चीज़ों का हिसाब भर सेवन करें।

आँखों को स्वस्थ रखने के अन्य तरीके

सिर्फ Best foods for eye health खाना ही काफी नहीं है उसके साथ ही अगर आप अपनी कुछ आदतों मे बदलाव और उसके साथ अन्य तरीके अपनाते है तो बहुत फायदे मंद साबित हो सकता है जैसे:

  • आँखों की जांच: अगर आपको आँखों मे कोई समस्या है जैसे अगर आप चश्मा पहनते है या काला मोतियाबिंद और शुगर या ब्लड प्रेसर के मरीज़ है तो अपनी आँखों की जाँच 6 महीने या साल में कम से कम एक बार अवश्य करवा लेना चाहिए।
  • हाइड्रेशन: पानी पिने मे कमी ना करें क्यों की शरीर मे पानी की कमी से अन्य रोग पैदा होने लगते है जो आँखों के लिए बहुत नोकसान दे साबित होता है इसलिए दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं ताकि आँखों में नमी बनी रहे।
  • 20-20-20 नियम: अगर आप कंप्यूटर लैपटॉप पर काम करते है और मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा करते है तो हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।

उम्र के अनुसार आँखों के लिए सही आहार (​Best Foods for Eye Health According to Age)

आँखों की ज़रूरतें उम्र के साथ बदलती रहती हैं और बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग पोषण की आवश्यकता उनके शरीर के हिसाब से होती है।

  • बच्चों के लिए आँखों का पोषण: बच्चों का शरीर और आँखों का विकास तेजी से होता है, इसलिए आपको अपने बच्चों को विटामिन A, कैल्शियम और ओमेगा-3 युक्त आहार देना चाहिए जैसे दूध, अंडा, फल, हरी सब्जियां और साथ ही फ़ास्ट फ़ूड्स से और बाहर की चीज जैसे तली भुनी चीज़ों से दूर रखें और अपने बच्चों की आँखों की जाँच उनकी उम्र के हिसाब से करवानी चाहिए क्यों की समय रहेते रोगों को पता लग सकता है।
  • युवाओं के लिए: आजकल युवाओं में मोबाइल और लैपटॉप के अधिक उपयोग करने से आँखों में जलन, सूखापन और थकान जैसी समस्या आम हो गई है और ऐसे में ओमेगा-3 फैटी एसिड, ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन युक्त भोजन जैसे मछली, पालक, अखरोट और अंडा बहुत लाभकारी होते हैं।
  • बुजुर्गों के लिए: बढ़ती उम्र में शरीर कमजोर होने के साथ आँखों मे भी कमजोरी आने लगती है जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और मैक्युलर डिजनरेशन का खतरा बढ़ जाता है इसलिए आपको हरी पत्तेदार सब्जियां, खट्टे फल, ड्राई फ्रूट्स और एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन करना चाहिए जो आँखों को सवस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं।

निष्कर्ष

​आँखें हमारे शरीर का वो हिस्सा हैं जिनके बिना दुनिया अधूरी है लेकिन आज के डिजिटल युग में बढ़ता स्क्रीन टाइम और प्रदूषण हमारी दृष्टि को समय से पहले कमजोर कर रही है और अन्य नेत्र समस्या पैदा कर रही है और खासकर बच्चों मे लेकिन जैसा कि हमने इस लेख में देखा, Best Foods for Eye Health जैसे गाजर, पालक, मछली और दूध को अपनी डाइट में शामिल करके हम अपनी आँखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं लेकिन याद रखें, केवल अच्छा खाना ही काफी नहीं है, बल्कि आँखों को आराम देना और समय-समय पर जाँच करवाना भी उतना ही जरूरी है इसलिए अपनी आँखों का ख्याल रखें, ताकि वे आपका ख्याल रख सकें।

मोतियाबिंद (Cataract) क्या है? लक्षण, कारण और उपचार की पूरी जानकारी

मोतियाबिंद:(Cataract) कारण, लक्षण और उपचार netracare.in

मोतियाबिंद जिसे मेडिकल भाषा मे (Cataract) कहा जाता है और मोतियाबिंद उम्र से संबंधित एक आम नेत्र रोग है जिसमें आँख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है और भारत में लगभग 62.6% नेत्रहीनता का कारण मोतियाबिंद ही है और इसके हर साल देश में 20 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं शुक्र है कि आधुनिक सर्जरी तकनीकों ने इसका इलाज बहुत सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है जिससे पिछले कुछ वर्षों में इसके कारण होने वाली नेत्रहीनता में कमी आई है, इस लेख मे हम मोतियाबिंद के हर पहलू कारणों, लक्षणों, प्रकारों से लेकर उपचार के आधुनिक विकल्पों तक की पूरी जानकारी शामिल की गई है।

मोतियाबिंद क्या होता है?

एक साधारण आँख का लेंस सामान्यत पारदर्शी होता है और रेटिना पर प्रकाश केंद्रित करके स्पष्ट छवि बनाने में मदद करता है लेकिन मोतियाबिंद (Cataract) तब होता है जब इस लेंस में मौजूद प्रोटीन गुच्छे बनाने लगते हैं जिससे लेंस धुंधला या अपारदर्शी हो जाता है और इस धुंधलेपन के कारण प्रकाश लेंस से आसानी से गुजर नहीं पाता और रेटिना तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुँच पाता जिसके परिणामस्वरूप दृष्टि धुंधली हो जाती है फिर चाहे आप चस्मा पहने या दवा खाये या डाले कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है लेकिन यह स्थिति आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो अंधेपन का कारण भी बन सकती है।

मोतियाबिंद के प्रमुख कारण

मोतियाबिंद (Cataract) का सबसे आम कारण है उम्र का बढ़ना है उम्र के साथ लेंस में प्राकृतिक बदलाव होते हैं जिस्से मोतियाबिंद विकसित होने लगता है हालांकि इसके कई अन्य कारक भी जोखिम को बढ़ाते हैं जैसे:

  • इसका सबसे प्रमुख कारण उम्र का बढ़ना है
  • अन्य रोग जैसे मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियाँ
  • वर्तमान मे या पिछली आँख की चोट या सर्जरी
  • स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक सेवन
  • UV किरणों के अत्यधिक संपर्क मे रहेना
  • धूम्रपान या शराब का अत्यधिक सेवन
  • परिवार में मोतियाबिंद (Cataract) का इतिहास होना
मोतियाबिंद Cataract

मोतियाबिंद के लक्षण

मोतियाबिंद (Cataract) के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं जैसे:

  • दृष्टि में धुंधलापन और बादलदार या धुएं जैसा दिखाई देना इसका सबसे आम लक्षण है।
  • रात की दृष्टि में कमी और रात में या कम रोशनी में देखने मे चलने फिरने मे और खासकर गाड़ी चलाने में कठिनाई होना।
  • सर मे दर्द होना जो काला मोतियाबिंद का संकेत हो सकता और इसमें टपकन जैसा दर्द होता है और नज़र धीरे धीरे कम होने लगती और कुछ समय सीमा बाद बहुत ज्यादा नज़र कम हो जाती है।
  • चकाचौंध एवं प्रभामंडल जैसे रोशनी के चारों ओर चकाचौंध या तेज रोशनी से आँखें चौंधियाना या प्रभामंडल दिखाई देना।
  • रंगों का फीकापन जैसे रंग पहले जैसे चमकीले न दिखाई देना बल्कि पीले या भूरे रंग के फिल्टर से देखने जैसा अनुभव होना।
  • एक आँख से दोहरी दृष्टि दिखना खासकर एक ही आँख से किसी एक वस्तु के दो प्रतिबिंब दिखाई देना।
  • चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव जैसे निकट दृष्टिदोष में लगातार बढ़ोतरी होना।

मोतियाबिंद के प्रकार

Nuclear Cataract (न्यूक्लियर मोतियाबिंद)

न्यूक्लियर मोतियाबिंद में लेंस का बीच वाला हिस्सा धीरे-धीरे कठोर और धुंधला होने लगता है और यह उम्र बढ़ने के साथ सबसे अधिक देखा जाने वाला और सबसे आम मोतियाबिंद है और इसमें दूर की नजर धीरे-धीरे धुंधली होती जाती है लेकिन कभी-कभी पास की नजर में अस्थायी सुधार होता है जैसे पढ़ने लिखने या बारीक काम करने में कुछ समय के लिए आसानी होती है लेकिन दूर की दृष्टि खराब बनी रहती है।

Cortical Cataract (कॉर्टिकल मोतियाबिंद)

कॉर्टिकल मोतियाबिंद मे लेंस के बाहरी किनारे से सफेद त्रिकोणीय या स्पोक जैसे धब्बे धीरे धीरे बनना सुरु होते है और केंद्र की ओर बढ़ते हैं जिसकी वजह से यह प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बनना और रात में गाड़ी चलाते समय तेज चकाचौंध पैदा होना और अन्य समस्या भी बनती है।

Posterior Subcapsular Cataract (पोस्टीरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद)

पोस्टीरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद में लेंस के पीछे की सतह पर धुंधलापन बनने लगता है और तेजी से बढ़ता है और इसकी वजह से पढ़ने में दिक्कत चकाचौंध खासकर रात में और उजाले में भी देखने में परेशानी पैदा करता है और यह मधुमेह रोगियों मे और स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग करने वालों में आम है लेकिन यह कम उम्र में भी हो सकता है।

Congenital Cataract (जन्मजात मोतियाबिंद)

बच्चा पैदा होता है तो उसकी आँखों मे मोतियाबिंद होता है इसलिए इसको जन्मजात मोतियाबिंद कहा जाता है जो जन्म के समय मौजूद होता है और यह आनुवंशिक कारणों या गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से हो सकता

Radiation-Induced Cataract (विकिरण-प्रेरित मोतियाबिंद)

यह मोतियाबिंद तब बनता है जब कैंसर उपचार जैसी विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) के बाद धीरे धीरे विकसित होने लगता है जिसकी वजह से नजर अचानक खराब हो जाती है और लेंस में सफेदपन आ जाता है डबल दिखाई देना उसके साथ चकाचौंध और धुंधलापन भी महसूस होता है

मोतियाबिंद (Cataract) की रोकथाम

मोतियाबिंद (Cataract) ज्यादा तर उम्र बढ़ने के साथ होता है और उम्र के साथ मोतियाबिंद बनने का खतरा बढ़ता है लेकिन सही आदतों और खान पान से इसे देरी से आने या तेजी से बढ़ने से रोकना काफी हद तक संभव है

  • आँखों की नियमित जाँच: आपको अपनी आँखों की निमित्त जाँच करवाना चाहिए अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो हर साल आँखों की जाँच कराएँ क्यों की शुरुआती अवस्था में मोतियाबिंद की पहचान होने पर उसको चश्मे दवा और अपनी खुद की देखभाल से उसको काफ़ी हद तक रोक सकते है
  • धूप से आँखों का बचाव: आँखों को सूरज की हानिकारक UV किरणों से बचाने के लिए धूप के चश्मे का उपयोग करना चाहिए और टोपी या कैप का उपयोग भी करें क्यों की UV किरणें लेंस को नुकसान पहुँचाकर मोतियाबिंद को तेज करती हैं
  • स्वास्थ्य प्रबंधन: अगर आपको मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कोई बीमारी है तो उसको कंट्रोल में रखें क्यों की अनियंत्रित शुगर से मोतियाबिंद जल्दी हो सकता है और नियमित ब्लड शुगर जाँच और दवा और परहेज करते रहें
  • धूम्रपान छोड़ना: यदि आप धूम्रपान और शराब का सेवन करते है तो उससे दूरी बनाये और कोसिस करें की छोड़ ही दें क्यों की धूम्रपान मोतियाबिंद का बड़ा कारण है और अधिक शराब का सेवन भी जोखिम को बढ़ाता है
  • संतुलित आहार: विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ अपने रोज के भोजन मे शामिल करें जैसे हरी सब्जियां गाजर पालक और नींबू संतरा आँवला बादाम सूरजमुखी के बीज अलसी अखरोट मछली ये सब आपकी आँखों के सवस्थ के लिए फायदेमंद है और मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण को कम करता है
  • स्टेरॉइड दवाओं चोट और संक्रमण से बचाव: बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉइड आई ड्रॉप या दवाएँ न लें और ना ही लम्बे समय तक बिना डॉक्टर की सलह के उपयोग करें क्यों की इस्से मोतियाबिंद का खतरा और आँख के प्रेसर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है और काम के दौरान प्रोटेक्टिव आई गॉगल्स पहनें और आँखों में चोट लगने या इंफेक्शन होने पर तुरंत अपने नज़दीकी डॉक्टर से सम्पर्क करें

मोतियाबिंद (Cataract) का इलाज

मोतियाबिंद (Cataract) का सही और स्थायी इलाज केवल सर्जरी है और समय पर ऑपरेशन कराने से दृष्टि न केवल साफ होती है बल्कि आँख की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है और मोतियाबिंद ऑपरेशन में धुंधले हो चुके प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह उच्च गुणवत्ता वाला कृत्रिम लेंस (IOL) लगाया जाता है जिससे दृष्टि फिर से स्पष्ट हो जाती है और मोतियाबिंद का जितनी जल्दी और सही समय पर ऑपरेशन कराया जाए उतनी ही सुरक्षित और बेहतर दृष्टि सुनिश्चित होती है।

क्या मोतियाबिंद दवा चश्मा और घरेलू उपचार से ठीक हो सकता है

मोतियाबिंद (Cataract) का अस्थाई इलाज ऑपरेशन ही है और इसे घरेलू उपचार दवा या चश्मे से ठीक नहीं किया जा सकता चाहे आप शहद गुलाब जल एलोवेरा त्रिफला आदि का सेवन करें फिर भी मोतियाबिंद को खत्म नहीं कर सकते और कोई भी दवा या आई ड्रॉप मोतियाबिंद को ठीक नहीं कर पाते है और कुछ विटामिन या एंटीऑक्सीडेंट सिर्फ आँखों की सेहत के लिए होते हैं और चश्मा भी सिर्फ शुरुआती अवस्था में थोड़ी देर के लिए देखने में मदद करता है लेकिन चश्मा मोतियाबिंद को ठीक या रोक नहीं सकता।

डॉक्टर के पास कब जाये

अगर आपको अपनी आँखों मे मोतियाबिंद (Cataract) के लक्षण दिखने के साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे जैसे धुंधला दिखने लगे चीज़ें पहले जैसी साफ़ न दिखें बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़े रात में देखने में परेशानी हो तेज़ रोशनी या गाड़ी की लाइट चुभने लगे रंग फीके या पीले नज़र आने लगें पढ़ने-लिखने मोबाइल देखने टीवी देखने या चलने-फिरने में दिक्कत होने लगे तो आपको अपने नज़दीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

और 40 साल की उम्र के बाद भले कोई परेशानी न हो तब भी हर साल आँखों की जाँच ज़रूर करवाएं अगर आपको डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर है या लंबे समय से स्टेरॉइड दवाएँ ले रहें है तो धुंधलापन दिखने पर और अन्य लक्षण दिख रहें है या आँख में चोट लगने के बाद ऐसा हो रहा है तो देर देर ना करें और सबसे ज़रूरी बात अगर बच्चों में आँख की पुतली सफ़ेद दिखे या बच्चा ठीक से न देख पा रहा हो तो बच्चों की आँखों की जाँच और अपने नज़दीकी डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए क्यों की अन्य रोगों की वजह से Cataract विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

मोतियाबिंद का निदान कैसे किया जाता है?

  • Slit Lamp Examination: आपका डॉक्टर आपकी आँखों की और लेंस की धुंधलाहट को माइक्रोस्कोप से देखेगा।
  • Visual Acuity Test: आपका डॉक्टर आपको दूर और पास की दृष्टि की क्षमता देखने के लिए चार्ट पढ़वाकर दृष्टि की क्षमता मापेगा।
  • Retina Examination: आपका डॉक्टर आपकी आँखों मे पुतली फैलाने वाली ड्राप डाल कर रेटिना की जाँच करेगा।
  • Tonometry: आपका डॉक्टर आँख के प्रेशर की जांच करेगा और काला मोतियाबिंद जैसी स्थिति तो नहीं है उसको देखेगा।
  • Dilated Eye Examination: आपका डॉक्टर लेंस की डिग्री और मोतियाबिंद की कठोरता जांचे गा और मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद की स्थिति में पहुँच तो नहीं गया है ये भी देखेगा।
मोतियाबिंद Cataract

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?

मोतियाबिंद (Cataract) का एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज सर्जरी है और यह किसी भी दवा चश्मे या आई ड्रॉप से यह ठीक नहीं होता है लेकिन ज्यादा तर मरीज और उसके फैमली मेंबर्स अक्सर यह पूछते हैं कि ऑपरेशन कब कराना चाहिए दरअसल जैसे ही मोतियाबिंद आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगता है तो आपका डॉक्टर आपको सर्जरी की सलाह दे सकता हैं जैसे:

  • रोजमर्रा के कामों में परेशानी आने लगे
  • पढ़ने लिखने दूर और पास का काम करने मे कठिनाई होना
  • जब दृष्टि अत्यधिक धुंधली हो जाये
  • उजाले या रोशनी से चकाचौंध महेसूस ज्यादा हो
  • रात में गाड़ी चलाना मुश्किल हो
  • मोतियाबिंद (Cataract) सम्बलबाई बन गया हो
  • मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद बन जाये
  • चश्मे का नंबर बार-बार बदलने लगे

मोतियाबिंद ऑपरेशन के प्रकार

Cataract दुनियाभर मे दृष्टिहीनता का एक प्रमुख कारण है और यह एक इलाज योग्य बीमारी है और मोतियाबिंद विकसित हो जाने पर इसका एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज मोतियाबिंद का ऑपरेशन ही है और आधुनिक तकनीकों जैसे फैकोइमल्सिफिकेशन और उन्नत IOL लेंस के कारण यह सर्जरी अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित है लेकिन मोतियाबिंद ऑपरेशन किस प्रकार से किस तकनीक से करवा रहें है ये जानना बहुत ज़रूरी है

फैकोइमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification Surgery)

यह आज के समय में सबसे ज़्यादा फेमस और उन्नत तकनीक है और दुनिया भर मे मोतियाबिंद का ऑपरेशन इसी तकनीक से सबसे ज्यादा किया जाता है इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों से लेंस को तोड़ा जाता है और छोटे चीरे के साथ लेंस निकाला जाता है उसके बाद ( IOL ) लेंस लगाया जाता है और इसकी रिकवरी बहुत तेज़ होती है और दर्द ना के बराबर होता है और एक ही दिन में छुट्टी मिल जाती है और 24 घंटे के अंदर दिखने भी लगता है

स्मॉल इन्सीजन कैटरैक्ट सर्जरी (SICS)

यह हमारे देश भारत में ग्रामीण और सरकारी अस्पतालों में सबसे आम है इसमें आँखों के निचे और ऊपर इंजेक्शन लगा कर ऑपरेशन किया जाता है और थोड़ा बड़ा चीरा लगा कर लेंस निकला जाता है और इसमें हार्ड लेंस का उपयोग किया जाता है जिस्से दूर की नज़र ठीक हो जाती है लेकिन रिकवरी में समय थोड़ा ज्यादा लगता है और ऑपरेशन के बाद चश्मे की जरूरत ज्यादा होती है

लेज़र मोतियाबिंद ऑपरेशन (Laser Cataract Surgery)

इस तकनीक से मोतियाबिंद का ऑपरेशन ज्यादा कीमत मे होता है मतलब फेकोइमल्सिफिकेशन सर्जरी से काफी अधिक कीमत मे होता है और चुने गए लेंस व अस्पताल के आधार पर काफी बढ़ सकती है और बड़े हॉस्पिटल मे होता है इसमें चीरा और लेंस कट लेज़र से किया जाता है और यह कंप्यूटर-गाइडेड 3डी इमेजिंग पर आधारित होता है और तेज रिकवरी और कम तनाव के कारण दृष्टि में तेजी से सुधार और जल्दी सामान्य गतिविधियों में वापसी हो जाती है

एक्स्ट्रा कैप्सुलर कैटरैक्ट एक्सट्रैक्शन (ECCE)

यह एक पुरानी तकनीक है और आजकल ना के बराबर उपयोग होती है और इसमें इंजेक्शन टांके लगाए जाते हैं और बड़ा चीरा लगा कर लेंस निकला जाता है और लम्बे समय तक दर्द बना रहेता है और रिकवरी भी बहुत धीरी होती है और परहेज भी बहुत करना पड़ता है

सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले लेंस (IOL) के प्रकार

Cataract ऑपरेशन के दौरान लगाया जाने वाला कृत्रिम लेंस (IOL) भी कई प्रकार का होता है और सही लेंस चुनना उतना ही जरूरी है जितना आपको इस संसार को देखना ज़रूरी है।

  • मोनोफोकल लेंस: यह लेंस एक निश्चित दूरी जैसे दूर की दृष्टि साफ कर देता है और पढ़ने के लिए चश्मे की आवश्यकता होती है लेकिन फिर भी यह हमारे देश भारत मे 50% से ज्यादा लोगों को यही लगाया जाता है और इसकी कीमत थोड़ा कम होती है।
  • मल्टीफोकल या ट्राइफोकल लेंस: यह लेंस दूर पास और बीच की दूरी की दृष्टि साफ कर देता और इसमें चश्मे पर निर्भरता ना के बराबर होती है और इसका खर्च थोड़ा ज्यादा आता है लेकिन रिजल्ट बहुत अच्छा देता है।
  • टॉरिक लेंस: यह लेंस खास तौर पर मोतियाबिंद और दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) दोनों का इलाज को ठीक करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है और यह लेंस दूर और पास दोनों की दृष्टि में सुधार करता है।

मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च

मोतियाबिंद (Cataract) का ऑपरेशन हमारे देश भारत मे लगाये जाने वाले लेंस पर और ऑपरेशन किस जगह और कैसे किस तकनीक से करवा रहें है इसके ऊपर डिपेंड रहेता है लेकिन सबसे अच्छी बात यह है की बिलकुल मुफ्त मे भी हो जाता है लेकिन ऑपरेशन मरीज़ की इस्थिति उसकी उम्र क्या काम करता है कैसी जीवन सैली है इन सब बातों पर निर्भर करता है और इसके लिए आपका डॉक्टर आपको अच्छी सलाह दे सकता है.

ऑपरेशन की तकनीकअनुमानित खर्च (₹)अस्पताल का प्रकार
सरकारी योजना जैसे (आयुष्मान कार्ड्स से या आधार कार्ड्स से) Cataract का ऑपरेशन होता है और ये ऑपरेशन SICS के तरीके से किये जाते हैआयुष्मान कार्ड्स से होने वाला ऑपरेशन केवल आपको पंजीकरण के लिए 2-3 सौ रुपया देना होता है बाकि सब कुछ फ्री मे जबकि आधारकार्ड से कुछ जगह और कुछ लोग मुफ्त या ₹2,000 चार्ज लेते हैं आयुष्मान कार्ड्स से केवल ऑपरेशन वहा होता हैं जहाँ अस्पताल आयुष्मान सुविधा देते हैं सरकारी भी हो सकते हैं aur प्राइवेट भी लेकिन आधार कार्ड्स से केवल सरकारी अस्पताल मे ही सुविधा होती हैं
Laser (MICS/Femto) अगर आप इस विधी से cataract का ऑपरेशन करवा रहें हैं जो आज के समय की सबसे एडवांस तकनीक है ₹45,000 – ₹1,00,000मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल मे केवल ये सुविधा मिलती है जैसे बड़े शहर के बड़े हॉस्पिटल मे होता है
फैकोइमल्सिफिकेशन के तरीके से अगर आप ऑपरेशन करवा रहें जिसमें बिना चीरा पट्टी और इंजेक्शन लगे जो होता हैं ₹15,000 – ₹35,000प्राइवेट आई हॉस्पिटल मे ही केवल होता हैं

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद देखभाल और परहेज

  • Cataract ऑपरेशन के बाद सही देखभाल और परहेज न किया जाए तो आँखों में इंफेक्शन सूजन या देखने में समस्या हो सकती है इसलिए कुछ समय सीमा के लिए आपको कुछ चीज़ों का परहेज और देखभाल करना पड़ता है क्यों की मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद हल्की गड़न चुभन हो सकती है और सर्जरी के बाद आंख कुछ समय तक संवेदनशील बनी रहती है और ऐसे मे आपका परहेज आपकी आँखों मे इंफेक्शन का खतरा कम करता है सूजन और दर्द से बचाव होता है दृष्टि जल्दी साफ होती है ऑपरेशन का परिणाम बेहतर रहता है
  • मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आपको डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर उपयोग करें और कम से कम 4-5 दिन अच्छे से आराम करें और आंख को साफ और सुरक्षित रखें और डॉक्टर द्वारा दिया गया काला चश्मा इस्तेमाल करें और बच्चों और खेलकूद से थोड़ा दूरी बना के रखें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें और खान पियन हल्का ही करें जैसे हरी सब्जियां फल और विटामिन युक्त हो और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सामान्य समस्या

मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन के बाद कुछ सामान्य लक्षण दिख सकते है और इस्से घबराने की ज़रूरत नहीं है जैसे ऑपरेशन के बाद हल्की जलन या चुभन होना और थोड़ा पानी आना हल्का दर्द 1–2 दिन तक हो सकता है और धीरे-धीरे नजर साफ होना और आँख से कीचड़ आना ये सब सामान्य समस्या है लेकिन कोई चिंता या घबराने की बात नहीं है

ऑपरेशन के बाद इमरजेंसी में डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए

मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन के बाद 4-5 दिन सबसे संवेदनशील होते हैं और ऐसे मे कोई समस्या पैदा हो रही है और दवा डाल लेने से ठीक हो जाएगा ये सोचकर देर न करें अगर कोई गंभीर लक्षण दिखे या शक होने पर आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जैसे

  • अचानक तेज़ दर्द होने लगे क्यों की असहनीय दर्द खतरनाक हो सकता है
  • अचानक धुंधलापन या काला दिखने लगे और नज़र एकदम कम हो जाए
  • आँख में बहुत ज़्यादा लालि या सूजन हो क्यों की पलकों की सूजन इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है
  • आँख से पीला कीचड़ ज्यादा आने लगे क्यों की बदबूदार स्राव गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है
  • तेज़ रोशनी से बहुत दर्द या चुभन हो क्यों की यह आँख के अंदर सूजन या इन्फेक्शन की वजह से हो सकता है
  • मतली उल्टी या सिरदर्द के साथ आँख में दर्द हो तो यह आँख का प्रेशर बढ़ने का लक्षण हो सकता है
  • आँख पर चोट लगना या ज़ोर से रगड़ लग जाना भले ही दर्द कम हो फिर भी तुरंत दिखाना ज़रूरी है
  • अचानक बहुत ज़्यादा आँसू आना और आँख खुलने में दिक्कत होने लगे तो यह कॉर्निया की समस्या या इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है

निष्कर्ष:

मोतियाबिंद (Cataract) आज के समय 70% से अधिक लोगों मे पाया जाने वाला एक सामान्य नेत्ररोग है जो उम्र के साथ होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सही समय पर इसकी पहचान और इलाज से आप काफ़ी लम्बे समय तक बच सकते है और अपनी आँखों की रोशनी को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन अगर मोतियाबिंद विकसित हो जाता है तो फिर उसका एकमात्र इलाज केवल ऑपरेशन है लेकिन आज की आधुनिक तकनीक ने इस ऑपरेशन को बहुत आसान और दर्द रहित बना दिया है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी धुंधला दिखाई देने की समस्या हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें क्यों की मोतियाबिंद (Cataract) बुजुर्ग लोगों मे ज्यादा होने का खतरा बना रहेता है। याद रखें, स्पष्ट दृष्टि ही बेहतर जीवन की कुंजी है।

सफ़ेद मोतियाबिंद: कारण, लक्षण, प्रकार, निदान, सर्जरी के 4 आधुनिक प्रकार, रिकवरी, बचाव, और महत्वपूर्ण गाइड

सफ़ेद मोतियाबिंद

मोतियाबिंद जिसे मेडिकल भाषा मे (Cataract) कहा जाता है और यह दुनिया भर में होने वाले सबसे आम नेत्र रोगों में से एक है और यह आंखों की एक सामान्य समस्या है जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है लेकिन जब मोतियाबिंद पूरी तरह पक जाता है और लेंस पूरी तरह सफेद दिखाई देने लगता है तब इसे सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) कहा जाता है और यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें मरीज की नजर लगभग ना के बराबर हो जाती है जैसे सफ़ेद मोतियाबिंद वाली आँख से अस्पस्ट नहीं दिखना जिस्से रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।

इस ब्लॉग में हम सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के बारे में विस्तार से जानेंगे इसके कारण क्या है इसके लक्षण और मोतियाबिंद कितने प्रकार का होता है इसका निदान सर्जरी खर्च रिकवरी बचाव और भी बहुत कुछ (White Cataract) के बारे मे जानेंगे।

सफ़ेद मोतियाबिंद क्या है?

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) एक प्रकार का (Mature) या (Hypermature) मोतियाबिंद है और यह स्थिति तब बनती है जब मोतियाबिंद को लंबे समय तक बिना उपचार के छोड़ दिया जाता है जिसकी वजह से मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) बन जाता है जबकि सफ़ेद मोतियाबिंद मे लेंस इतना पक जाता है कि आंख में सफेद और चमकता हुआ दिखाई देने लगता है और आँखों से देखने वाला प्राकृतिक लेंस पूरी तरह से सफेद अपारदर्शी और कठोर बन जाता है और यह स्थिति दृष्टि को लगभग शून्य कर देती है और तुरंत सर्जरी की जरूरत होती है जबकि सामान्य मोतियाबिंद में लेंस धीरे-धीरे धुंधला होता है।

सफ़ेद मोतियाबिंद के कारण

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के कारण वही हैं जो साधारण मोतियाबिंद के होते हैं और मोतियाबिंद को लंबे समय तक बिना उपचार के और अनदेखा कर देने पर यह स्थिति बनती है:

  • उम्र बढ़ना: उम्र बढ़ने के साथ अधिकांश लोगों में मोतियाबिंद का खतरा बढ़ता है और 55 से 60 वर्ष के बाद मोतियाबिंद का होना एक सामान्य समस्या है जो उम्र बढ़ने के साथ होती है।
  • लंबे समय तक अनदेखा करना: मोतियाबिंद होने पर ज्यादा तर लोग मोतियाबिंद को वर्षों तक अनदेखा कर देते है और यही सबसे बड़ा कारण सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का बनता है और यह स्थिति दृष्टि को लगभग शून्य कर देती है।
  • डायबिटीज (शुगर के मरीजों मे): शुगर वाले मरीजों मे मोतियाबिंद तेजी से बनता है और बहुत जल्दी पकता है और सही समय पे डायबिटीज और मोतियाबिंद की देख रेख ना की जाये तो यह सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का कारण बन जाता है।
  • स्टेरॉयड दवा का उपयोग: अगर आप लम्बे समय से (steriod) दवाओं का उपयोग कर रहे है जैसे खाने वाली दवा हो या आई ड्राप हो इसका ज्यादा इस्तेमाल करने से मोतियाबिंद का कारण बनता है और मोतियाबिंद जल्दी पक जाता है।
  • आँखों में चोट या सूजन: अगर आपको कभी आँख में चोट लगी थी या लगी है और लंबे समय से चली आ रही सूजन भी मोतियाबिंद कारण बन सकती है।
  • आनुवांशिक कारण: अगर आपके परिवार में किसी को मोतियाबिंद रहा है तो आपको भी मोतियाबिंद होने का खतरा हो सकता है जबकि कुछ मामलों में मोतियाबिंद माता-पिता से बच्चे में आनुवंशिक रूप से हो सकता है।
  • रेडिएशन एक्सपोजर: सूर्य के प्रकाश मे लंबे समय तक बिना सुरक्षा के रहेना या तेज़ लाइट वाली जगह के संपर्क में रहेना भी मोतियाबिंद का कारण बनता है चाहे UV exposure या रेडिशन थेरेपी हो।

सफ़ेद मोतियाबिंद के लक्षण

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के लक्षण सामान्य मोतियाबिंद से अधिक गंभीर होते हैं और मोतियाबिंद एकदम पक जाता है तो आँख के अंदर का इंट्राऑकुलर प्रेशर (IOP) बढ़ जाता है जिस्से काला मोतियाबिंद जिसे दृष्टि का शांत चोर कहा जाता है और इसके होने का खतरा बढ़ जाता है।

सफ़ेद मोतियाबिंद और काला मोतियाबिंद मे क्या अंतर

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) और काला मोतियाबिंद (Glaucoma) दोनों अलग-अलग बीमारियाँ हैं और इनका एक-दूसरे से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है लेकिन कई लोग नाम से इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं जबकि दोनों के कारण लक्षण जाँच और इलाज पूरी तरह से अलग हैं।
काला मोतियाबिंद (दृष्टि तंत्रिका) को नुकसान पहुँचाती है और अधिकतर मामलों में आँख का दबाव (IOP) बढ़ने से यह होती है और सफ़ेद मोतियाबिंद मे आँख का प्राकृतिक लेंस सफेद और धुंधला हो जाता है।

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract)काला मोतियाबिंद (Glaucoma)
उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद होना फिर सफ़ेद मोतियाबिंद बन जाना जिस्से लेंस सफेद और कठोर हो जाता है और दृष्टि धीरे-धीरे धुंधली होती है और अंत में लगभग शून्य हो जाती है
ऑपरेशन (लेंस बदलना) ही एकमात्र इलाज है।
काला मोतियाबिंद (Glaucoma) मे आँख का प्रेसर (IOP) बढ़ जाता है और दृष्टि धीरे-धीरे किनारों से ख़त्म होती है
उपचार आई ड्रॉप्स या सर्जरी

सफ़ेद मोतियाबिंद की रोकथाम

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का एकमात्र प्रभावी और स्थायी उपचार सर्जरी है यदि यह विकसित हो जाता है सफ़ेद मोतियाबिंद मे तो इसे बिना सर्जरी के पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता जबकि इसकी रोकथाम के उपाय डॉक्टरों और WHO के अनुसार इसके विकास को धीमा करने में सहायक होते हैं लेकिन सफ़ेद मोतियाबिंद को पूरी तरह से रोका तो नहीं जा सकता ​निचे रोकथाम के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय दिए गए हैं:

  • आँखों को UV किरणों से बचाएं धूप मे और बाहर जाते समय ​सनग्लासेस का उपयोग करे और ऐसे सनग्लासेस पहनें जो अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों को ब्लॉक करते हों क्यों की UV किरणें सफ़ेद मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ाती हैं और चका चौध भी महसूस होता है।
  • स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करें अगर आपको शुगर (डायबिटीज) हाई बीपी (रक्तचाप) या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिससे सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का खतरा बढ़ जाता है और आँखों के परदे पर असर पड़ने लगता है इसलिए आपको अगर स्वास्थ्य समस्या है तो उनका उपचार कराएं और उन्हें नियंत्रण में रखें।
  • आँखों की 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से आँखों की जांच कराएं और यह शुरुआती लक्षणों और सफ़ेद मोतियाबिंद होने की आशंका को कम करता है और साथ ही आपको आँखों के व्यायाम करना चाहिए क्यों की यह आँखों को आराम देता है।
  • अगर आप धूम्रपान शराब सिगरेट का सेवन कर रहे है तो उनको धीरे धीरे छोड़ने की कोसिस करें क्यों की धूम्रपान सफ़ेद मोतियाबिंद के विकास के खतरे को बढ़ाता है और आँखों पर उसका बहुत बुरा असर पड़ता है।​
  • स्वस्थ आहार बराबर अपने भोजन में शामिल करें जैसे रंग-बिरंगे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें क्यों की इनमें विटामिन सी विटामिन ई और कैरोटीनॉयड जैसे कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आँखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और सफ़ेद मोतियाबिंद को रोकते है और इसके साथ ही अपने वजन को सामान्य बनाए रखें।

सफ़ेद मोतियाबिंद का निदान

आपका डॉक्टर आपकी आँखों की और सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) की जाँच निम्न तरीके से कर सकता जिसमें शामिल है:

  • विज़ुअल एक्यूटी टेस्ट: आपका डॉक्टर आपकी नज़र की जाँच के लिए (Vision test) करेंगे इससे आपकी आँख के देखने की छमता का पता चलता है लेकिन सफ़ेद मोतियाबिंद मे दृष्टि की क्षमता ना के बराबर होने की वजह से आपको हाथों का मोमेंट कर के जाँच कर सकते है या टॉर्च का जला बुझा पूछ सकते है।
  • स्लिट लैम्प परीक्षा: आपका डॉक्टर आपकी आँखों की बारीकी से जाँच करने के लिए स्लिट लैम्प से आँख के अंदर सफ़ेद मोतियाबिंद और आँखों की संरचना की गैराही से जाँच करेंगे और (Gonioscope) से काला मोतियाबिंद होने ना होने का भी पता करेंगे।
  • आँखों के प्रेशर का मापना: आपका डॉक्टर आपके आँखों के प्रेशर की जाँच करने के लिए (Tonometer) से आँखों के प्रेशर की जाँच करेंगे जो की सामान्य होना बहुत जरुरी होता है और सफ़ेद मोतियाबिंद मे प्रेशर बढ़ सकता है।
  • B-Scan Ultrasonography: सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) मे प्राकृतिक लेंस एकदम सफेद हो जाता है इसकी वजह से आँखों के पीछे के हिस्से (Retina) नहीं दीखता इसलिए रेटीना की स्थिति चेक करने के लिए आपका डॉक्टर बी स्कैन अल्ट्रासानोग्राफी कर सकता है।
  • Keratometry & Biometry: आपका डॉक्टर सर्जरी से पहले आपकी आँखों मे डाले जाने वाला लेंस (IOL) की पावर निकालने के लिए (Keratometry & Biometry) से जाँच करेंगे ताकि प्राकृतिक लेंस जो सफ़ेद मोतियाबिंद बन चूका है उसको निकाल के सही पावर का लेंस डाला जाये।

सफ़ेद मोतियाबिंद का इलाज

मोतियाबिंद के शुरुआती अवस्था में चश्मे या कॉन्टेक्ट लेंस के नंबर बदलकर दृष्टि में सुधार किया जाता है लेकिन जब धुंधलापन बढ़ जाए और चश्मे से भी साफ दिखाई न दे तो सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी विकल्प बचता है फिर इसको कोई भी दवा हो या चश्मा इसे ठीक नहीं कर सकते लेकिन आपको डॉक्टर सर्जरी की सलाह तभी देते है जब दैनिक क्रिया कलाप भी प्रभाबित होने लगते है मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) बन जाये या आपको और भी बीमारी जैसे डायबीटीज या उच्च रक्तचाप है तो इस में देरी नहीं करनी चाहिए और आपको अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।

सफ़ेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन और उसके प्रकार

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) हो जाने पर उसका एकमात्र प्रभावी इलाज सर्जरी ही है जिसमें सर्जरी करके सफ़ेद मोतियाबिंद यानी प्राकृतिक लेंस को निकालकर उसकी जगह एक साफ कृत्रिम लेंस इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL) लगाया जाता है

जबकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान मोतियाबिंद सर्जरी रिस्टोरेटिव से रिफ्रैक्टिव सर्जरी में बदल चुकी है मतलब मोतियाबिंद का ऑपरेशन के बाद चश्मे पर निर्भरता को भी समाप्त करती जा रही है जिस्से ऑपरेशन के बाद पास की चीज दूर की चीज बिना चश्मे के साफ दिखने लगती है और और इस नई तकनीकों द्वारा मोतियाबिंद की सर्जरी में लगाए जाने वाले चीरे का आकार बहोत कम हो गया है जिससे मरीज़ को सर्जरी के बाद बेहतर दृष्टि परिणाम एवं शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और रिकवरी मे समय भी बहुत कम लगता है

सफ़ेद मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए अस्पताल में रूकने की जरूरत नहीं होती आप जागते रहते हैं और एनेसथेसिया देकर आंखों को सुन्न कर दिया जाता है और आपका ऑपरेशन 10-15 मिनट मे हो जाता है और यह लगभग सुरक्षित सर्जरी है और इसकी सफलता दर भी काफी अच्छी है हालांकि फिर भी काफी हद तक पढ़ने या नजर का काम करने के लिए निर्धारित नंबर का चश्मा पहनने की ज़रूरत कुछ मरीजों को हो सकती है और यह एक सामान्य बात है।

फैकोइमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification)

मोतियाबिंद ऑपरेशन के इस प्रकार को माइक्रो-इंसीजन कैटरेक्ट सर्जरी (MICS) और रेग्युलर फैको कैटरेक्ट सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है और यह सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) हो या मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने के लिए ​यह सबसे आम और विश्व स्तर पर गोल्ड स्टैंडर्ड मानी जाने वाली सबसे एडवांस और आधुनिक तकनीक है इसमें एक छोटा चीरा (माइक्रो-इंसीजन) लगाया जाता है एक अल्ट्रासोनिक उपकरण का उपयोग करके सफ़ेद मोतियाबिंद वाले लेंस को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर बाहर निकाल लिया जाता है और फिर उसकी जगह (IOL) इम्प्लांट किया जाता है।​

लेज़र-असिस्टेड कैटरेक्ट सर्जरी (LACS)

इस सर्जरी को फेम्टो लेज़र कैटरेक्ट सर्जरी (FLACS) के नाम से भी जाना जाता है और इसमें सर्जरी के कुछ महत्वपूर्ण कदम जैसे कि चीरा लगाना और लेंस को तोड़ने टुकड़े करने का काम कंप्यूटर-निर्देशित फेम्टोसेकंड लेज़र द्वारा किए जाते हैं और यह प्रक्रिया अधिक सटीकता प्रदान करती है जिसमें अच्छा रिजल्ट मिलता है ऑपरेशन के बाद नज़र भी पूरी वापस आजाती है और परहेज ना के बराबर और रिकवरी भी जल्दी होती है।

एक्स्ट्राकैप्सुलर कैटरेक्ट एक्सट्रैक्शन (ECCE)

पुराने समय मे ​इसको एक पारंपरिक विधि माना जाता था ​इसमें एक बड़ा चीरा लगाया जाता है और सफ़ेद मोतियाबिंद वाले लेंस को एक ही टुकड़े में निकाला जाता है जबकि लेंस का बाहरी खोल (कैप्सूल) का अधिकांश हिस्सा बरकरार रखा जाता है और ज्यादा तर यह उन मामलों में उपयोग होता है जहाँ सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) बहुत कठोर हो या अन्य समस्या और जटिलताएँ हों।

इंट्राकैप्सुलर कैटरेक्ट एक्सट्रैक्शन (ICCE)

यह सबसे पुरानी विधि है जिसमें बहुत परहेज और देखभाल करना पड़ता था और अब इस माध्यम से ऑपरेशन ना के बराबर होता है ​इसमें पूरे लेंस और लेंस कैप्सूल दोनों को एक साथ हटा दिया जाता है और इसमें सबसे बड़ा चीरा लगता है और साथ ही दर्द जलन लाली सब कुछ काफ़ी दिन तक बना रहता था।

सफ़ेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब कराना चाहिए?

यह सवाल पेरेंट्स और सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) से पीड़ित हर व्यक्ति के मन में आता है अक्सर सामान्य मोतियाबिंद में डॉक्टर रुकने की सलाह देते हैं जब तक कि आपकी दृष्टि दैनिक गतिविधियों को प्रभावित न करने लगे लेकिन सफ़ेद मोतियाबिंद के मामले में स्थिति अलग होती है और इसमें तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है यदि आपको सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) है तो सर्जरी में देरी करना खतरनाक हो सकता है जैसे:

  • सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) आँख के प्राकृतिक ड्रेनेज मार्ग को अवरुद्ध कर सकती है जिससे आँख का इंट्राऑकुलर प्रेशर बढ़ जाता है और इस बढ़े हुए दबाव से काला मोतियाबिंद हो सकता है जो दृष्टि तंत्रिका को स्थायी नुकसान पहुँचाता है।
  • मोतियाबिंद जितना अधिक पकता है उतना ही लेंस कठोर हो जाता है और ऑपरेशन में कठिनाई होती है जैसे फैको सर्जरी के दौरान लेंस को तोड़ने में अधिक अल्ट्रासोनिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिससे आँख के अंदर के नाजुक संरचनाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
  • सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के मामले में दृष्टि लगभग शून्य हो जाती है और ऐसे मे जब आपकी कम दृष्टि आपके रोज़मर्रा के महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करने लगे तो सर्जरी अनिवार्य हो जाती है जैसे पढ़ने टीवी देखने या लोगों को पहचानने में अत्यधिक कठिनाई होना और कंप्यूटर वर्क सिलाई सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने या गाड़ी चलाने में खतरा महसूस होना।​
  • यदि आपको मोतियाबिंद है और अन्य स्वास्थ्य स्थितियाँ जैसे डायबिटीज (शुगर) या उच्च रक्तचाप जैसी कोई अंतर्निहित बीमारी भी है तो इस कंडीशन मे डॉक्टर अक्सर मोतियाबिंद को जल्दी हटाने की सलाह देते हैं भले ही वह पूरी तरह से सफ़ेद न हुआ हो।​

सफ़ेद मोतियाबिंद की पहचान होते ही ऑपरेशन करवाना चाहिए यह केवल दृष्टि सुधार नहीं बल्कि आँख को अन्य जटिलताओं से बचाने के लिए भी ज़रूरी है।

सफ़ेद मोतियाबिंद सर्जरी मे लगये जाने वाले IOL (कृत्रिम लेंस) के प्रकार

मोनोफोकल (Monofocal Intraocular Lens)

इसको लगाने का मतलब यह सबसे सामान्य और किफायती विकल्प है जिन्हें साधारण दृष्टि सुधार चाहिए और बजट सीमित है उनके लिए यह बेहतर है और यह लेंस केवल एक निश्चित दूरी जैसे केवल दूर की दृष्टि को साफ दिखाता है लेकिन पास या मोबाइल देखने और पढ़ने के लिए आमतौर पर चश्मे की आवश्यकता रहती है।

मल्टीफोकल (Multifocal Lenses)

यह आज के समय का सबसे एडवांस और आधुनिक लेंस है यह कई दूरियों पर दृष्टि देने के लिए डिज़ाइन किए जाते है जिसमें मरीज़ को ऑपरेशन के बाद दूर पास और मध्य सभी दूरी की दृष्टि साफ हो जाती है जिस्से चश्मे पर निर्भरता काफी कम हो जाती है और यह उनके लिए सबसे बेस्ट है जो रीडिंग कंप्यूटर और ड्राइविंग में बार-बार दूरी बदलते हैं।

टोरिक (Toric Intraocular Lens)

यह उन मरीजों के लिए विशेष रूप से बनाया गया जिन्हें (Cylindrical) नंबर लगता है और उनके लिए यह सबसे उपयुक्त विकल्प है क्यों की यह लेंस दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) को ठीक करता है जिस्से ऑपरेशन के बाद दूर की दृष्टि अधिक स्पष्ट और तेज़ मिलती है।

EDOF (Extended Depth of Focus Lens)

यह लेंस दूर और मध्य दूरी पर बहुत साफ दृष्टि प्रदान करता है और यह आधुनिक काल की नई तकनीक जैसे मोनोफोकल और मल्टीफोकल का बेहतर संयोजन करके के बनाया गया है और यह कंप्यूटर वर्क ड्राइविंग और रोजमर्रा के कामों के लिए बढ़िया विकल्प है क्यों की मल्टीफोकल की तुलना में कम glare और halos देखने को मिलते हैं।

आपके लिए कौन-सा IOL (कृत्रिम लेंस) सबसे अच्छा है?

आपको कौनसा लेंस लगवाना चाहिए या आपके लिए कौनसा सबसे अच्छा है यह आपके रहन सहन और कुछ मुख्य बातों पर निर्भर करता है जैसे आपकी आँख का स्वास्थ्य कैसा है आपका पेशा और लाइफस्टाइल कैसी है या कैसे रहेते है आप और आपके पास कितना बजट है ये सब बाते मायने रखती है और क्या आप ऑपरेशन के बाद चश्मा पहनना चाहते हैं या नहीं इसके लिए आपका नेत्र चिकित्सक आपकी आवश्यकता के अनुसार सर्वोत्तम (IOL) का सुझाव आपको देगा।

सफ़ेद मोतियाबिंद की सर्जरी में कितना खर्च आता है?

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के ऑपरेशन का खर्च भारत में कई कारकों पर निर्भर करता है इसलिए इसकी कोई निश्चित कीमत नहीं होती है यह खर्च ₹8000 से लेकर ₹100000 प्रति आँख या उससे अधिक तक हो सकता है और इसके कुछ मुख्य कारक जो आपके ऑपरेशन के खर्च को प्रभावित करते हैं जैसे:

  • ऑपरेशन की तकनीक: सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का ऑपरेशन का खर्च सबसे अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि मोतियाबिंद को हटाने के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है​ जैसे ECCE यह सबसे कम खर्चीली विधि है लेकिन इसका उपयोग अब बहुत कम होता है फैकोइमल्सिफिकेशन यह सबसे आम और मध्यम खर्चीली तकनीक है जिसकी सफलता दर बहुत अधिक है और FLACS यह सबसे एडवांस और सबसे महँगी तकनीक है क्योंकि इसमें उच्च-सटीकता वाले लेजर उपकरण का उपयोग होता है।
  • आँख में लगाया जाने वाला (IOL) लेंस: ​आपकी आँख में लगाया जाने वाला इंट्राऑक्युलर लेंस खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है और लेंस का प्रकार कार्य और लाभ अलग अलग होते है जैसे मोनोफोकल (IOL) सबसे कम खर्च वाला है और इसमें दूर की दृष्टि साफ हो जाती है लेकिन पास के काम के लिए चश्मा लगाना होता है, टोरिक (IOL) मध्यम से उच्च खर्च वाला लेंस है और ये दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) को ठीक करता है, मल्टीफोकल (IOL) सबसे अधिक खर्च वाला लेंस है और यह सभी विकल्प जैसे दूर मध्य और पास की सभी दूरियों के लिए है और ऑपरेशन के बाद चश्मे लगाने की जरुरत ना के बराबर होती है, EDOF (IOL) उच्च खर्च वाला लेंस है और यह दूरी और मध्य दूरी की दृष्टि में सुधार करता है।
  • अन्य कारक: सफ़ेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन भारत मे सरकारी अस्पताल या चैरिटेबल ट्रस्ट में करवाने पर यह खर्च बहुत कम या मुफ्त हो सकता है जबकि एक निजी और कॉर्पोरेट अस्पताल में यह काफी बढ़ जाता है इसके साथ ही बड़े शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, और अन्य शहर में सर्जरी का खर्च छोटे शहरों की तुलना में अधिक होता है और एक अनुभवी और प्रसिद्ध सर्जन अक्सर अधिक शुल्क लेता है यदि आपके पास स्वास्थ्य बीमा है तो यह खर्च बीमा द्वारा कवर किया जा सकता है इसके अलावा भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना जैसी पहलें पात्र व्यक्तियों के लिए मुफ्त मोतियाबिंद सर्जरी प्रदान करती हैं।

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का ऑपरेशन अगर आप करवा रहे है तो अपने नेत्र चिकित्सक से अपनी जीवनशैली और बजट के अनुसार सबसे उपयुक्त IOL और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट रूप से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा चुने गए पैकेज में ऑपरेशन का खर्च कौन IOL और उसकी कीमत पोस्ट-ऑप दवाइयाँ और फॉलो-अप विजिट शामिल हैं या नहीं।

सफेद मोतियाबिंद सर्जरी के बाद की देखभाल और सावधानियां

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई आई ड्रॉप्स को समय नियम और सही तरीके से डालना चाहिए।
  • भारी चीजें उठाने से बचें और कोई ऐसा काम ना करें जिसकी वजह से बार बार झुकना पड़े।
  • ऑपरेशन के बाद आंख मे पानी सबून सम्पू ना जाये और कॉस्मेटिक चीज लगाने से बचना चाहिए।
  • धूप धूल और धुएं से आंखों को बचाएं डॉक्टर द्वारा दिया गया काला चश्मा पहने।
  • सोते समय आई शील्ड का उपयोग करें अगर आपके डॉक्टर ने दिया है।
  • ऑपरेशन के बाद बिना डॉक्टर की सलाह से ड्राइविंग न करें और तैराकी भी न करें।

ऑपरेशन के बाद तेज़ दर्द होना अचानक दिखना कम होना लाली बढ़ना खुजली होना अगर ऐसी इस्थिति बन रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

सफ़ेद मोतियाबिंद के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल?

सवाल 1.क्या बिना ऑपरेशन के इलाज संभव है?

जवाब: किसी भी दवा या ड्रॉप से मोतियाबिंद ठीक नहीं होता है इसका एकमात्र इलाज केवल ऑपरेशन है।​

सवाल 2.मोतियाबिंद ऑपरेशन में कितना समय लगता है?

जवाब: आधुनिक तकनीक जैसे फैको विधी से ऑपरेशन आमतौर पर केवल 10 से 15 मिनट में पूरा हो जाता है।

सवाल 3.क्या एक ही दिन में दोनों आँखों का ऑपरेशन हो सकता है?

जवाब: सुरक्षा के लिए डॉक्टर आमतौर पर एक आँख का ऑपरेशन करने के बाद कुछ दिनों या एक सप्ताह का अंतराल रखते हैं।

सवाल 4.ऑपरेशन के बाद नज़र कब तक साफ हो जाती है?

जवाब: ज्यादा तर मरीजों को सर्जरी के 24 घंटे से 1 सप्ताह के भीतर काफी हद तक बेहतर दृष्टि महसूस होने लगती है।

निष्कर्ष

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) एक गंभीर लेकिन पूरी तरह इलाज योग्य स्थिति है और इसका सही समय पर निदान और ऑपरेशन आपकी दृष्टि को वापस ला सकता है और काला मोतियाबिंद जैसी गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण दिखते हैं तो हमारी सलाह है कि देरी न करें अपनी आँखों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और तुरंत एक नेत्र चिकित्सक से सलाह लें।

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