मोतियाबिंद (Cataract) क्या है? लक्षण, कारण और उपचार की पूरी जानकारी

मोतियाबिंद:(Cataract) कारण, लक्षण और उपचार netracare.in

मोतियाबिंद जिसे मेडिकल भाषा मे (Cataract) कहा जाता है और मोतियाबिंद उम्र से संबंधित एक आम नेत्र रोग है जिसमें आँख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है और भारत में लगभग 62.6% नेत्रहीनता का कारण मोतियाबिंद ही है और इसके हर साल देश में 20 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं शुक्र है कि आधुनिक सर्जरी तकनीकों ने इसका इलाज बहुत सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है जिससे पिछले कुछ वर्षों में इसके कारण होने वाली नेत्रहीनता में कमी आई है, इस लेख मे हम मोतियाबिंद के हर पहलू कारणों, लक्षणों, प्रकारों से लेकर उपचार के आधुनिक विकल्पों तक की पूरी जानकारी शामिल की गई है।

मोतियाबिंद क्या होता है?

एक साधारण आँख का लेंस सामान्यत पारदर्शी होता है और रेटिना पर प्रकाश केंद्रित करके स्पष्ट छवि बनाने में मदद करता है लेकिन मोतियाबिंद (Cataract) तब होता है जब इस लेंस में मौजूद प्रोटीन गुच्छे बनाने लगते हैं जिससे लेंस धुंधला या अपारदर्शी हो जाता है और इस धुंधलेपन के कारण प्रकाश लेंस से आसानी से गुजर नहीं पाता और रेटिना तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुँच पाता जिसके परिणामस्वरूप दृष्टि धुंधली हो जाती है फिर चाहे आप चस्मा पहने या दवा खाये या डाले कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है लेकिन यह स्थिति आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो अंधेपन का कारण भी बन सकती है।

मोतियाबिंद के प्रमुख कारण

मोतियाबिंद (Cataract) का सबसे आम कारण है उम्र का बढ़ना है उम्र के साथ लेंस में प्राकृतिक बदलाव होते हैं जिस्से मोतियाबिंद विकसित होने लगता है हालांकि इसके कई अन्य कारक भी जोखिम को बढ़ाते हैं जैसे:

  • इसका सबसे प्रमुख कारण उम्र का बढ़ना है
  • अन्य रोग जैसे मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियाँ
  • वर्तमान मे या पिछली आँख की चोट या सर्जरी
  • स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक सेवन
  • UV किरणों के अत्यधिक संपर्क मे रहेना
  • धूम्रपान या शराब का अत्यधिक सेवन
  • परिवार में मोतियाबिंद (Cataract) का इतिहास होना
मोतियाबिंद Cataract

मोतियाबिंद के लक्षण

मोतियाबिंद (Cataract) के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं जैसे:

  • दृष्टि में धुंधलापन और बादलदार या धुएं जैसा दिखाई देना इसका सबसे आम लक्षण है।
  • रात की दृष्टि में कमी और रात में या कम रोशनी में देखने मे चलने फिरने मे और खासकर गाड़ी चलाने में कठिनाई होना।
  • सर मे दर्द होना जो काला मोतियाबिंद का संकेत हो सकता और इसमें टपकन जैसा दर्द होता है और नज़र धीरे धीरे कम होने लगती और कुछ समय सीमा बाद बहुत ज्यादा नज़र कम हो जाती है।
  • चकाचौंध एवं प्रभामंडल जैसे रोशनी के चारों ओर चकाचौंध या तेज रोशनी से आँखें चौंधियाना या प्रभामंडल दिखाई देना।
  • रंगों का फीकापन जैसे रंग पहले जैसे चमकीले न दिखाई देना बल्कि पीले या भूरे रंग के फिल्टर से देखने जैसा अनुभव होना।
  • एक आँख से दोहरी दृष्टि दिखना खासकर एक ही आँख से किसी एक वस्तु के दो प्रतिबिंब दिखाई देना।
  • चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव जैसे निकट दृष्टिदोष में लगातार बढ़ोतरी होना।

मोतियाबिंद के प्रकार

Nuclear Cataract (न्यूक्लियर मोतियाबिंद)

न्यूक्लियर मोतियाबिंद में लेंस का बीच वाला हिस्सा धीरे-धीरे कठोर और धुंधला होने लगता है और यह उम्र बढ़ने के साथ सबसे अधिक देखा जाने वाला और सबसे आम मोतियाबिंद है और इसमें दूर की नजर धीरे-धीरे धुंधली होती जाती है लेकिन कभी-कभी पास की नजर में अस्थायी सुधार होता है जैसे पढ़ने लिखने या बारीक काम करने में कुछ समय के लिए आसानी होती है लेकिन दूर की दृष्टि खराब बनी रहती है।

Cortical Cataract (कॉर्टिकल मोतियाबिंद)

कॉर्टिकल मोतियाबिंद मे लेंस के बाहरी किनारे से सफेद त्रिकोणीय या स्पोक जैसे धब्बे धीरे धीरे बनना सुरु होते है और केंद्र की ओर बढ़ते हैं जिसकी वजह से यह प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बनना और रात में गाड़ी चलाते समय तेज चकाचौंध पैदा होना और अन्य समस्या भी बनती है।

Posterior Subcapsular Cataract (पोस्टीरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद)

पोस्टीरियर सबकैप्सुलर मोतियाबिंद में लेंस के पीछे की सतह पर धुंधलापन बनने लगता है और तेजी से बढ़ता है और इसकी वजह से पढ़ने में दिक्कत चकाचौंध खासकर रात में और उजाले में भी देखने में परेशानी पैदा करता है और यह मधुमेह रोगियों मे और स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग करने वालों में आम है लेकिन यह कम उम्र में भी हो सकता है।

Congenital Cataract (जन्मजात मोतियाबिंद)

बच्चा पैदा होता है तो उसकी आँखों मे मोतियाबिंद होता है इसलिए इसको जन्मजात मोतियाबिंद कहा जाता है जो जन्म के समय मौजूद होता है और यह आनुवंशिक कारणों या गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से हो सकता

Radiation-Induced Cataract (विकिरण-प्रेरित मोतियाबिंद)

यह मोतियाबिंद तब बनता है जब कैंसर उपचार जैसी विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) के बाद धीरे धीरे विकसित होने लगता है जिसकी वजह से नजर अचानक खराब हो जाती है और लेंस में सफेदपन आ जाता है डबल दिखाई देना उसके साथ चकाचौंध और धुंधलापन भी महसूस होता है

मोतियाबिंद (Cataract) की रोकथाम

मोतियाबिंद (Cataract) ज्यादा तर उम्र बढ़ने के साथ होता है और उम्र के साथ मोतियाबिंद बनने का खतरा बढ़ता है लेकिन सही आदतों और खान पान से इसे देरी से आने या तेजी से बढ़ने से रोकना काफी हद तक संभव है

  • आँखों की नियमित जाँच: आपको अपनी आँखों की निमित्त जाँच करवाना चाहिए अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो हर साल आँखों की जाँच कराएँ क्यों की शुरुआती अवस्था में मोतियाबिंद की पहचान होने पर उसको चश्मे दवा और अपनी खुद की देखभाल से उसको काफ़ी हद तक रोक सकते है
  • धूप से आँखों का बचाव: आँखों को सूरज की हानिकारक UV किरणों से बचाने के लिए धूप के चश्मे का उपयोग करना चाहिए और टोपी या कैप का उपयोग भी करें क्यों की UV किरणें लेंस को नुकसान पहुँचाकर मोतियाबिंद को तेज करती हैं
  • स्वास्थ्य प्रबंधन: अगर आपको मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कोई बीमारी है तो उसको कंट्रोल में रखें क्यों की अनियंत्रित शुगर से मोतियाबिंद जल्दी हो सकता है और नियमित ब्लड शुगर जाँच और दवा और परहेज करते रहें
  • धूम्रपान छोड़ना: यदि आप धूम्रपान और शराब का सेवन करते है तो उससे दूरी बनाये और कोसिस करें की छोड़ ही दें क्यों की धूम्रपान मोतियाबिंद का बड़ा कारण है और अधिक शराब का सेवन भी जोखिम को बढ़ाता है
  • संतुलित आहार: विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ अपने रोज के भोजन मे शामिल करें जैसे हरी सब्जियां गाजर पालक और नींबू संतरा आँवला बादाम सूरजमुखी के बीज अलसी अखरोट मछली ये सब आपकी आँखों के सवस्थ के लिए फायदेमंद है और मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण को कम करता है
  • स्टेरॉइड दवाओं चोट और संक्रमण से बचाव: बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉइड आई ड्रॉप या दवाएँ न लें और ना ही लम्बे समय तक बिना डॉक्टर की सलह के उपयोग करें क्यों की इस्से मोतियाबिंद का खतरा और आँख के प्रेसर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है और काम के दौरान प्रोटेक्टिव आई गॉगल्स पहनें और आँखों में चोट लगने या इंफेक्शन होने पर तुरंत अपने नज़दीकी डॉक्टर से सम्पर्क करें

मोतियाबिंद (Cataract) का इलाज

मोतियाबिंद (Cataract) का सही और स्थायी इलाज केवल सर्जरी है और समय पर ऑपरेशन कराने से दृष्टि न केवल साफ होती है बल्कि आँख की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहती है और मोतियाबिंद ऑपरेशन में धुंधले हो चुके प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह उच्च गुणवत्ता वाला कृत्रिम लेंस (IOL) लगाया जाता है जिससे दृष्टि फिर से स्पष्ट हो जाती है और मोतियाबिंद का जितनी जल्दी और सही समय पर ऑपरेशन कराया जाए उतनी ही सुरक्षित और बेहतर दृष्टि सुनिश्चित होती है।

क्या मोतियाबिंद दवा चश्मा और घरेलू उपचार से ठीक हो सकता है

मोतियाबिंद (Cataract) का अस्थाई इलाज ऑपरेशन ही है और इसे घरेलू उपचार दवा या चश्मे से ठीक नहीं किया जा सकता चाहे आप शहद गुलाब जल एलोवेरा त्रिफला आदि का सेवन करें फिर भी मोतियाबिंद को खत्म नहीं कर सकते और कोई भी दवा या आई ड्रॉप मोतियाबिंद को ठीक नहीं कर पाते है और कुछ विटामिन या एंटीऑक्सीडेंट सिर्फ आँखों की सेहत के लिए होते हैं और चश्मा भी सिर्फ शुरुआती अवस्था में थोड़ी देर के लिए देखने में मदद करता है लेकिन चश्मा मोतियाबिंद को ठीक या रोक नहीं सकता।

डॉक्टर के पास कब जाये

अगर आपको अपनी आँखों मे मोतियाबिंद (Cataract) के लक्षण दिखने के साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे जैसे धुंधला दिखने लगे चीज़ें पहले जैसी साफ़ न दिखें बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़े रात में देखने में परेशानी हो तेज़ रोशनी या गाड़ी की लाइट चुभने लगे रंग फीके या पीले नज़र आने लगें पढ़ने-लिखने मोबाइल देखने टीवी देखने या चलने-फिरने में दिक्कत होने लगे तो आपको अपने नज़दीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

और 40 साल की उम्र के बाद भले कोई परेशानी न हो तब भी हर साल आँखों की जाँच ज़रूर करवाएं अगर आपको डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर है या लंबे समय से स्टेरॉइड दवाएँ ले रहें है तो धुंधलापन दिखने पर और अन्य लक्षण दिख रहें है या आँख में चोट लगने के बाद ऐसा हो रहा है तो देर देर ना करें और सबसे ज़रूरी बात अगर बच्चों में आँख की पुतली सफ़ेद दिखे या बच्चा ठीक से न देख पा रहा हो तो बच्चों की आँखों की जाँच और अपने नज़दीकी डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए क्यों की अन्य रोगों की वजह से Cataract विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

मोतियाबिंद का निदान कैसे किया जाता है?

  • Slit Lamp Examination: आपका डॉक्टर आपकी आँखों की और लेंस की धुंधलाहट को माइक्रोस्कोप से देखेगा।
  • Visual Acuity Test: आपका डॉक्टर आपको दूर और पास की दृष्टि की क्षमता देखने के लिए चार्ट पढ़वाकर दृष्टि की क्षमता मापेगा।
  • Retina Examination: आपका डॉक्टर आपकी आँखों मे पुतली फैलाने वाली ड्राप डाल कर रेटिना की जाँच करेगा।
  • Tonometry: आपका डॉक्टर आँख के प्रेशर की जांच करेगा और काला मोतियाबिंद जैसी स्थिति तो नहीं है उसको देखेगा।
  • Dilated Eye Examination: आपका डॉक्टर लेंस की डिग्री और मोतियाबिंद की कठोरता जांचे गा और मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद की स्थिति में पहुँच तो नहीं गया है ये भी देखेगा।
मोतियाबिंद Cataract

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?

मोतियाबिंद (Cataract) का एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज सर्जरी है और यह किसी भी दवा चश्मे या आई ड्रॉप से यह ठीक नहीं होता है लेकिन ज्यादा तर मरीज और उसके फैमली मेंबर्स अक्सर यह पूछते हैं कि ऑपरेशन कब कराना चाहिए दरअसल जैसे ही मोतियाबिंद आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगता है तो आपका डॉक्टर आपको सर्जरी की सलाह दे सकता हैं जैसे:

  • रोजमर्रा के कामों में परेशानी आने लगे
  • पढ़ने लिखने दूर और पास का काम करने मे कठिनाई होना
  • जब दृष्टि अत्यधिक धुंधली हो जाये
  • उजाले या रोशनी से चकाचौंध महेसूस ज्यादा हो
  • रात में गाड़ी चलाना मुश्किल हो
  • मोतियाबिंद (Cataract) सम्बलबाई बन गया हो
  • मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद बन जाये
  • चश्मे का नंबर बार-बार बदलने लगे

मोतियाबिंद ऑपरेशन के प्रकार

Cataract दुनियाभर मे दृष्टिहीनता का एक प्रमुख कारण है और यह एक इलाज योग्य बीमारी है और मोतियाबिंद विकसित हो जाने पर इसका एकमात्र स्थायी और प्रभावी इलाज मोतियाबिंद का ऑपरेशन ही है और आधुनिक तकनीकों जैसे फैकोइमल्सिफिकेशन और उन्नत IOL लेंस के कारण यह सर्जरी अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित है लेकिन मोतियाबिंद ऑपरेशन किस प्रकार से किस तकनीक से करवा रहें है ये जानना बहुत ज़रूरी है

फैकोइमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification Surgery)

यह आज के समय में सबसे ज़्यादा फेमस और उन्नत तकनीक है और दुनिया भर मे मोतियाबिंद का ऑपरेशन इसी तकनीक से सबसे ज्यादा किया जाता है इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों से लेंस को तोड़ा जाता है और छोटे चीरे के साथ लेंस निकाला जाता है उसके बाद ( IOL ) लेंस लगाया जाता है और इसकी रिकवरी बहुत तेज़ होती है और दर्द ना के बराबर होता है और एक ही दिन में छुट्टी मिल जाती है और 24 घंटे के अंदर दिखने भी लगता है

स्मॉल इन्सीजन कैटरैक्ट सर्जरी (SICS)

यह हमारे देश भारत में ग्रामीण और सरकारी अस्पतालों में सबसे आम है इसमें आँखों के निचे और ऊपर इंजेक्शन लगा कर ऑपरेशन किया जाता है और थोड़ा बड़ा चीरा लगा कर लेंस निकला जाता है और इसमें हार्ड लेंस का उपयोग किया जाता है जिस्से दूर की नज़र ठीक हो जाती है लेकिन रिकवरी में समय थोड़ा ज्यादा लगता है और ऑपरेशन के बाद चश्मे की जरूरत ज्यादा होती है

लेज़र मोतियाबिंद ऑपरेशन (Laser Cataract Surgery)

इस तकनीक से मोतियाबिंद का ऑपरेशन ज्यादा कीमत मे होता है मतलब फेकोइमल्सिफिकेशन सर्जरी से काफी अधिक कीमत मे होता है और चुने गए लेंस व अस्पताल के आधार पर काफी बढ़ सकती है और बड़े हॉस्पिटल मे होता है इसमें चीरा और लेंस कट लेज़र से किया जाता है और यह कंप्यूटर-गाइडेड 3डी इमेजिंग पर आधारित होता है और तेज रिकवरी और कम तनाव के कारण दृष्टि में तेजी से सुधार और जल्दी सामान्य गतिविधियों में वापसी हो जाती है

एक्स्ट्रा कैप्सुलर कैटरैक्ट एक्सट्रैक्शन (ECCE)

यह एक पुरानी तकनीक है और आजकल ना के बराबर उपयोग होती है और इसमें इंजेक्शन टांके लगाए जाते हैं और बड़ा चीरा लगा कर लेंस निकला जाता है और लम्बे समय तक दर्द बना रहेता है और रिकवरी भी बहुत धीरी होती है और परहेज भी बहुत करना पड़ता है

सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले लेंस (IOL) के प्रकार

Cataract ऑपरेशन के दौरान लगाया जाने वाला कृत्रिम लेंस (IOL) भी कई प्रकार का होता है और सही लेंस चुनना उतना ही जरूरी है जितना आपको इस संसार को देखना ज़रूरी है।

  • मोनोफोकल लेंस: यह लेंस एक निश्चित दूरी जैसे दूर की दृष्टि साफ कर देता है और पढ़ने के लिए चश्मे की आवश्यकता होती है लेकिन फिर भी यह हमारे देश भारत मे 50% से ज्यादा लोगों को यही लगाया जाता है और इसकी कीमत थोड़ा कम होती है।
  • मल्टीफोकल या ट्राइफोकल लेंस: यह लेंस दूर पास और बीच की दूरी की दृष्टि साफ कर देता और इसमें चश्मे पर निर्भरता ना के बराबर होती है और इसका खर्च थोड़ा ज्यादा आता है लेकिन रिजल्ट बहुत अच्छा देता है।
  • टॉरिक लेंस: यह लेंस खास तौर पर मोतियाबिंद और दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) दोनों का इलाज को ठीक करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है और यह लेंस दूर और पास दोनों की दृष्टि में सुधार करता है।

मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च

मोतियाबिंद (Cataract) का ऑपरेशन हमारे देश भारत मे लगाये जाने वाले लेंस पर और ऑपरेशन किस जगह और कैसे किस तकनीक से करवा रहें है इसके ऊपर डिपेंड रहेता है लेकिन सबसे अच्छी बात यह है की बिलकुल मुफ्त मे भी हो जाता है लेकिन ऑपरेशन मरीज़ की इस्थिति उसकी उम्र क्या काम करता है कैसी जीवन सैली है इन सब बातों पर निर्भर करता है और इसके लिए आपका डॉक्टर आपको अच्छी सलाह दे सकता है.

ऑपरेशन की तकनीकअनुमानित खर्च (₹)अस्पताल का प्रकार
सरकारी योजना जैसे (आयुष्मान कार्ड्स से या आधार कार्ड्स से) Cataract का ऑपरेशन होता है और ये ऑपरेशन SICS के तरीके से किये जाते हैआयुष्मान कार्ड्स से होने वाला ऑपरेशन केवल आपको पंजीकरण के लिए 2-3 सौ रुपया देना होता है बाकि सब कुछ फ्री मे जबकि आधारकार्ड से कुछ जगह और कुछ लोग मुफ्त या ₹2,000 चार्ज लेते हैं आयुष्मान कार्ड्स से केवल ऑपरेशन वहा होता हैं जहाँ अस्पताल आयुष्मान सुविधा देते हैं सरकारी भी हो सकते हैं aur प्राइवेट भी लेकिन आधार कार्ड्स से केवल सरकारी अस्पताल मे ही सुविधा होती हैं
Laser (MICS/Femto) अगर आप इस विधी से cataract का ऑपरेशन करवा रहें हैं जो आज के समय की सबसे एडवांस तकनीक है ₹45,000 – ₹1,00,000मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल मे केवल ये सुविधा मिलती है जैसे बड़े शहर के बड़े हॉस्पिटल मे होता है
फैकोइमल्सिफिकेशन के तरीके से अगर आप ऑपरेशन करवा रहें जिसमें बिना चीरा पट्टी और इंजेक्शन लगे जो होता हैं ₹15,000 – ₹35,000प्राइवेट आई हॉस्पिटल मे ही केवल होता हैं

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद देखभाल और परहेज

  • Cataract ऑपरेशन के बाद सही देखभाल और परहेज न किया जाए तो आँखों में इंफेक्शन सूजन या देखने में समस्या हो सकती है इसलिए कुछ समय सीमा के लिए आपको कुछ चीज़ों का परहेज और देखभाल करना पड़ता है क्यों की मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद हल्की गड़न चुभन हो सकती है और सर्जरी के बाद आंख कुछ समय तक संवेदनशील बनी रहती है और ऐसे मे आपका परहेज आपकी आँखों मे इंफेक्शन का खतरा कम करता है सूजन और दर्द से बचाव होता है दृष्टि जल्दी साफ होती है ऑपरेशन का परिणाम बेहतर रहता है
  • मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आपको डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर उपयोग करें और कम से कम 4-5 दिन अच्छे से आराम करें और आंख को साफ और सुरक्षित रखें और डॉक्टर द्वारा दिया गया काला चश्मा इस्तेमाल करें और बच्चों और खेलकूद से थोड़ा दूरी बना के रखें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें और खान पियन हल्का ही करें जैसे हरी सब्जियां फल और विटामिन युक्त हो और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सामान्य समस्या

मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन के बाद कुछ सामान्य लक्षण दिख सकते है और इस्से घबराने की ज़रूरत नहीं है जैसे ऑपरेशन के बाद हल्की जलन या चुभन होना और थोड़ा पानी आना हल्का दर्द 1–2 दिन तक हो सकता है और धीरे-धीरे नजर साफ होना और आँख से कीचड़ आना ये सब सामान्य समस्या है लेकिन कोई चिंता या घबराने की बात नहीं है

ऑपरेशन के बाद इमरजेंसी में डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए

मोतियाबिंद (Cataract) ऑपरेशन के बाद 4-5 दिन सबसे संवेदनशील होते हैं और ऐसे मे कोई समस्या पैदा हो रही है और दवा डाल लेने से ठीक हो जाएगा ये सोचकर देर न करें अगर कोई गंभीर लक्षण दिखे या शक होने पर आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जैसे

  • अचानक तेज़ दर्द होने लगे क्यों की असहनीय दर्द खतरनाक हो सकता है
  • अचानक धुंधलापन या काला दिखने लगे और नज़र एकदम कम हो जाए
  • आँख में बहुत ज़्यादा लालि या सूजन हो क्यों की पलकों की सूजन इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है
  • आँख से पीला कीचड़ ज्यादा आने लगे क्यों की बदबूदार स्राव गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है
  • तेज़ रोशनी से बहुत दर्द या चुभन हो क्यों की यह आँख के अंदर सूजन या इन्फेक्शन की वजह से हो सकता है
  • मतली उल्टी या सिरदर्द के साथ आँख में दर्द हो तो यह आँख का प्रेशर बढ़ने का लक्षण हो सकता है
  • आँख पर चोट लगना या ज़ोर से रगड़ लग जाना भले ही दर्द कम हो फिर भी तुरंत दिखाना ज़रूरी है
  • अचानक बहुत ज़्यादा आँसू आना और आँख खुलने में दिक्कत होने लगे तो यह कॉर्निया की समस्या या इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है

निष्कर्ष:

मोतियाबिंद (Cataract) आज के समय 70% से अधिक लोगों मे पाया जाने वाला एक सामान्य नेत्ररोग है जो उम्र के साथ होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सही समय पर इसकी पहचान और इलाज से आप काफ़ी लम्बे समय तक बच सकते है और अपनी आँखों की रोशनी को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन अगर मोतियाबिंद विकसित हो जाता है तो फिर उसका एकमात्र इलाज केवल ऑपरेशन है लेकिन आज की आधुनिक तकनीक ने इस ऑपरेशन को बहुत आसान और दर्द रहित बना दिया है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी धुंधला दिखाई देने की समस्या हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें क्यों की मोतियाबिंद (Cataract) बुजुर्ग लोगों मे ज्यादा होने का खतरा बना रहेता है। याद रखें, स्पष्ट दृष्टि ही बेहतर जीवन की कुंजी है।

सफ़ेद मोतियाबिंद: कारण, लक्षण, प्रकार, निदान, सर्जरी के 4 आधुनिक प्रकार, रिकवरी, बचाव, और महत्वपूर्ण गाइड

सफ़ेद मोतियाबिंद

मोतियाबिंद जिसे मेडिकल भाषा मे (Cataract) कहा जाता है और यह दुनिया भर में होने वाले सबसे आम नेत्र रोगों में से एक है और यह आंखों की एक सामान्य समस्या है जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है लेकिन जब मोतियाबिंद पूरी तरह पक जाता है और लेंस पूरी तरह सफेद दिखाई देने लगता है तब इसे सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) कहा जाता है और यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें मरीज की नजर लगभग ना के बराबर हो जाती है जैसे सफ़ेद मोतियाबिंद वाली आँख से अस्पस्ट नहीं दिखना जिस्से रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।

इस ब्लॉग में हम सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के बारे में विस्तार से जानेंगे इसके कारण क्या है इसके लक्षण और मोतियाबिंद कितने प्रकार का होता है इसका निदान सर्जरी खर्च रिकवरी बचाव और भी बहुत कुछ (White Cataract) के बारे मे जानेंगे।

सफ़ेद मोतियाबिंद क्या है?

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) एक प्रकार का (Mature) या (Hypermature) मोतियाबिंद है और यह स्थिति तब बनती है जब मोतियाबिंद को लंबे समय तक बिना उपचार के छोड़ दिया जाता है जिसकी वजह से मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) बन जाता है जबकि सफ़ेद मोतियाबिंद मे लेंस इतना पक जाता है कि आंख में सफेद और चमकता हुआ दिखाई देने लगता है और आँखों से देखने वाला प्राकृतिक लेंस पूरी तरह से सफेद अपारदर्शी और कठोर बन जाता है और यह स्थिति दृष्टि को लगभग शून्य कर देती है और तुरंत सर्जरी की जरूरत होती है जबकि सामान्य मोतियाबिंद में लेंस धीरे-धीरे धुंधला होता है।

सफ़ेद मोतियाबिंद के कारण

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के कारण वही हैं जो साधारण मोतियाबिंद के होते हैं और मोतियाबिंद को लंबे समय तक बिना उपचार के और अनदेखा कर देने पर यह स्थिति बनती है:

  • उम्र बढ़ना: उम्र बढ़ने के साथ अधिकांश लोगों में मोतियाबिंद का खतरा बढ़ता है और 55 से 60 वर्ष के बाद मोतियाबिंद का होना एक सामान्य समस्या है जो उम्र बढ़ने के साथ होती है।
  • लंबे समय तक अनदेखा करना: मोतियाबिंद होने पर ज्यादा तर लोग मोतियाबिंद को वर्षों तक अनदेखा कर देते है और यही सबसे बड़ा कारण सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का बनता है और यह स्थिति दृष्टि को लगभग शून्य कर देती है।
  • डायबिटीज (शुगर के मरीजों मे): शुगर वाले मरीजों मे मोतियाबिंद तेजी से बनता है और बहुत जल्दी पकता है और सही समय पे डायबिटीज और मोतियाबिंद की देख रेख ना की जाये तो यह सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का कारण बन जाता है।
  • स्टेरॉयड दवा का उपयोग: अगर आप लम्बे समय से (steriod) दवाओं का उपयोग कर रहे है जैसे खाने वाली दवा हो या आई ड्राप हो इसका ज्यादा इस्तेमाल करने से मोतियाबिंद का कारण बनता है और मोतियाबिंद जल्दी पक जाता है।
  • आँखों में चोट या सूजन: अगर आपको कभी आँख में चोट लगी थी या लगी है और लंबे समय से चली आ रही सूजन भी मोतियाबिंद कारण बन सकती है।
  • आनुवांशिक कारण: अगर आपके परिवार में किसी को मोतियाबिंद रहा है तो आपको भी मोतियाबिंद होने का खतरा हो सकता है जबकि कुछ मामलों में मोतियाबिंद माता-पिता से बच्चे में आनुवंशिक रूप से हो सकता है।
  • रेडिएशन एक्सपोजर: सूर्य के प्रकाश मे लंबे समय तक बिना सुरक्षा के रहेना या तेज़ लाइट वाली जगह के संपर्क में रहेना भी मोतियाबिंद का कारण बनता है चाहे UV exposure या रेडिशन थेरेपी हो।

सफ़ेद मोतियाबिंद के लक्षण

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के लक्षण सामान्य मोतियाबिंद से अधिक गंभीर होते हैं और मोतियाबिंद एकदम पक जाता है तो आँख के अंदर का इंट्राऑकुलर प्रेशर (IOP) बढ़ जाता है जिस्से काला मोतियाबिंद जिसे दृष्टि का शांत चोर कहा जाता है और इसके होने का खतरा बढ़ जाता है।

सफ़ेद मोतियाबिंद और काला मोतियाबिंद मे क्या अंतर

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) और काला मोतियाबिंद (Glaucoma) दोनों अलग-अलग बीमारियाँ हैं और इनका एक-दूसरे से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है लेकिन कई लोग नाम से इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं जबकि दोनों के कारण लक्षण जाँच और इलाज पूरी तरह से अलग हैं।
काला मोतियाबिंद (दृष्टि तंत्रिका) को नुकसान पहुँचाती है और अधिकतर मामलों में आँख का दबाव (IOP) बढ़ने से यह होती है और सफ़ेद मोतियाबिंद मे आँख का प्राकृतिक लेंस सफेद और धुंधला हो जाता है।

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract)काला मोतियाबिंद (Glaucoma)
उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद होना फिर सफ़ेद मोतियाबिंद बन जाना जिस्से लेंस सफेद और कठोर हो जाता है और दृष्टि धीरे-धीरे धुंधली होती है और अंत में लगभग शून्य हो जाती है
ऑपरेशन (लेंस बदलना) ही एकमात्र इलाज है।
काला मोतियाबिंद (Glaucoma) मे आँख का प्रेसर (IOP) बढ़ जाता है और दृष्टि धीरे-धीरे किनारों से ख़त्म होती है
उपचार आई ड्रॉप्स या सर्जरी

सफ़ेद मोतियाबिंद की रोकथाम

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का एकमात्र प्रभावी और स्थायी उपचार सर्जरी है यदि यह विकसित हो जाता है सफ़ेद मोतियाबिंद मे तो इसे बिना सर्जरी के पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता जबकि इसकी रोकथाम के उपाय डॉक्टरों और WHO के अनुसार इसके विकास को धीमा करने में सहायक होते हैं लेकिन सफ़ेद मोतियाबिंद को पूरी तरह से रोका तो नहीं जा सकता ​निचे रोकथाम के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय दिए गए हैं:

  • आँखों को UV किरणों से बचाएं धूप मे और बाहर जाते समय ​सनग्लासेस का उपयोग करे और ऐसे सनग्लासेस पहनें जो अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों को ब्लॉक करते हों क्यों की UV किरणें सफ़ेद मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ाती हैं और चका चौध भी महसूस होता है।
  • स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करें अगर आपको शुगर (डायबिटीज) हाई बीपी (रक्तचाप) या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिससे सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का खतरा बढ़ जाता है और आँखों के परदे पर असर पड़ने लगता है इसलिए आपको अगर स्वास्थ्य समस्या है तो उनका उपचार कराएं और उन्हें नियंत्रण में रखें।
  • आँखों की 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से आँखों की जांच कराएं और यह शुरुआती लक्षणों और सफ़ेद मोतियाबिंद होने की आशंका को कम करता है और साथ ही आपको आँखों के व्यायाम करना चाहिए क्यों की यह आँखों को आराम देता है।
  • अगर आप धूम्रपान शराब सिगरेट का सेवन कर रहे है तो उनको धीरे धीरे छोड़ने की कोसिस करें क्यों की धूम्रपान सफ़ेद मोतियाबिंद के विकास के खतरे को बढ़ाता है और आँखों पर उसका बहुत बुरा असर पड़ता है।​
  • स्वस्थ आहार बराबर अपने भोजन में शामिल करें जैसे रंग-बिरंगे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें क्यों की इनमें विटामिन सी विटामिन ई और कैरोटीनॉयड जैसे कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आँखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और सफ़ेद मोतियाबिंद को रोकते है और इसके साथ ही अपने वजन को सामान्य बनाए रखें।

सफ़ेद मोतियाबिंद का निदान

आपका डॉक्टर आपकी आँखों की और सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) की जाँच निम्न तरीके से कर सकता जिसमें शामिल है:

  • विज़ुअल एक्यूटी टेस्ट: आपका डॉक्टर आपकी नज़र की जाँच के लिए (Vision test) करेंगे इससे आपकी आँख के देखने की छमता का पता चलता है लेकिन सफ़ेद मोतियाबिंद मे दृष्टि की क्षमता ना के बराबर होने की वजह से आपको हाथों का मोमेंट कर के जाँच कर सकते है या टॉर्च का जला बुझा पूछ सकते है।
  • स्लिट लैम्प परीक्षा: आपका डॉक्टर आपकी आँखों की बारीकी से जाँच करने के लिए स्लिट लैम्प से आँख के अंदर सफ़ेद मोतियाबिंद और आँखों की संरचना की गैराही से जाँच करेंगे और (Gonioscope) से काला मोतियाबिंद होने ना होने का भी पता करेंगे।
  • आँखों के प्रेशर का मापना: आपका डॉक्टर आपके आँखों के प्रेशर की जाँच करने के लिए (Tonometer) से आँखों के प्रेशर की जाँच करेंगे जो की सामान्य होना बहुत जरुरी होता है और सफ़ेद मोतियाबिंद मे प्रेशर बढ़ सकता है।
  • B-Scan Ultrasonography: सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) मे प्राकृतिक लेंस एकदम सफेद हो जाता है इसकी वजह से आँखों के पीछे के हिस्से (Retina) नहीं दीखता इसलिए रेटीना की स्थिति चेक करने के लिए आपका डॉक्टर बी स्कैन अल्ट्रासानोग्राफी कर सकता है।
  • Keratometry & Biometry: आपका डॉक्टर सर्जरी से पहले आपकी आँखों मे डाले जाने वाला लेंस (IOL) की पावर निकालने के लिए (Keratometry & Biometry) से जाँच करेंगे ताकि प्राकृतिक लेंस जो सफ़ेद मोतियाबिंद बन चूका है उसको निकाल के सही पावर का लेंस डाला जाये।

सफ़ेद मोतियाबिंद का इलाज

मोतियाबिंद के शुरुआती अवस्था में चश्मे या कॉन्टेक्ट लेंस के नंबर बदलकर दृष्टि में सुधार किया जाता है लेकिन जब धुंधलापन बढ़ जाए और चश्मे से भी साफ दिखाई न दे तो सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी विकल्प बचता है फिर इसको कोई भी दवा हो या चश्मा इसे ठीक नहीं कर सकते लेकिन आपको डॉक्टर सर्जरी की सलाह तभी देते है जब दैनिक क्रिया कलाप भी प्रभाबित होने लगते है मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) बन जाये या आपको और भी बीमारी जैसे डायबीटीज या उच्च रक्तचाप है तो इस में देरी नहीं करनी चाहिए और आपको अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।

सफ़ेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन और उसके प्रकार

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) हो जाने पर उसका एकमात्र प्रभावी इलाज सर्जरी ही है जिसमें सर्जरी करके सफ़ेद मोतियाबिंद यानी प्राकृतिक लेंस को निकालकर उसकी जगह एक साफ कृत्रिम लेंस इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL) लगाया जाता है

जबकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान मोतियाबिंद सर्जरी रिस्टोरेटिव से रिफ्रैक्टिव सर्जरी में बदल चुकी है मतलब मोतियाबिंद का ऑपरेशन के बाद चश्मे पर निर्भरता को भी समाप्त करती जा रही है जिस्से ऑपरेशन के बाद पास की चीज दूर की चीज बिना चश्मे के साफ दिखने लगती है और और इस नई तकनीकों द्वारा मोतियाबिंद की सर्जरी में लगाए जाने वाले चीरे का आकार बहोत कम हो गया है जिससे मरीज़ को सर्जरी के बाद बेहतर दृष्टि परिणाम एवं शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और रिकवरी मे समय भी बहुत कम लगता है

सफ़ेद मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए अस्पताल में रूकने की जरूरत नहीं होती आप जागते रहते हैं और एनेसथेसिया देकर आंखों को सुन्न कर दिया जाता है और आपका ऑपरेशन 10-15 मिनट मे हो जाता है और यह लगभग सुरक्षित सर्जरी है और इसकी सफलता दर भी काफी अच्छी है हालांकि फिर भी काफी हद तक पढ़ने या नजर का काम करने के लिए निर्धारित नंबर का चश्मा पहनने की ज़रूरत कुछ मरीजों को हो सकती है और यह एक सामान्य बात है।

फैकोइमल्सिफिकेशन (Phacoemulsification)

मोतियाबिंद ऑपरेशन के इस प्रकार को माइक्रो-इंसीजन कैटरेक्ट सर्जरी (MICS) और रेग्युलर फैको कैटरेक्ट सर्जरी के नाम से भी जाना जाता है और यह सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) हो या मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने के लिए ​यह सबसे आम और विश्व स्तर पर गोल्ड स्टैंडर्ड मानी जाने वाली सबसे एडवांस और आधुनिक तकनीक है इसमें एक छोटा चीरा (माइक्रो-इंसीजन) लगाया जाता है एक अल्ट्रासोनिक उपकरण का उपयोग करके सफ़ेद मोतियाबिंद वाले लेंस को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर बाहर निकाल लिया जाता है और फिर उसकी जगह (IOL) इम्प्लांट किया जाता है।​

लेज़र-असिस्टेड कैटरेक्ट सर्जरी (LACS)

इस सर्जरी को फेम्टो लेज़र कैटरेक्ट सर्जरी (FLACS) के नाम से भी जाना जाता है और इसमें सर्जरी के कुछ महत्वपूर्ण कदम जैसे कि चीरा लगाना और लेंस को तोड़ने टुकड़े करने का काम कंप्यूटर-निर्देशित फेम्टोसेकंड लेज़र द्वारा किए जाते हैं और यह प्रक्रिया अधिक सटीकता प्रदान करती है जिसमें अच्छा रिजल्ट मिलता है ऑपरेशन के बाद नज़र भी पूरी वापस आजाती है और परहेज ना के बराबर और रिकवरी भी जल्दी होती है।

एक्स्ट्राकैप्सुलर कैटरेक्ट एक्सट्रैक्शन (ECCE)

पुराने समय मे ​इसको एक पारंपरिक विधि माना जाता था ​इसमें एक बड़ा चीरा लगाया जाता है और सफ़ेद मोतियाबिंद वाले लेंस को एक ही टुकड़े में निकाला जाता है जबकि लेंस का बाहरी खोल (कैप्सूल) का अधिकांश हिस्सा बरकरार रखा जाता है और ज्यादा तर यह उन मामलों में उपयोग होता है जहाँ सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) बहुत कठोर हो या अन्य समस्या और जटिलताएँ हों।

इंट्राकैप्सुलर कैटरेक्ट एक्सट्रैक्शन (ICCE)

यह सबसे पुरानी विधि है जिसमें बहुत परहेज और देखभाल करना पड़ता था और अब इस माध्यम से ऑपरेशन ना के बराबर होता है ​इसमें पूरे लेंस और लेंस कैप्सूल दोनों को एक साथ हटा दिया जाता है और इसमें सबसे बड़ा चीरा लगता है और साथ ही दर्द जलन लाली सब कुछ काफ़ी दिन तक बना रहता था।

सफ़ेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब कराना चाहिए?

यह सवाल पेरेंट्स और सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) से पीड़ित हर व्यक्ति के मन में आता है अक्सर सामान्य मोतियाबिंद में डॉक्टर रुकने की सलाह देते हैं जब तक कि आपकी दृष्टि दैनिक गतिविधियों को प्रभावित न करने लगे लेकिन सफ़ेद मोतियाबिंद के मामले में स्थिति अलग होती है और इसमें तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है यदि आपको सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) है तो सर्जरी में देरी करना खतरनाक हो सकता है जैसे:

  • सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) आँख के प्राकृतिक ड्रेनेज मार्ग को अवरुद्ध कर सकती है जिससे आँख का इंट्राऑकुलर प्रेशर बढ़ जाता है और इस बढ़े हुए दबाव से काला मोतियाबिंद हो सकता है जो दृष्टि तंत्रिका को स्थायी नुकसान पहुँचाता है।
  • मोतियाबिंद जितना अधिक पकता है उतना ही लेंस कठोर हो जाता है और ऑपरेशन में कठिनाई होती है जैसे फैको सर्जरी के दौरान लेंस को तोड़ने में अधिक अल्ट्रासोनिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिससे आँख के अंदर के नाजुक संरचनाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
  • सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के मामले में दृष्टि लगभग शून्य हो जाती है और ऐसे मे जब आपकी कम दृष्टि आपके रोज़मर्रा के महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करने लगे तो सर्जरी अनिवार्य हो जाती है जैसे पढ़ने टीवी देखने या लोगों को पहचानने में अत्यधिक कठिनाई होना और कंप्यूटर वर्क सिलाई सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने या गाड़ी चलाने में खतरा महसूस होना।​
  • यदि आपको मोतियाबिंद है और अन्य स्वास्थ्य स्थितियाँ जैसे डायबिटीज (शुगर) या उच्च रक्तचाप जैसी कोई अंतर्निहित बीमारी भी है तो इस कंडीशन मे डॉक्टर अक्सर मोतियाबिंद को जल्दी हटाने की सलाह देते हैं भले ही वह पूरी तरह से सफ़ेद न हुआ हो।​

सफ़ेद मोतियाबिंद की पहचान होते ही ऑपरेशन करवाना चाहिए यह केवल दृष्टि सुधार नहीं बल्कि आँख को अन्य जटिलताओं से बचाने के लिए भी ज़रूरी है।

सफ़ेद मोतियाबिंद सर्जरी मे लगये जाने वाले IOL (कृत्रिम लेंस) के प्रकार

मोनोफोकल (Monofocal Intraocular Lens)

इसको लगाने का मतलब यह सबसे सामान्य और किफायती विकल्प है जिन्हें साधारण दृष्टि सुधार चाहिए और बजट सीमित है उनके लिए यह बेहतर है और यह लेंस केवल एक निश्चित दूरी जैसे केवल दूर की दृष्टि को साफ दिखाता है लेकिन पास या मोबाइल देखने और पढ़ने के लिए आमतौर पर चश्मे की आवश्यकता रहती है।

मल्टीफोकल (Multifocal Lenses)

यह आज के समय का सबसे एडवांस और आधुनिक लेंस है यह कई दूरियों पर दृष्टि देने के लिए डिज़ाइन किए जाते है जिसमें मरीज़ को ऑपरेशन के बाद दूर पास और मध्य सभी दूरी की दृष्टि साफ हो जाती है जिस्से चश्मे पर निर्भरता काफी कम हो जाती है और यह उनके लिए सबसे बेस्ट है जो रीडिंग कंप्यूटर और ड्राइविंग में बार-बार दूरी बदलते हैं।

टोरिक (Toric Intraocular Lens)

यह उन मरीजों के लिए विशेष रूप से बनाया गया जिन्हें (Cylindrical) नंबर लगता है और उनके लिए यह सबसे उपयुक्त विकल्प है क्यों की यह लेंस दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) को ठीक करता है जिस्से ऑपरेशन के बाद दूर की दृष्टि अधिक स्पष्ट और तेज़ मिलती है।

EDOF (Extended Depth of Focus Lens)

यह लेंस दूर और मध्य दूरी पर बहुत साफ दृष्टि प्रदान करता है और यह आधुनिक काल की नई तकनीक जैसे मोनोफोकल और मल्टीफोकल का बेहतर संयोजन करके के बनाया गया है और यह कंप्यूटर वर्क ड्राइविंग और रोजमर्रा के कामों के लिए बढ़िया विकल्प है क्यों की मल्टीफोकल की तुलना में कम glare और halos देखने को मिलते हैं।

आपके लिए कौन-सा IOL (कृत्रिम लेंस) सबसे अच्छा है?

आपको कौनसा लेंस लगवाना चाहिए या आपके लिए कौनसा सबसे अच्छा है यह आपके रहन सहन और कुछ मुख्य बातों पर निर्भर करता है जैसे आपकी आँख का स्वास्थ्य कैसा है आपका पेशा और लाइफस्टाइल कैसी है या कैसे रहेते है आप और आपके पास कितना बजट है ये सब बाते मायने रखती है और क्या आप ऑपरेशन के बाद चश्मा पहनना चाहते हैं या नहीं इसके लिए आपका नेत्र चिकित्सक आपकी आवश्यकता के अनुसार सर्वोत्तम (IOL) का सुझाव आपको देगा।

सफ़ेद मोतियाबिंद की सर्जरी में कितना खर्च आता है?

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) के ऑपरेशन का खर्च भारत में कई कारकों पर निर्भर करता है इसलिए इसकी कोई निश्चित कीमत नहीं होती है यह खर्च ₹8000 से लेकर ₹100000 प्रति आँख या उससे अधिक तक हो सकता है और इसके कुछ मुख्य कारक जो आपके ऑपरेशन के खर्च को प्रभावित करते हैं जैसे:

  • ऑपरेशन की तकनीक: सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का ऑपरेशन का खर्च सबसे अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि मोतियाबिंद को हटाने के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है​ जैसे ECCE यह सबसे कम खर्चीली विधि है लेकिन इसका उपयोग अब बहुत कम होता है फैकोइमल्सिफिकेशन यह सबसे आम और मध्यम खर्चीली तकनीक है जिसकी सफलता दर बहुत अधिक है और FLACS यह सबसे एडवांस और सबसे महँगी तकनीक है क्योंकि इसमें उच्च-सटीकता वाले लेजर उपकरण का उपयोग होता है।
  • आँख में लगाया जाने वाला (IOL) लेंस: ​आपकी आँख में लगाया जाने वाला इंट्राऑक्युलर लेंस खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है और लेंस का प्रकार कार्य और लाभ अलग अलग होते है जैसे मोनोफोकल (IOL) सबसे कम खर्च वाला है और इसमें दूर की दृष्टि साफ हो जाती है लेकिन पास के काम के लिए चश्मा लगाना होता है, टोरिक (IOL) मध्यम से उच्च खर्च वाला लेंस है और ये दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) को ठीक करता है, मल्टीफोकल (IOL) सबसे अधिक खर्च वाला लेंस है और यह सभी विकल्प जैसे दूर मध्य और पास की सभी दूरियों के लिए है और ऑपरेशन के बाद चश्मे लगाने की जरुरत ना के बराबर होती है, EDOF (IOL) उच्च खर्च वाला लेंस है और यह दूरी और मध्य दूरी की दृष्टि में सुधार करता है।
  • अन्य कारक: सफ़ेद मोतियाबिंद का ऑपरेशन भारत मे सरकारी अस्पताल या चैरिटेबल ट्रस्ट में करवाने पर यह खर्च बहुत कम या मुफ्त हो सकता है जबकि एक निजी और कॉर्पोरेट अस्पताल में यह काफी बढ़ जाता है इसके साथ ही बड़े शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, और अन्य शहर में सर्जरी का खर्च छोटे शहरों की तुलना में अधिक होता है और एक अनुभवी और प्रसिद्ध सर्जन अक्सर अधिक शुल्क लेता है यदि आपके पास स्वास्थ्य बीमा है तो यह खर्च बीमा द्वारा कवर किया जा सकता है इसके अलावा भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना जैसी पहलें पात्र व्यक्तियों के लिए मुफ्त मोतियाबिंद सर्जरी प्रदान करती हैं।

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) का ऑपरेशन अगर आप करवा रहे है तो अपने नेत्र चिकित्सक से अपनी जीवनशैली और बजट के अनुसार सबसे उपयुक्त IOL और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट रूप से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा चुने गए पैकेज में ऑपरेशन का खर्च कौन IOL और उसकी कीमत पोस्ट-ऑप दवाइयाँ और फॉलो-अप विजिट शामिल हैं या नहीं।

सफेद मोतियाबिंद सर्जरी के बाद की देखभाल और सावधानियां

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई आई ड्रॉप्स को समय नियम और सही तरीके से डालना चाहिए।
  • भारी चीजें उठाने से बचें और कोई ऐसा काम ना करें जिसकी वजह से बार बार झुकना पड़े।
  • ऑपरेशन के बाद आंख मे पानी सबून सम्पू ना जाये और कॉस्मेटिक चीज लगाने से बचना चाहिए।
  • धूप धूल और धुएं से आंखों को बचाएं डॉक्टर द्वारा दिया गया काला चश्मा पहने।
  • सोते समय आई शील्ड का उपयोग करें अगर आपके डॉक्टर ने दिया है।
  • ऑपरेशन के बाद बिना डॉक्टर की सलाह से ड्राइविंग न करें और तैराकी भी न करें।

ऑपरेशन के बाद तेज़ दर्द होना अचानक दिखना कम होना लाली बढ़ना खुजली होना अगर ऐसी इस्थिति बन रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

सफ़ेद मोतियाबिंद के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल?

सवाल 1.क्या बिना ऑपरेशन के इलाज संभव है?

जवाब: किसी भी दवा या ड्रॉप से मोतियाबिंद ठीक नहीं होता है इसका एकमात्र इलाज केवल ऑपरेशन है।​

सवाल 2.मोतियाबिंद ऑपरेशन में कितना समय लगता है?

जवाब: आधुनिक तकनीक जैसे फैको विधी से ऑपरेशन आमतौर पर केवल 10 से 15 मिनट में पूरा हो जाता है।

सवाल 3.क्या एक ही दिन में दोनों आँखों का ऑपरेशन हो सकता है?

जवाब: सुरक्षा के लिए डॉक्टर आमतौर पर एक आँख का ऑपरेशन करने के बाद कुछ दिनों या एक सप्ताह का अंतराल रखते हैं।

सवाल 4.ऑपरेशन के बाद नज़र कब तक साफ हो जाती है?

जवाब: ज्यादा तर मरीजों को सर्जरी के 24 घंटे से 1 सप्ताह के भीतर काफी हद तक बेहतर दृष्टि महसूस होने लगती है।

निष्कर्ष

सफ़ेद मोतियाबिंद (White Cataract) एक गंभीर लेकिन पूरी तरह इलाज योग्य स्थिति है और इसका सही समय पर निदान और ऑपरेशन आपकी दृष्टि को वापस ला सकता है और काला मोतियाबिंद जैसी गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण दिखते हैं तो हमारी सलाह है कि देरी न करें अपनी आँखों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और तुरंत एक नेत्र चिकित्सक से सलाह लें।

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