चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी क्या है कैसे होती है सर्जरी के प्रकार Age Requirement खर्च फायदे नोकसान (Complate Guide 2026)

LASIK Surgery

आज के समय चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो चश्मे के वजन, खेल-कूद में होने वाली परेशानी या कॉन्टैक्ट लेंस के रख रखाव से थक चुके हैं, और चश्मा नही इस्तेमाल करना चाहते है, और उसके लिए एक स्थायी समाधान चाहते हैं, ऐसे में उनके लिए चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, जो इसी समाधान के रूप में लेसिक LASIK सर्जरी ने पिछले कुछ वर्षों में काफ़ी लोकप्रियता भी हासिल की है।

लेकिन क्यों यह हर किसी के लिए सुरक्षित नही माना जाता है? इसका खर्च क्या है? और सर्जरी के बाद किन बातों का ख्याल रखना पड़ता है? इसके फायदे नोकसान क्या है, सब कुछ एक एक कर के इस लेख मे हम आसान भाषा मे विस्तार से जानेंगे।

चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी क्या है?

इस डिजिटल दौर मे Lasik Surgery चश्मा हटाने की सबसे प्रभावी और लोकप्रिय आधुनिक विधियों में से एक बन गई है जिसका फूल फॉर्म Laser-Assisted In Situ Keratomileusis होता है,​ LASIK Surgery आँखों की एक ऐसी सर्जरी है जिसमें लेजर की मदद से आँख की अपवर्तक त्रुटियों (Refractive Error) को ठीक किया जाता है, दरअसल हमारी आंख में कॉर्निया एक लेंस की तरह काम करती है, जब कॉर्निया का आकार सही नहीं होता, तो प्रकाश की किरणें रेटिना पर सही ढंग से केंद्रित नहीं हो पातीं, जिससे धुंधला दिखाई देता है, जो Lasik Surgery से कॉर्निया के आकार को बदल दिया जाता है, जिससे विजन साफ़ हो जाता है और चश्मे की जरूरत खत्म हो जाती है

दरअसल यह प्रक्रिया ​Myopia (निकट दृष्टिदोष)​, Hyperopia (दूर दृष्टिदोष) और Astigmatism (दृष्टिवैषम्य) जैसी सामान्य अपवर्तक त्रुटियों को ठीक करने के लिए की जाती है, जब आंख के कॉर्निया का आकार अनियमित होने के कारण हर दूरी पर धुंधलापन होता है, सबसे बड़ी बात यह है की LASIK Surgery की पूरी प्रक्रिया में मात्र 5-10 मिनट का समय लगता है और यह लगभग दर्द रहित होती है।

LASIK Surgery कैसे की जाती है?

LASIK सर्जरी एक अत्याधुनिक, कम्प्यूटर-नियंत्रित प्रक्रिया है, जो आमतौर पर 15-20 मिनट में दोनों आँखों की पूरी हो जाती है, जो बेहद सटीक और दर्द रहित होती है, जिसमें मरीज पूरी तरह होश मे रहता है, और बिना चीरा पट्टी के सर्जरी हो जाती है

लेकिन सर्जरी से पहेले आंखों को सुन्न करने के लिए (Anesthetic Eye Drops) डाला जाता है, उसके बाद कॉर्नियल फ्लैप बनाया जाता है, फ्लैप बन जाने के बाद, उसे धीरे से एक तरफ हटा दिया जाता है फिर सर्जन लेजर का उपयोग करते हैं, और​ यह लेजर कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित होता है, जिसमें आपका सटीक नंबर पहले से फीड किया जाता है

फिर ​लेजर सूक्ष्म मात्रा में कॉर्निया के टिश्यू को हटाकर उसे नया आकार देता है, जब लेजर का काम पूरा हो जाता है, तो सर्जन उस फ्लैप को वापस उसकी सही जगह पर रख देते हैं, उसके बाद आपको सुरक्षा के लिए पारदर्शी चश्मा (Eye Shield) पहना दिया जाता है ताकि धूल या गलती से हाथ लगने से बचा जा सके।

चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी 
LASIK Surgery

LASIK Surgery के लिए इन 5 चीजों का होना ज़रूरी है

Lasik Surgery दुनिया भर में करोड़ों लोगों की दृष्टि सुधार चुकी है, लेकिन फिर भी हर किसी की आँख इस सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होती, दरअसल यह निर्णय सिर्फ चश्मे के नंबर से नहीं, बल्कि आपकी आँखों की संरचना, समग्र स्वास्थ्य, जीवनशैली और यहाँ तक कि आपकी उम्मीदों को जाँचने के बाद लिया जाता है, और यही 5 महत्वपूर्ण मापदंड तय करते हैं कि आप लेसिक करवा सकते हैं या नहीं जैसे:

  • आयु सीमा (Age Requirement): Lasik Surgery के लिए सबसे पहेली चीज उम्र कम से कम 18 से 21 वर्ष होनी चाहिए तभी हो सकती है, क्यूंकि​ किशोरावस्था तक आँखों का आकार और चश्मे का नंबर बदलता रहता है, और ऐसे में यदि अस्थिर नंबर पर सर्जरी कर दी जाए, तो भविष्य में नंबर दोबारा आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • स्थिर चश्मा नंबर (Stable Prescription): Lasik Surgery से पहले कम से कम 12 से 24 महीनों तक चश्मे का नंबर स्थिर होना चाहिए, ​यदि चश्मे के नम्बर मे पिछले एक साल में आधे नम्बर या एक नम्बर से ज्यादा का बदलाव आता है, तो ऐसे मे डॉक्टर कुछ समय और इंतजार करने की सलाह दे सकते है।
  • कॉर्निया की पर्याप्त मोटाई (Corneal Thickness): LASIK प्रक्रिया में लेजर द्वारा कॉर्निया के टिश्यू को रीशेप किया जाता है, इसलिए कॉर्निया की पर्याप्त मोटाई होना बहुत जरुरी होता है, क्यूंकि ऐसे में​ यदि आपकी कॉर्निया बहुत पतली है, तो लेसिक सर्जरी आपके लिए असुरक्षित हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में डॉक्टर (PRK या ICL) की सलाह देते हैं।
  • आँखों का सामान्य स्वास्थ्य (Overall Eye Health): Lasik Surgery से पहेले ​आपकी आँखों में लेसिक के अलावा कोई अन्य गंभीर समस्या नहीं होनी चाहिए, जैसे​ काला मोतियाबिंद और रेटीना सम्बंधित रोग ​केराटोकोनस जबकि कुछ मामलों में ​गंभीर ड्राई आई भी लेसिक स्थिति को बिगाड़ सकती है।
  • सामान्य शारीरिक स्वास्थ्य: LASIK सर्जरी में ​कुछ शारीरिक स्थितियां रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर शुगर यदि शुगर लेवल अनियंत्रित है, तो घाव भरने में दिक्कत हो सकती है, और ​गर्भावस्था के दौरान भी क्यूंकि इन सब इस्थिति में चश्मे का नंबर अस्थायी रूप से बदल सकता है।

LASIK Surgery के प्रमुख प्रकार और एडवांस तकनीकें

आज के समय टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि हर आँख की बनावट के हिसाब से अलग-अलग लेजर तकनीक उपलब्ध है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट प्रक्रिया, लाभ और लागत है, और यह प्रत्येक व्यक्ति की आँख की संरचना, नंबर, बजट और जीवनशैली पर निर्भर करता है, जो आँखों की स्थिति के अनुसार डॉक्टर इनका चुनाव करते हैं जो अधिक सुरक्षा और सटीकता प्रदान करते हैं, और हमारे देश भारत में आज पारंपरिक लेसिक से लेकर अत्याधुनिक फ्लैप-रहित SMILE प्रो तक के विकल्प उपलब्ध हैं।

कन्वेंशनल लेसिक (Conventional LASIK)

यह LASIK सर्जरी की सबसे पुरानी और बुनियादी तकनीक है, ​इसमें एक छोटे सर्जिकल ब्लेड, (Microkeratome) का उपयोग करके कॉर्निया की ऊपरी सतह पर एक पतला फ्लैप बनाया जाता है, इसके बाद लेज़र से नंबर हटाया जाता है, लेकिन ब्लेड का इस्तेमाल होने के कारण इसमें रिकवरी थोड़ी धीमी हो सकती है, और फ्लैप से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम थोड़ा अधिक रहता है।

फेम्टो-लेसिक (Femto-LASIK)

इसमें ब्लेड का नामोनिशान नहीं होता और​ फ्लैप बनाने के लिए माइक्रोकेराटोम ब्लेड की जगह Femtosecond Laser का उपयोग किया जाता है, और यह लेजर कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित होता है, जो बालों से भी पतला फ्लैप बनाता है, इसलिए यह ब्लेड वाली लेसिक से कहीं ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्यूंकि इसमें घाव जल्दी भरता है और इन्फेक्शन का खतरा बहुत कम होता है।

कोंटूरा विजन (Contoura Vision)

यह वर्तमान में चश्मा हटाने की सबसे एडवांस और प्रीमियम तकनीक मानी जाती है, क्यूंकि कोंटूरा विजन आपकी आँख के कॉर्निया के अलग-अलग पॉइंट्स को मैप करती है, यह आपकी आँख की सतह की हर छोटी-बड़ी असमानता को ठीक कर देती है, जबकि इसमें रात के समय ड्राइविंग में कोई दिक्कत नहीं होती है, विजन की शार्पनेस चश्मे से भी बेहतर हो सकती है, इसलिए यह उन लोगों के लिए बेस्ट है जो परफेक्ट विजन चाहते हैं।

स्माइल सर्जरी (SMILE – LASIK)

यह लेजर विजन करेक्शन की सबसे नई और फ्लैप-लेस क्रांति है, जबकि इसमें न तो ब्लेड चलता है और न ही बड़ा फ्लैप बनाया जाता है, इसमें लेजर से कॉर्निया के अंदर एक छोटा सा लेंस जैसा टुकड़ा बनाया जाता है और उसे 2 मिलीमीटर के एक छोटे से छेद के जरिए बाहर निकाल लिया जाता है, दरअसल इसमें फ्लैप नहीं होता, इसलिए (Dry Eyes) की समस्या बहुत कम होती है, जो स्पोर्ट्स या एथलेटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह सबसे सुरक्षित है, क्योंकि फ्लैप खिसकने का डर खत्म हो जाता है।

Lasik Surgery से पहले कौन-कौन सी जांच की जाती है?

चश्मा हटाने के लिए Lasik Surgery से पहले डॉक्टर आंखों की विस्तृत जांच करते है, और यह जांच यह सुनिश्चित करती हैं कि आपकी आंखें Lasik Surgery के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हैं या नहीं, क्यूंकि सही जांच के बिना की गई सर्जरी से परिणाम प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए यह चरण सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • चश्मे के नंबर की जांच (Refraction Test): इस जांच में आपकी आंखों का सटीक नंबर मापा जाता है, कितने Dioptre की समस्या है, और पिछले कुछ समय से नंबर स्थिर है या नहीं।
  • कॉर्निया मैपिंग (Corneal Topography): इसमें कॉर्निया की सतह को कंप्यूटर से मैप किया जाता है, जिससे उसकी बनावट, घुमाव और असमानताओं का पता चलता है।
  • कॉर्निया की मोटाई (Pachymetry Test): LASIK सर्जरी में कॉर्निया का आकार लेज़र से कम किया जाता है, इसलिए इसकी मोटाई मापना जरूरी होता है ताकि सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सके।
  • ड्राई आई टेस्ट (Tear Film Evaluation): इस जांच से यह पता चलता है कि आंखों में आंसू पर्याप्त बन रहे हैं या नहीं, क्योंकि गंभीर ड्राई आई में Lasik Surgery के बाद परेशानी पैदा होने लगती है।
  • पुतली का आकार (Pupil Size Measurement): यह विशेष रूप से रात में देखने की समस्या से बचने के लिए पुतली के आकार की जांच की जाती है।
  • रेटिना की जांच (Retina Examination): इसमें आंख के पिछले हिस्से आँख के पर्दे की जांच की जाती है, ताकि कोई गंभीर रेटिनल बीमारी तो नही है उसका पता लागया जा सके।
  • आंखों का प्रेशर (Intraocular Pressure Test): इस जांच से काला मोतियाबिंद होने ना होने का पता लगाया जाता है और आंखों का प्रेशर ठीक है या नही जैसी समस्याओं को देखा जाता है।
चश्मा हटाने के लिए LASIK Surgery

इन सभी जांचों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आपकी आंखें Lasik Surgery के लिए सुरक्षित हैं या नही ताकी सर्जरी के बाद परिणाम स्थायी और स्पष्ट हो जिस्से जटिलताओं और जोखिमों की संभावना न्यूनतम रहे इसलिए ये जाँच सर्जरी से पहेले की जाती हैं।

LASIK Surgery के बाद क्या देखभाल करनी पड़ती है?

LASIK Surgery के बाद सही देखभाल करना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि इसी पर सर्जरी का अंतिम परिणाम निर्भर करता है, जबकि सर्जरी के तुरंत बाद आँखों में जलन, पानी आना या धुंधलापन महसूस हो सकता है, जो हर किसी को सर्जरी के बाद थोड़ी देर के लिए होता है और कुछ घंटों में कम हो जाता है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात जो ध्यान मे रखना होता है यह है की LASIK Surgery के पहले 24 घंटे आंखों को ज़्यादा से ज़्यादा आराम देना है, मोबाइल, टीवी या लैपटॉप देखने से बचना होता है, उसके साथ ही डॉक्टर द्वारा दी गई Eye Drops को समय पर और नियमित रूप से डालना बेहद जरूरी होता है, क्यूंकि ये सब कार्य इंफेक्शन से बचाते हैं और आंखों की हीलिंग को तेज़ करती हैं।

और सर्जरी के बाद आंखों को रगड़ना, दबाना या छूना सख्त मना होता है, क्योंकि की छोटी सी लापरवाही अन्य समस्या कारण बन सकती है, उसके साथ ही पहले एक हफ्ते तक आंखों में पानी सम्पू साबुन का गाज और अन्य चीजों विशेष सावधानी रखना पड़ता है, और मेकअप, काजल, आईलाइनर फेस क्रीम का उपयोग करने के लिए बहुत सावधानी रखनी पडती है, जबकि धूल, धुआं और तेज धूप से बचने के लिए बाहर निकलते समय काले चश्मे का प्रयोग करना पड़ता है।

जबकि 3–4 हफ्तों तक स्विमिंग, जिम और भारी एक्सरसाइज से दूरी बनाए रखना होता है, उसके साथ ही, डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप चेक-अप समय पर करवाना बहुत जरूरी होता है, क्यूंकि सही देखभाल से आंखें जल्दी ठीक होती हैं और विज़न लंबे समय तक साफ बना रहता है।

LASIK सर्जरी करवाने मे कितना रूपये लगते है?

हमारे देश ​भारत में Lasik Surgery का खर्च मुख्य रूप से आपके द्वारा चुनी गई तकनीक, अस्पताल की साख और आपके शहर पर निर्भर करता है, जिसमें शामिल है फीस Diagnostic tests और कौन सी lasik surgery आप करवा रहें है उसके बाद दवाइयां और फॉलो-अप विजिट शामिल है, जिसमें दोनों आँखों का खर्च ₹60,000 से लेकर ₹1,30,000 तक हो सकता है, लेकिन यह आपके शहर और अस्पताल के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है

LASIK सर्जरी के फायदे नुकसान और जोखिम कारक

LASIK सर्जरी ने दुनिया भर के करोड़ों लोगों का जीवन बदला है, लेकिन किसी भी मेडिकल प्रक्रिया की तरह, लेसिक LASIK सर्जरी के भी अपने फायदे और कुछ संभावित जोखिम होते हैं, हालांकि लेसिक की सफलता दर 96% से अधिक है लेकिन कुछ मरीजों को अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे:

LASIK सर्जरी के फायदे

  • LASIK सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप बिना चश्मे का सब कुछ साफ़ देख सकते हैं, यह आपकी लाइफस्टाइल को पूरी तरह बदल देता है और सर्जरी के बाद चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस से छुटकारा मिल जाता है।
  • LASIK सर्जरी के बाद अधिकांश मरीजों को सर्जरी के अगले ही दिन 20/20 Vision मिल जाता है और बिना चश्मे और कांटेक्ट लेंस के बहुत स्पष्ट दिखाई देने लगता है।
  • सबसे बड़ी बात सर्जरी के समय ​सुन्न करने वाली ड्रॉप्स का उपयोग होता है, इसलिए मरीज को सर्जरी के दौरान कोई दर्द महसूस नहीं होता।
  • LASIK सर्जरी में किसी टांके या पट्टी की जरूरत नहीं पडती है और ​तेज रिकवरी होती है, सर्जरी के बाद आप 24-48 घंटों के भीतर अपने सकारात्मक काम और सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं।
  • डिफेंस, एविएशन पायलट, मर्चेंट नेवी और पुलिस जैसी नौकरियों के लिए विजन का चश्मा मुक्त होना अनिवार्य होता है, जबकि Lasik Surgery इन सपनों को पूरा करने में मदद करती है।
  • LASIK सर्जरी का खर्च एक बार में ज्यादा लगता है, जबकि क्लीनिंग सॉल्यूशन के खर्चों से छुटकारा मिल जाता है।

लेसिक सर्जरी के नुकसान

  • फ्लैप से जुड़ी समस्याएं के कारण कुछ दुर्लभ मामलों में, कॉर्निया का फ्लैप अपनी जगह से हिल सकता है या उसमें सूक्ष्म झुर्रियां आ सकती हैं, और ऐसे मामलों में इसे फेम्टो-लेसिक या स्माइल तकनीक से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • LASIK सर्जरी के बाद कुछ महीनों तक आँखों में सूखापन के कारण आंसू कम बन सकते हैं, जिससे आँखों में चुभन या सूखापन महसूस होता है, और इसके लिए डॉक्टर लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स देते हैं।
  • LASIK सर्जरी के बाद कुछ लोगों को रात में देखने में कठिनाई हो सकती है जैसे रात के समय लाइट के चारों ओर घेरे या चमक दिखाई देना लेकिन यह समस्या अक्सर कुछ महीने में ठीक भी हो जाती है।
  • LASIK सर्जरी के समय यदि लेजर बहुत कम या बहुत ज्यादा टिश्यू हटा देता है, तो विजन पूरी तरह साफ़ नहीं होता और ऐसी स्थिति में दूसरी छोटी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
  • LASIK सर्जरी के बाद बहुत ही कम मामलों में और विशेषकर जिनका नंबर बहुत ज्यादा होता है उनमे समय के साथ थोड़ा सा नंबर वापस आ सकता है।

LASIK Surgery किसको नही करवानी चाहिए?

LASIK Surgery चश्मा हटाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है, लेकिन यह हर किसी के लिए सही साबित नहीं होती, खास कर कुछ परिस्थितियों में LASIK Surgery करवाना बिल्कुल जोखिम भरा हो सकता है, और ऐसे मामलों में डॉक्टर भी मना कर देते है या अन्य विकल्प सुझाते हैं, क्यूंकि जिन लोगों को Keratoconus या कॉर्निया से जुड़ी गंभीर बीमारी होती है, उनके लिए LASIK सुरक्षित नहीं मानी जाती है, और इसी तरह जिनकी कॉर्निया बहुत पतली होती है, उनमें सर्जरी के बाद आंख कमजोर होने का खतरा बना रहेता है, और चश्मे का नम्बर वापस आसकता है, और ड्राई आई सिंड्रोम है, तो LASIK Surgery के बाद आँखों मे जलन और विज़न की समस्या बढ़ सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण और आखरी बात अनियंत्रित डायबिटीज़, और Lupus या Rheumatoid Arthritis होने पर घाव भरने में परेशानी आती है, जबकि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण आंखों का नंबर बदल सकता है, इस मामलों मे इसके अलावा, 18 वर्ष से कम उम्र वाले और लगातार बदलते चश्मे के नंबर वाले लोग भी LASIK के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते, और इस मामले मे डॉक्टर सर्जरी को टाल सकता है और आपको करवाना भी नही चाहिए।

निष्कर्ष

चश्मा हटाने के लिए LASIK Surgery आज के समय में एक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक समाधान साबित हो रहा है, जिसने करोड़ों लोगों को चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस की झंझट से आज़ादी दिलाई है, यदि आप भी चश्मा हटाना चाहते हैं, तो LASIK Surgery करवाने से पहले आँखों की पूरी जाँच, सही तकनीक का चुनाव और अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद ज़रूरी है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपने डॉक्टर से पूरी जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें, क्यूंकि सही समय पर लिया गया एक सही निर्णय आपको जीवनभर के लिए स्पष्ट दृष्टि का उपहार दे सकता है।

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई सभी जानकारी केवल जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है, इसे किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, और ध्यान दें आँखों की स्थिति और सर्जरी के परिणाम हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से परामर्श अवश्य लें।