यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को मोतियाबिंद है या हो गया है, तो ऐसे मे लापरवाही या देरी करने से मोतियाबिंद सफ़ेद मोतियाबिंद बन सकता है, ऐसी स्थिति में जितनी जल्दी हो डॉक्टर से परामर्श लें, अगर डॉक्टर ऑपरेशन का सुझाव दे तो देरी न करें और एक बात याद रखें इसका एक छोटी सी सर्जरी के सिवा कोई दूसरा रास्ता नही है, इसलिए देरी बिलकुल भी न करें।
रहा सवाल मोतियाबिंद के ऑपरेशन का खर्च का तो इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है क्योंकि सर्जरी की कीमत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे अस्पताल सरकारी है या प्राइवेट, शहर कौनसा है, आपकी आंखों की स्थिति कैसी है, जीवनशैली कैसी है और आपकी दृष्टि की जरूरतों के हिसाब लगाए जाने वाले लेंस कौन से है, किस विधि से ऑपरेशन करवा रहें है और डॉक्टर का अनुभव के ऊपर निर्भर करती है।
लेकिन मैं एक नेत्र विशेषज्ञ होने के नाते आप से बताना चाहता हुँ, कि एक आंख का मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च लगभग ₹5,000 से ₹1,40,000 या उससे अधिक हो सकता है। लेकिन हमारे देश में बहुत सी जगह कैंप के जरिये और सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क में भी हो जाता है और आयुष्मान कार्ड के जरिये भी हो जाता है, अच्छी खबर यह है की अब प्राइवेट हॉस्पिटल में भी आप आयुष्मान कार्ड के जरिये करवा सकते है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि किस प्रकार की सर्जरी में कितना खर्च आता है, कौन-सा लेंस क्या काम करता है और आपके लिए कौनसा लेंस बेहतर हो सकता है, ऑपरेशन के पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ये सब विस्तार से जानेंगे।
- मोतियाबिंद क्या है और इसके सामान्य लक्षण?
- मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?
- मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने में कितना खर्चा आता है?
- मोतियाबिंद सर्जरी के लिए कौन सा लेंस अच्छा होता है और उनकी खासियत
- मोतियाबिंद ऑपरेशन के खर्च मे क्या-क्या शामिल होता है?
- किन कारणों से कीमत बढ़ सकती है?
- मोतियाबिंद का ऑपरेशन कितनी देर मे होता है?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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मोतियाबिंद क्या है और इसके सामान्य लक्षण?
मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है। जिसकी वजह से मोतियाबिंद वाले व्यक्ति को साफ दिखाई देना कम हो जाता है। दरअसल आज के समय में यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखी जाती है, लेकिन मधुमेह, आंख की चोट, जन्मजात कारणों से या कुछ स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक उपयोग करने से भी हो सकता है।
जबकि बहुत से लोग इसके शुरुआती लक्षणों को बढ़ती उम्र का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन ये लक्षण समय के साथ और भी बदतर होते जाते हैं, जो आप निचे देख सकते है:
- मोतियाबिंद वाली आंखों से अत्यधिक धुंधला दिखाई दे रहा हो
- रात के समय सामने से आने वाली गाड़ियों की हेडलाइट से चकाचौंध महसूस होना
- दिन के समय तेज रोशनी से चकाचौंध होना
- मोतियाबिंद वाली आंख से दूर खड़े आदमी का चेहरा साफ न दिखना
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना पड़े या कोई भी चश्मा काम न करे
- रंग फीके दिखाई देना
याद रखें अगर केवल हाथ का हिला डुला दिखाई दे या रोशनी का केवल एहसास हो तो समझ जाए मोतियाबिंद एकदम पक गया है और सफ़ेद मोतियाबिंद बन गया है, ऐसे में लापरवाही करना और ऑपरेशन न करवाना या समय पर ऑपरेशन न करवाना ऑपरेशन के बाद नज़र न आने का कारण बन सकता है, कुछ स्थिति मे डॉक्टर ऑपरेशन करने से मना भी कर सकते हैं।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?
मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए ये आपकी आंख की स्थिति, फैसले और आपके डॉक्टर के फैसले के ऊपर निर्भर करता है।
मैं एक दृष्टि विशेषज्ञ होने के नाते आपसे बताना चाहता हुँ, की आज भी बहुत से लोग ठंडी के मौसम का इंतज़ार करते है और ठंडी में ऑपरेशन करवाना ज्यादा मुनासिब समझते है, लेकिन ऐसा नही और आज के समय तो बिलकुल भी नही, दरअसल आज के समय जो तकनीक मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल की जाती है, जैसे (Phacoemulsification) जिसे आम बोल चाल में फेको विधि कहा जाता है।
इस विधि से जो ऑपरेशन होता है, ये साल के किसी भी महीने में, बिना चीरा पट्टी और न ही कोई बहुत बड़ा परहेज करना पड़ता है और यहाँ तक की अधिकतर लोगों को कोई इंजेक्शन भी नही लगता है, क्योंकि इस विधि जो ऑपरेशन होता है उसमे फोल्डेबल लेंस लगाया जाता है और नाम भर का चीरा लगता है, जिसकी रिकवरी बहुत जल्दी होती है, फिर चाहे गर्मी हो बरसात हो या ठंडी।
दरअसल पहले के लोगों का यह मानना था कि मोतियाबिंद पकने के बाद ही ऑपरेशन कर वाना चाहिए और ठंडी के मौसम में करवाना चाहिए। लेकिन ऐसा नही है, क्योंकि आज के समय उन्नत तकनीकों द्वारा मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता है जो पांच से दस मिनट में पूरी हो जाती है।
मेरी सलाह है, अगर आपको मोतियाबिंद के कारण रोज़मर्रा की गतिविधियाँ जैसे पढ़ना, वाहन चलाना, मोबाइल देखना या काम करना और रोज की जीवन शैली प्रभावित हो रही हैं, तो ऐसे में आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, अगर ऑपरेशन की सलाह दें तो ऑपरेशन करवा लेना चाहिए।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने में कितना खर्चा आता है?
मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने में कितना खर्चा आता है, ये आपकी आंखों की स्थिति और चुनी गई ऑपरेशन की तकनीक, लेंस जीवनशैली दृष्टि की जरूरतों और आपके डॉक्टर के अंतिम फैसले पर निर्भर करती है।
लेकिन मैं एक दृष्टि विशेषज्ञ होने और इस फिल्ड से जुड़े होने के नाते आप से बताना चाहता हुँ की हमारे देश में मोतियाबिंद का खर्च बहुत से देशों से कम और बहुत किफायती है, जबकि आयुष्मान कार्ड के लिए इस ऑपरेशन का खर्च उसी से कट जाता है और बहुत सी जगह केवल रजिस्ट्रेशन का केवल पैसा लगता है, वहीं बड़े और प्राइवेट अस्पतालों में इसका खर्च बढ़ जाता है
मैं आपको एक अनुमानित खर्च बता रहा हुँ, आप नीचे दी गई कीमतें देख सकते हैं, लेकिन वास्तविक खर्च आंखों की स्थिति, जीवनशैली और दृष्टि की जरूरतों, अस्पताल, शहर, चुने गए लेंस और तकनीक के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती है।
| ऑपरेशन की तकनीक और चुने गए लेंस के प्रकार आयुष्मान योजना के जरिये | एक आंख का ऑपरेशन करवाने मे लगने वाली लागत निःशुल्क लेकिन रजिस्ट्रेशन की लागत ₹200-₹500 तक पड़ ही जाती है। |
| सरकारी अस्पताल में (SICS) और (Phacoemulsification) विधि द्वारा | सरकारी अस्पतालों में (SICS) विधि द्वारा ₹2000 – ₹8000 और फेको विधि द्वारा फोल्डेबल लेंस ₹8000 – ₹18,000 याद रखें ये लेंस केवल दूर की नज़र साफ करेंगे और पढ़ने लिखने या बारीक काम के लिए चश्मे की आवश्यकता हो सकती है. |
| प्राइवेट अस्पताल में (SICS) और (Phacoemulsification) विधि द्वारा | SICS विधी द्वारा ₹7,000 – ₹15,000 और फेको विधि द्वारा फोल्डेबल लेंस की लागत ₹10,000 – ₹35,000 मतलब दूर की नज़र साफ हो जाएगी लेकिन बारीक काम के लिए चश्मे की आवश्यकता हो सकती है. |
| मोनोफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस | ₹12,000–₹40,000 कम या ज्यादा हो सकती है. |
| एडवांस्ड मोनोफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस | ₹30,000–₹75,000 कम या ज्यादा हो सकती है. |
| मल्टीफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस टॉरिक इंट्राओक्यूलर लेंस | ₹48,000–₹1,50,000 कम या ज्यादा हो सकती है. ₹40,000–₹75,000 कम या ज्यादा हो सकती है. |
ध्यान दें: मेरे मरीजों का जिस हॉस्पिटल मे ऑपरेशन होता है, ये उसकी लागत और आप के लिए एक अनुमान है। लेकिन ये आपके शहर और चुने गए डॉक्टर तकनीक लेंस के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकती हैं।
अगर आप या अपने परिवार के किसी सदस्य का ऑपरेशन करवा रहें है, तो सटीक बजट जानने के लिए ऑपरेशन से पहले अपने डॉक्टर से पूरे खर्च का विस्तृत ब्रेकअप (जैसे जांच, दवाइयाँ, फॉलो-अप और किसी भी आपात स्थिति का खर्च) अवश्य पूछ लें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेशी इंट्राओक्यूलर लेंस (IOL) की कीमत भारतीय लेंसों की तुलना में अधिक हो सकती है। इसलिए ऑपरेशन से पहले डॉक्टर से लेंस, कुल खर्च और पैकेज की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से प्राप्त कर लें।
मोतियाबिंद सर्जरी के लिए कौन सा लेंस अच्छा होता है और उनकी खासियत
मोतियाबिंद का ऑपरेशन के समय जो कृत्रिम लेंस लगाया जाता है, जिसे इंट्राओक्यूलर लेंस (IOL) कहा जाता है। यही दृष्टि को साफ करने में अहम भूमिका निभाते है, जो कई प्रकार के होते हैं।

हम आपको मोतियाबिंद सर्जरी में सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले और विभिन्न प्रकार के लेंस के बारे में जानकारी देंगे, जिसे आप निचे देख सकते हैं।
मोनोफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस
यह लेंस मोतियाबिंद सर्जरी में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है, खासकर हमारे देश भारत में, दरअसल ये बहुत किफायती होते हैं और ऑपरेशन के बाद दूर की नज़र एकदम साफ हो जाती है। सबसे प्रमुख बात यह है की आयुष्मान कार्ड जरिये जो मोतियाबिंद का ऑपरेशन होता है, उसमे मोनोफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस लगाया जाता है।
इस लेंस की खास बात यह है, की इसकी एक निश्चित फोकल लंबाई होती है, जिसके कारण ये केवल एक विशिष्ट दूरी पर ही स्पष्ट दृष्टि प्रदान करते हैं, जो आमतौर पर दूर की दृष्टि होती है। लेकिन पढ़ने -लिखने के लिए या सिलाई बुनाई के लिए आपको चश्मे की आवश्यकता होगी।
एडवांस्ड मोनोफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस
एडवांस्ड मोनोफोकल लेंस मोनोफोकल लेंस की तुलना में बेहतर और अधिक दृष्टि प्रदान करते हैं। इसका मतलब यह है की ये दूर की स्पष्ट दृष्टि के साथ-साथ मध्यम दूरी की दृष्टि को भी बेहतर बनाते हैं, जिसके कारण कंप्यूटर पर काम करना, रसोई के दैनिक कार्य करना या अन्य मध्यम दूरी के अधिकांश कामों में चश्मे पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।
लेकिन फिर भी नज़दीकी कार्यों पर फोकस करते समय खासकर पढ़ना, सिलाई बुनाई या मोबाइल का उपयोग करने के लिए अधिकतर लोगों को चश्मे की आवश्यकता पडती है।
मल्टीफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस
ये प्रीमियम श्रेणी के लेंस होते हैं, जो दूर मध्यम और नजदीक की स्पष्ट दृष्टि प्रदान करते हैं, इसलिए इनकी लागत भी ज्यादा होती है। मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद इनकी मदद से बिना चश्मे के सब कुछ कर सकते है, लेकिन परिणाम आंखों की स्थिति पर ही निर्भर होती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात है की मल्टीफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस लगवाने के बाद कुछ मरीजों को रात मे चकाचौंध और रोशनी के चारो ओर घेरा जैसा देखने की समस्या हो सकती है, क्यूंकि इन लेंसों के साथ तालमेल बैठाने में कुछ समय लग सकता है। लेकिन इन लेंसों से चश्मे पर निर्भरता काफी कम और कई मामलों में पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
टॉरिक इंट्राओक्यूलर लेंस
टॉरिक इंट्राओक्यूलर लेंस उन मरीजों के लिए विशेष रूप से बनाए गए हैं, जिसकी आंखों मे पहले से सिलेंड्रिकल नंबर होता है। दरअसल ये लेंस मोतियाबिंद के साथ-साथ सिलेंड्रिकल नंबर को भी ठीक करने में मदद करते हैं, जिससे दूर की दृष्टि अधिक स्पष्ट होती है और सर्जरी के बाद चश्मे की आवश्यकता काफी कम हो जाती है।
लेकिन ध्यान दें बारीक कामों के लिए चुने गए लेंस के प्रकार के अनुसार चश्मे की आवश्यकता पड़ सकती है।
मोतियाबिंद ऑपरेशन के खर्च मे क्या-क्या शामिल होता है?
मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाते समय लोगों के मन में यह बात चुभती रहती है की एक आंख के ऑपरेशन के लिए इतना पैसा क्यों देना पड़ता है, दरअसल पैकेज में निम्न सेवाएँ शामिल होती हैं, जिसे आप निचे देख सकते है:
- नेत्र परीक्षण: ऑपरेशन से पहले आंख की पूरी जाँच की जाती है, जिसमें शामिल है, केराटोमेट्री, बायोमेट्री और आदि जाँच जिससे सही लेंस (IOL) की पावर चुनी जा सके।
- सर्जन की फीस: अनुभवी सर्जन द्वारा ऑपरेशन करने का शुल्क, जो उनकी विशेषज्ञता और सफलता दर के अनुसार तय होती है।
- ऑपरेशन थिएटर शुल्क: ऑपरेशन थिएटर का इस्तेमाल, उसकी स्टेरलाइज़ेशन और वहाँ लगे उन्नत उपकरणों माइक्रोस्कोप, फेको मशीन के रखरखाव का खर्च।
- लेंस (IOL): मोतियाबिंद हटाने के बाद जो कृत्रिम लेंस आंखों में डाला जाता है, इस पैकेज का सबसे अहम और महंगा घटक होता है।
- दवाइयाँ: ऑपरेशन के समय इस्तेमाल होने वाली आई ड्रॉप्स, एनेस्थीसिया की दवाएँ और अन्य उपभोग्य सामग्रियाँ जैसे विस्कोइलास्टिक पदार्थ और ऑपरेशन के बाद दी जाने वाली दवाएँ।
- एक या अधिक फॉलो-अप विज़िट: ऑपरेशन के बाद की जाँचें, जिसमें ड्रेसिंग, आंख का दबाव चेक करना और रिकवरी की निगरानी शामिल है।
ध्यान रखें कुछ अस्पतालों में प्री-ऑपरेटिव टेस्ट या अतिरिक्त जाँच अलग से चार्ज की जा सकती हैं।
किन कारणों से कीमत बढ़ सकती है?
मोतियाबिंद ऑपरेशन की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है, ये आपने ऊपर देखा लेकिन इसके कुछ प्रमुख बिंदुओं के आधार पर बढ़ या घट भी सकती है:
1. लेंस का प्रकार
मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च आप के चुने गए अस्पताल ऑपरेशन किस तकनीक से करवा रहें है और लेंस कौन सा लगवा रहे हैं इन सब के ऊपर निर्भर करता है, दरअसल यह लागत का सबसे बड़ा कारक होते है।
अगर आप मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवा रहें हैं, तो याद रखें सामान्य मोनोफोकल लेंस की तुलना में एडवांस्ड मल्टीफोकल या टॉरिक लेंस अधिक महंगे होते हैं, लेकिन अगर लेंस विदेशी हो तो और भी महंगे हो जाते हैं, दरअसल जितना उन्नत लेंस होगा उतना ही सुविधाओं से भरपूर होगा, इसलिए उसकी कीमत अधिक होती है।
2. सर्जरी की तकनीक
मोतियाबिंद का ऑपरेशन कई अलग-अलग तकनीकों से किया जाता है, जिसमें शामिल है, ECCE तकनीक, SICS तकनीक, Phacoemulsification तकनीक और FLACS (Femtosecond Laser-Assisted Cataract Surgery।
याद रखें पारंपरिक फेको (Phacoemulsification) विधि की तुलना में लेज़र-असिस्टेड तकनीक अधिक सटीक और उन्नत होती है, जिसके कारण इसकी लागत अलग-अलग होती है और ज्यादा होती है।
3. अस्पताल
बड़े शहरों के बड़े अस्पतालों में ऑपरेशन की लागत अस्पताल की सुविधाओं और उसके स्थान पर भी निर्भर करती है। क्योंकि निजी अस्पतालों मे शुल्क, छोटे शहरों या सरकारी संस्थानों के मुकाबले काफी अधिक होता है।
4. डॉक्टर का अनुभव
केवल कम कीमत देखकर निर्णय न लें। इन बातों पर भी ध्यान दें, क्योंकि यही चीजें बेहतर इलाज के लिए जरूरी हैं और इन्हीं की वजह से खर्च में अंतर आता है, दरअसल एक अनुभवी सर्जन की फीस सामान्य से अधिक हो सकती है, लेकिन वे आपके ऑपरेशन को ज्यादा सुरक्षित बनाते हैं।
मोतियाबिंद का ऑपरेशन कितनी देर मे होता है?
इस समय टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन बेहद आसान और प्रभावी तरीके से पांच से दस मिनट मे हो पूरी हो जाती है। दरअसल आज के समय चीरा और टाका वाला ऑपरेशन बहुत कम होता है, जिसके कारण सुबह गए शाम को ऑपरेशन करवा के घर आ गए और अस्पताल में रुकना भी नही पड़ता है।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है अगर मोतियाबिंद का ऑपरेशन आयुष्मान कार्ड के जरिये करवा रहें है, तो इसके लिए अधिकतर अस्पतालों में आपको एक रात के लिए रुकना पड़ सकता है।
अगर आप स्वयं खुद अपनी आंख का या अपने परिवार के किसी सदस्य का मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवा रहें हैं, तो डरें नही क्योंकि आज के समय मोतियाबिंद का ऑपरेशन अधिकतर जगह फेको विधि से होता है, जिसकी रिकवरी बहुत तेज होती है, आमतौर पर अगले ही दिन मरीज बिल्कुल सामान्य महसूस करता है और अपने रोजमर्रा के काम बिना किसी बाधा के कर सकते हैं।
लेकिन थोड़ी सावधानी बरतनी होती है जैसे साफ-सफाई का ध्यान रखना और गंदे हाथ या कपड़े से बचना, बच्चों से दूरी बना के रखना जो बहुत महत्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दोबारा मोतियाबिंद हो सकता है?
नहीं, मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दोबारा मोतियाबिंद नहीं होता। लेकिन कुछ मामलों में लेंस के पीछे एक झिल्ली आ जाती है, जिसे ‘सेकेंडरी कैटरेक्ट’ कहते हैं। इसे लेज़र के जरिए महज 2 मिनट में साफ किया जा सकता है।
क्या आयुष्मान कार्ड से प्राइवेट अस्पताल में भी फ्री ऑपरेशन होता है?
जी हाँ अगर अस्पताल योजना से संबद्ध हो तो प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के तहत मोतियाबिंद का ऑपरेशन परामर्श चार्ज देकर कराया जा सकता है।
क्या मोतियाबिंद ऑपरेशन दर्दनाक होता है?
नहीं, इस समय जो मोतियाबिंद ऑपरेशन करते समय तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, यह लोकल एनेस्थीसिया में किया जाता है और सामान्यत दर्द नहीं होता।
क्या दोनों आंख का ऑपरेशन एक साथ हो सकता है?
मोतियाबिंद का ऑपरेशन एक साथ दोनो आंखों का नही किया जाता है, लेकिन मरीज़ की स्थिति के अनुसार पांच से दस दिन बाद दूसरी आंख का ऑपरेशन कर वाया जा सकता है।
मोतियाबिंद ऑपरेशन की लागत इंडिया में कितनी है?
इंडिया में मोतियाबिंद का ऑपरेशन की लागत चुने गए अस्पताल, लेंस और ऑपरेशन किस तकनीक से हुआ है इन सब बातों पर निर्भर करती है। लेकिन सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मोनोफोकल इंट्राओक्यूलर लेंस और जो SICS विधि से किये जाते हैं, उसकी लागत ₹2000 से ₹15,000 होती है।




