अगर आंख में धूल या कोई अन्य कण चला जाए तो आंख न रगड़ें। ऐसी स्थिति में बार-बार पलक झपकाएं और साफ पानी या सलाइन से 5–10 मिनट तक आंख धोएं। यदि दर्द बढ़ता जाए, धुंधला दिखाई दे, रोशनी से परेशानी हो, या कण आंख में धंसा हुआ लगे, तो उसे स्वयं निकालने की कोशिश न करें और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
सारांश
कहीं आते या जाते वक़्त और साफ सफाई करते समय आंख में धूल, मिट्टी या कोई छोटा कण चला जाना हर किसी के साथ कभी न कभी ऐसी घटना घट ही जाती है। जिससे आंखों में गड़न, चुभन, भारिपन, दर्द, पानी आना और आंख लाल हो जाती है, जबकि ऐसी स्थिति में आंख को पानी से धोने पर और बार-बार पलक झपकाने से अधिकतर मामलों में समस्या ठीक भी हो जाती है।
लेकिन ऐसे मामलों में क्या नही करना चाहिए और क्या सबसे पहले करना चाहिए और दर्द, लालिमा, धुंधलापन, आंखों से पानी आना या चुभन बनी रहे तो ऐसे में क्या करना चाहिए इन सब बातों को और इसके घरेलू व मेडिकल उपचार व इमरजेंसी स्थिति के बारे में इस ब्लॉग मे जानेंगे।
आंख में धूल, डस्ट या कोई कण चला जाए तो क्या करें?
अक्सर कभी न कभी बाइक चलाते समय या साफ सफाई करते समय आंख में धूल कचरा या कोई अन्य डस्ट या फिर कण चला ही जाता है और ये समस्या हर किसी के साथ कभी न कभी हो ही जाती है। जिसकी वजह से आंखों में काफी ज्यादा असहजता महसूस होने लगती है।
याद रखें ऐसी स्थिति में सबसे पहले आंख को रगड़ने से बचें और बार-बार पलक झपकाएं ताकि डस्ट का कण किनारे की तरफ आ जाए और निचली पलक ऊँगली से थोड़ा नीचे खींचने पर डस्ट या कण केवल आंख के सफेद हिस्से या निचली पलक पर दिखाई दे और आसानी से हट सके, तभी साफ गीले कॉटन स्वैब या साफ कपड़े के कोने से हल्के हाथ से हटाने की कोशिश करें। यदि कण कॉर्निया पर हो या धंसा हुआ लगे, तो स्वयं न निकालें।
चेतावनी: अगर आंख में लोहे या धातु के कण धंसे हों तो उन्हें खुद निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाएं या अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें क्योंकि यह एक इमरजेंसी स्थिति है।
आंख में डस्ट या कोई अन्य कण चला जाए तो क्या नही करना चाहिए?
आंख हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं, इसलिए आंख में धूल का एक छोटा सा कण या लकड़ी का बुरादा भी चला जाता है, तो आंखों में जलन, चुभन, गड़न, पानी आना और आंख लाल हो जाती है। अगर आपकी आंख में कभी भी धूल गर्दा या कोई भूसा भूसी या अन्य कण भी चला जाए तो घबराएं नहीं, क्योंकि ऐसे में आराम पाने के लिए बहुत से लोग आंख को मलने लगते है। लेकिन आपको ऐसा नही करना है।
दरअसल मैं एक दृष्टि विशेषज्ञ होने के नाते आपसे बताना चाहता हूँ, मैं ऐसे मरीजों को जब स्लिट लैंप पर fluorescein strip के diagnose करने के बाद देखता हूँ तो, उनके बार-बार आंख मलने की वजह से पुतली पर (Corneal Abrasion) घाव दीखने लगता है।
इन गलतियों से बचें
आंखों मे धूल, डस्ट या कोई अन्य कण चले जाने पर खुद की देखभाल से आराम हो जाता है। लेकिन कुछ मामलों में सतर्क रहेना चाहिए, खासकर आंख के मामले में क्योंकि ऐसे मे एक छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इसलिए आपको नीचे निम्नलिखित गलतियों से हमेशा बचना चाहिए:
- कॉन्टैक्ट लेंस: अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो आंख में कभी भी असुविधा होते ही सबसे पहले लेंस को हटा दें और जब तक आंख पूरी तरह ठीक न हो जाए, लेंस दोबारा न पहनें।
- कांच या लोहे के कण: अगर आप वेल्डिंग, कारपेंट्री या कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं और आंख में लोहे का बुरादा या कांच गया है, तो इसे घर पर निकालने की कोशिश बिल्कुल भी न करें, क्यूंकि लोहे के कण आंख में धसे होते हैं और बहुत तेजी से (Rust Ring) जंग बनाते हैं, इसलिए आपको ऐसे मामलों में देरी नहीं करनी चाहिए और न ही कोई उल्टा सीधा घरलू उपचार अपनाना चाहिए।
- नुकीली चीज़ों का इस्तेमाल: आंख में से धूल डस्ट कचरा निकालने के लिए कभी भी सुई, चिमटी सेफ्टी पिन, या माचिस की तीली का इस्तेमाल न करें और बच्चों से दूर रखें, क्यूंकि यह आपकी दृष्टि और आपके बच्चे की दृष्टि को हमेशा के लिए नुकसान पहुँचा सकती है।
आंख में फंसी वस्तु (Foreign Body) कितने प्रकार की होती है?
हर धूल का कण एक जैसा नहीं होता। इसलिए सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि आंख में क्या गया है, क्योंकि इसी पर इलाज निर्भर करता है:
- ऊपरी सतह पर: इसका मतलब आंख की ऊपरी सतह पर या पलकों के आस पास कुछ सामान्य धूल, मिट्टी, बालू, या हल्की राख इन सबके सम्पर्क में आ गई है, जिसकी वजह से गड़न पानी आना और लालिमा दिखने लगती है, जिसे घर पर साफ पानी से धोने पर और खुदकी देखभाल से अधिकतर मामलों में आराम मिल जाता है।
- अंतर्निहित (Penetrating): इसका मतलब आंखों में लोहे का बुरादा, कांच का टुकड़ा, वेल्डिंग की चिंगारी, डस्ट या खर खोबार की राख आंख के अंदर है या कण धसा हुआ है, जिसकी वजह से आंखों में काफी ज्यादा परेशानी महसूस होने लगती है। याद रखें ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार भी काम नही आता है। इसलिए सुने सुनाये या उल्टा सीधा उपचार अपनाने की कोशिश भी न करें। दरअसल आंख के अंदर फसी कोई भी वस्तु हो ये सब लालिमा जलन पानी आने और संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
क्या आंख में धूल डस्ट या कोई अन्य कण जाने से आंख खराब हो सकती है?
ऐसे मामलों में आंख में लगातार दर्द, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखाई देना, गड़न और रोशनी से परेशानी हो सकती है। लेकिन अधिकांश मामलों में आंख में गई सामान्य धूल या मिट्टी कोई स्थाई नुकसान नहीं पहुंचाती है और हल्के फुल्के मामलों में खुद की देख-रेख से आराम भी मिल जाता है।
लेकिन अगर धूल या बालू का कण की वजह से कॉर्निया पर घाव बनने की संका हो या आंख में कांच, लकड़ी के धातु का टुकड़ा व कोई खर खोबार की पत्ती आंखों में लग जाए और खुदकी देखभाल से आराम न मिले या समस्या बढ़ती जाए तो ऐसे में लापरवाही करना उम्र भर के लिए चिन्ताजनक विसय बन सकता है।
दरअसल कॉर्निया पर लगी चोट या कोई चीज उसपे धस और चिपक जाए तो यह एक इमरजेंसी स्थिति बन जाती है। खासकर यदि लकड़ी, भूसा, पेड़-पौधों की टहनी या कृषि सामग्री से आंख में चोट लगी हो, तो, क्योंकि ऐसे मामलों में देरी करने पर Fungal Keratitis का खतरा बढ़ सकता है।
आंख में धूल डस्ट या कोई अन्य कण चला जाए तो इसका प्राथमिक उपचार क्या होना चाहिए?
यदि आंख में सामान्य धूल-मिट्टी चली जाए और कोई गंभीर चोट न हो, लेकिन इसकी वजह से हल्की-फुल्की लालिमा, गड़न, जलन और आंखों से आँसू आने लगे तो ऐसे मामलों में खुदकी देख रेख व घरेलू उपायों से राहत मिल सकती है।
- पलकें झपकाएं: अपनी आंखों को बार-बार खोलें और बंद करें। दरअसल बार-बार पलकें झपकाने से आंख में आँसू अधिक मात्रा में बनते हैं, जिससे आंखों में गए कण आंख के कोने में चले आते हैं।
- हाथों को साफ करें: आंख को छूने और साफ करने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरीके से धोयें, ताकि हाथों के बैक्टीरिया निकल जाए और आंख में प्रवेश न करे।
- आंखे न रगड़ें: सबसे बुनियादी और ज़रूरी चीज यही है कि ऐसी स्थिति में आंख बिल्कुल भी न रगड़ें और आंखों के कोने में दिखने वाले कण या डस्ट किसी साफ कपडे से व हल्के हाथों से निकाल लें या फिर किसी की मदद लें।
अगर पलक झपकाने से काम न बने और कचरा बाहर न निकले, तो आंख को पानी से धोयें यही डस्ट व कचरे को बाहर निकालने का सबसे सुरक्षित और प्राथमिक उपचार व तरीका है।
- सलाइन सॉल्यूशन या साफ पानी का इस्तेमाल करें: एक साफ प्याला लें और उसमे सलाइन सॉल्यूशन या पीने का साफ पानी लें।
- आंख को डुबोएं: अब अपनी आंख को उस पानी में डुबोएं और पलकों को अंदर ही धीरे-धीरे खोलें और बंद करें, ऐसा करने से धूल डस्ट बाहर आ जायेंगे।
- नल का हल्का बहाव: यदि हैंड पम्प या नल के साफ पानी से आंख धोयें या हल्के हाथ से छिटा मार लें, लेकिन ध्यान रहे कि पानी का प्रेशर बहुत तेज़ नहीं होना चाहिए।

यदि आंख में धूल डस्ट निकल जाने के बाद भी अगर जलन, चुभन और आंख लाल दिखे तो ऐसे में लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स और ठंडी सेक से भी राहत मिल सकती है।
- ठंडी सेक: आंखों में गए धूल डस्ट निकलने के बाद भी आंख में जलन, पानी आना और हल्की-फुल्की सूजन बनी रहती है, तो एक साफ कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर आंख को बंद कर के उसके ऊपर रखें, इससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं और गड़न व सूजन कम हो जाती है।
- लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स: हालांकि Preservative-free लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स सुरक्षित मानी जाती हैं और हल्की-फुल्की लालिमा, गड़न चुभन या बार बार पानी आने की समस्या के लिए और आंखों को फ्रेस रखने के लिए इसका उपयोग करना एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। लेकिन अगर लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लें।
अगर डस्ट या कण पलक के नीचे छिपा हो तो क्या करें?
कई बार धूल का कण ऊपरी या निचली पलक के अंदरूनी हिस्से में फसा होता है, जिसे देखना और निकालना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन ऐसी स्थिति में आप इसे निकालने के सुरक्षित तरीके नीचे देख सकते हैं:
- निचली पलक के लिए: अपनी आंख की निचली पलक को उंगली से धीरे से नीचे की तरफ खींचें और ऊपर की ओर आईने में देखें, अगर कोई कण दिखाई दे, तो एक साफ और हल्के गीले कॉटन या कपड़े के कोने से उसे निकाल लें।
- ऊपरी पलक के लिए: यदि कचरा ऊपरी पलक के नीचे हो तो ऊपरी पलक को धीरे से पलट लें, हो सके तो किसी की मदद लें और इसको भी अच्छे से देख लें अगर कोई अन्य धूल डस्ट का कण दिखे तो निकाल लें।
कुछ महसूस हो रहा है पर दिख नहीं रहा हो तो कैसे क्या करें?
दरअसल ऐसे लोग भी मेरी ओपीडी में आकर शिकायत करते हैं कि, मेरी आंख में धूल डस्ट या कोई अन्य कण चला गया था और मैंने पानी से धोया और देखा लेकिन कुछ दिख नही रहा है, परन्तु मेरी आंख गड़ रही है और आंखों से पानी आ रहा है, लाल भी हो गई है। दरअसल यह कई वजह से हो सकता है:
- अदृश्य या बारीक कण: हालांकि अक्सर आंख में गया कण या डस्ट बहुत छोटा और पारदर्शी होने के कारण (जैसे कांच का बारीक टुकड़ा या सफेद डस्ट या बालू का कण ) जो सामान्य रूप से नहीं दिखता है। लेकिन इसकी वजह से आंखों में कुछ होने या रेगने जैसा पलक झपकाने पर महसूस होता रहता है।
- कॉर्नियल अब्रेजन (Corneal Abrasion): इसका मतलब यह की आंख की ऊपरी परत कॉर्निया पर खरोंच या जखम बन गई है और इस खरोंच के कारण आंख को ऐसा महसूस होता रहता है, जैसे आंख के अंदर अभी भी कुछ है। परन्तु यह सब स्लिट लैंप पर fluorescein strip से जाँच करने पर अस्पष्ट रूप से दीखता है।
दरअसल अधिकतर मामलों में डस्ट तो निकल जाता है, लेकिन Corneal Abrasion की वजह से ही आंख में गड़न, दर्द लालिमा बनी रहती है। इसलिए आंखों जब भी कोई डस्ट या कोई अन्य वस्तु चली जाए तो आंख को बार-बार छुएं नहीं, क्योंकि ऐसा करने पर समस्या बढ़ने लगती है और खुदकी देखभाल से आराम न मिले तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी भी नही करनी चाहिए।
बच्चों की आंख में कुछ चला जाए तो क्या करें?
बच्चों की आंख बड़ों से भी ज्यादा संवेदनशील होती हैं। इसलिए बच्चों की आंखों में धूल, धुआँ या डस्ट के चले जाने पर मलने लगते हैं। जबकि छोटे बच्चे तो रोने और चिल्लाने लगते हैं। लेकिन ऐसे में क्या करना ठीक रहेता है ये आप निचे देख सकते हैं।
- अगर आपके बच्चे की आंख में कुछ भी चला जाए तो सबसे पहले बच्चे को आंख पर हाथ लगाने से रोकें या दोनों हाथों को पकड़ें ताकि वह आंख न रगड़े।
- ऐसी स्थिति में बच्चे को कहें कि वह बार-बार अपनी आंख बंद करे और खोले, जबकि कई मामलों में रोने के कारण जो आँसू निकलते है, उसी के जरिये अधिकतर मामलों में कचरा बाहर आ जाता है।
- यदि बच्चा सहयोग करे, तो साफ पानी से आंख धोयें, लेकिन अगर बच्चा बहुत छोटा है, तो ऐसी स्थिति में अपने नजदीकी पीडियाट्रिक, ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट या ऑप्टोमेट्रिस्ट को दिखा लेना ज्यादा उचित होता है।

डॉक्टर को कब दिखाना जरुरी है?
आंखों के मामलों में लापरवाही करना या देर करना अच्छी बात नही है, खासकर अगर आंखों में कोई कण या कोई डस्ट चला जाए और खुदकी देखभाल से आराम न मिले। जबकि नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी एक लक्षण दिखे, तो लापरवाही बिल्कुल न करें, वरना यह उम्र भर के लिए एक लापरवाही का कारण बन सकता है:
- यदि साफ पानी से धोने के बाद भी आंख की गड़न, चुभन या दर्द कम नहीं हो रही हो या बढ़ती जाए।
- रोशनी की तरफ देखने में तेज तकलीफ (Photophobia) होना या धुंधला दिखाई देना।
- आंख के सफेद हिस्से में खून जमा होना (Subconjunctival Hemorrhage) या आंख लाल जाना।
- किसी भी तरह का केमिकल (जैसे हार्पिक हो, फेवीक्विक हो चूना, एसिड या कोई अन्य जहरीला पदार्थ) आंख में चला गया हो ।
- आंख से लगातार आँसू आना, आंखों से कीचड़ आना, जलन होना या समस्या बढ़ती जाए।
आंखों की सेफ्टी के लिए आसान टिप्स
आंखों का बचाव मतलब दुनिया का बचाव इसलिए इलाज से बचाव हमेशा बेहतर होता है। खासकर अगर आपको पहले भी कभी ऐसी समस्या हुई है:
- बाइक चलाते समय: हेलमेट का वाइज़र नीचे रखें या एंटी-ग्लेयर सनग्लासेस पहनें इससे आपकी और आप भी सेफ रहेंगे।
- साफ सफाई करते समय: झाड़ू, पोछा लगाते समय चश्मा जरूर पहनें ताकि उड़ता हुआ कण अंदर न जाए।
- निर्माण कार्य या फैक्ट्री में: अगर कहीं धूल गर्दा वाला काम हो रहा है या आप करते है तो ऐसे में सेफ्टी गॉगल्स पहनना अनिवार्य करें।
- वेल्डिंग या कारपेंट्री: अगर आप वेल्डिंग या कारपेंट्री का काम करते है तो हमेशा फेस शील्ड या पूरा चेहरा ढकने वाला प्रोटेक्टिव गियर पहनें।
- सुझाव: यदि आंख में फंसी वस्तु दिखाई दे और बाहर न निकल रही हो।
निष्कर्ष और बचाव
यदि आंख में धूल या कोई अन्य कण चला जाए, तो घबराएं नहीं। क्योंकि आंख में धूल-मिट्टी जाना एक बेहद आम समस्या है। हालांकि ऐसे में आंख को रगड़ने के बजाय साफ पानी या सलाइन से धोएं और बार-बार पलक झपकाएं। लेकिन लापरवाही करना और ये सोच कर छोड़ देना की ठीक हो जायेगा, ऐसी लापरवाही गंभीर आंखों की समस्या का कारण बन सकती है। यदि दर्द, धुंधलापन, रोशनी से परेशानी या कण धंसा हुआ लगे, तो स्वयं निकालने की कोशिश न करें और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर उपचार आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है और आंख की सुरक्षा ही सबसे बड़ा उपचार है।
वेल्डिंग का काम करते समय आंख में कण चला जाए तो क्या करें?
वेल्डिंग के हॉट पार्टिकल्स कॉर्निया में धंस जाते हैं और तेजी से ‘Rust Ring’ (जंग) बनाते हैं, इसलिए इस स्थिति में इन्हें घर पर निकालने की कोशिश बिल्कुल भी न करें। तुरंत नेत्र विशेषज्ञ के पास जाएं, जो स्लिट लैंप की मदद से इसे सुरक्षित निकाल देंगे।
बच्चों की आंख में धूल चली जाए तो क्या करें?
बच्चे को आंख रगड़ने से रोकें, बार-बार पलक झपकाने के लिए कहें और साफ पानी से आंख धोएं। यदि बच्चा लगातार रो रहा हो या आंख लाल बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।
क्या कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर आंख धोनी चाहिए?
नहीं। यदि आंख में धूल या कचरा चला गया है, तो सबसे पहले कॉन्टैक्ट लेंस निकाल दें और आंख पूरी तरह ठीक होने तक दोबारा न पहनें।
आंख में धूल जाने पर कितनी देर तक पानी से धोना चाहिए?
आंख को लगभग 5 से 10 मिनट तक साफ पानी या सलाइन सॉल्यूशन से धीरे-धीरे धोया जा सकता है। इससे अधिकांश छोटे कण बाहर निकल जाते हैं।
आंख में धूल निकलने के बाद भी चुभन क्यों होती है?
कई बार धूल का कण निकल जाने के बाद भी कॉर्निया पर हल्की खरोंच (Corneal Abrasion) रह जाती है। इसी कारण कुछ समय तक ऐसा महसूस हो सकता है कि आंख में अभी भी कुछ फंसा हुआ है।

