बच्चों की आंखों से पानी आने का कारण, घरेलू उपचार व मेडिकल उपचार और जोखिम भरे कारक के बारे में जाने

बच्चों की आंखों से पानी क्यों आता है?

हम सब लोगों की आंखों में हर समय आँसू बनते रहते हैं और ये आँसू आंखों को नम रखने, धूल-मिट्टी और अन्य बाहरी कणों से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में ये आँसू आंख के अंदरूनी कोने में स्थित आँसू नलिका (Tear Duct) के माध्यम से नाक में चले जाते हैं।

जबकि बच्चों खासकर नवजात शिशुओं में आँसू नलिका पूरी तरह विकसित न होने के कारण, संक्रमण, एलर्जी व जन्मजात जैसी समस्या होने के कारण पानी आना, कीचड़ आना, सूजन और आंख लाल दिखने जैसे अन्य लक्षण दिखने लगते हैं।

हालांकि आँसू नलिका का बंद होना, संक्रमण, एलर्जी व जन्मजात ही एकमात्र कारण नहीं होता है, इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे की आंख से पानी आने के साथ आंख लाल होना, सूजन, कीचड़, दर्द, रोशनी से परेशानी जैसे अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

शिशु की आंखों से पानी आना क्या सामान्य है?

बच्चों की आंखों से पानी आना एक आम समस्या है, विशेषकर नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में। हालांकि अधिकांश नवजात शिशुओं में यदि कारण आँसू की नली पूरी तरह खुली न हो और आंख में संक्रमण या कोई अन्य गंभीर समस्या के लक्षण न दिखे, तो यह समस्या समय के साथ और माता पिता की देखभाल से ठीक हो सकती है।

यदि इसके साथ आंख लाल हो, सूजन हो, कीचड़ आता हो और बच्चा बार बार आंख मलता हो, तेज बुखार या रोशनी से बच्चे को परेशानी हो तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि आपके शिशु व बच्चे की उम्र के अनुसार आंखों से पानी आने के कारण अलग हो सकते है और अन्य लक्षण दिख सकते हैं।

0–1 महीने के शिशु की आंख से पानी आना

जन्म के पहले महीने में शिशु की आंख से पानी या स्राव आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आँसू की नली पूरी तरह खुली न होना एक सामान्य कारण हो सकता है, लेकिन नवजात शिशुओं में जन्म से लेकर तीस से चालीस दिनों के अंदर (Ophthalmia Neonatorum) संक्रमण शिशुओं में आँसू आने व स्राव होने का कारण बन सकता है।

जबकि कुछ दुर्लभ मामलों में जन्मजात ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma) जैसी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। यदि आंख लाल न हो, सूजन न हो और बच्चे की आंख दिखने में सामान्य है और कभी कभार केवल पानी या हल्का फुल्का कीचड़ आ रहा है, तो कोई चिंता करने की बात नही है। यदि समस्या कई दिनों से बनी है या अन्य लक्षण दीखते हैं या बढ़ते हैं तो ऐसे में लापरवाही करना ठीक नही है।

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2 से 6 महीने के बीच की उम्र के बच्चे की आंख से पानी आना

यदि आपका शिशु जन्म के पहले महीने ठीक था लेकिन जन्म के बाद दो से आठ महीने के बीच की उम्र में आँसू या कीचड़ आता है तो इसके पीछे (Bacterial Conjunctivitis) संक्रमण का कारण हो सकता है या वायरल, एलर्जी जैसी अन्य समस्या के कारण हो सकता है। लेकिन अगर हल्का फुल्का और कभी कभार स्राव या कीचड़ आता है, तो आँसू नलिका का पूरी तरह खुला न होने के कारण भी हो सकता है।

यदि जन्म के बाद आता था लेकिन दो से सात महीने की बीच उम्र होने के बाद भी आ रहा है तो इस उम्र तक भी आँसू नलिका खुलने की प्रक्रिया चलती रहती है जिसके कारण यह समस्या बनी रह सकती है। हालांकि ऐसी स्थिति मे अगर कभी कभार केवल बच्चे की आंख से पानी आता रहता है और कोई गंभीर लक्षण नहीं दीखते हैं, तो कोई गभराने की बात नही है। लेकिन अगर आंख लाल हो, सूजन हो या स्राव काफ़ी ज्यादा आता है, तो यह एक इमरजेंसी स्थिति हो सकती है।

1 से 2 साल के बच्चे की आंख से पानी आना

इस उम्र में अगर आपके बच्चे की आंखों से पानी आ रहा है, लेकिन पहले ठीक था तो यह एक चिन्ताजनक विसय है। दरअसल इसके कई संभावित कारण हो सकते हैं, संक्रमण, आंखों मे एलर्जी की समस्या होना, अपवर्तक दोष होना, पलकों में किसी प्रकार का इन्फ्लेमेशन होना और धूल डस्ट के चले जाने के कारण या फिर खेलते कूदते समय चोट लगने की वजह से। यदि आपका बच्चा बार-बार आंख मलता है, आंखों में पानी आने के साथ आंख लाल हो जाती है या रोशनी वाली जगह परेशान दीखता है, तो यह एक चिन्ताजनक बात है।

हालांकि अगर जन्म से लेकर और एक से दो साल उम्र हो जाने के बाद भी आँसू आने वाली समस्या बनी रहती है, तो ऐसे में लापरवाही करना और ये सोच कर छोड़ देना की अपने आप ठीक हो जायेगा ये आपके बच्चे की आंखों की समस्या को गंभीर स्थिति में धकेल सकता है।

बच्चे एक आंख से पानी आना

2 साल से अधिक उम्र के बच्चे की आंख से पानी आना

यदि आपका बच्चा दो साल या उससे अधिक उम्र का है और पहले ठीक था लेकिन इस उम्र में आँसू आता है कीचड़ आता है या पलकों में सूजन है आंख लाल हो गई तो इसके पीछे कई अनेक कारण हो सकते हैं।

खासकर स्टाई, संक्रमण, एलर्जी या आंखों में धूल डस्ट के चले जाने पर, अपवर्तक दोष होने पर और खेलते कूदते समय चोट लग जाने की वजह से जिसके कारण आंखों से पानी आना, लाल हो जाना और सूजन, दर्द जलन जैसे अन्य लक्षण दिखने लगते हैं।

बच्चे की एक आंख से पानी आना

बच्चे के जन्म के समय से ही केवल एक आंख से पानी या कीचड़ आ रहा है, तो सबसे सामान्य कारण आँसू नलिका का पूरी तरह विकसित न होना होता है। यदि आपके शिशु की एक आंख से आँसू या कीचड़ आता है और सुबह के समय कीचड़ की वजह से पलक चिपक जाती है, जबकि दूसरी आंख एकदम ठीक है, तो इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। (जैसे संक्रमण, पलकों में सूजन, लालिमा, एलर्जी, आँसू नलिका या जन्मजात बीमारी) लेकिन हर शिशु की आंख से पानी आने का मुख्य कारण जरुरी नही की आँसू नलिका ही हो, क्योंकि ऐसी स्थिति में अन्य कारण भी हो सकते हैं।

यदि आपका बच्चा पहले ठीक था और इस समय चल फिर ले रहा है लेकिन उसकी एक आंख से पानी आता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। खासकर आंखों में धूल डस्ट चले जाने पर और (keratitis, Blepharitis, Allergy, Stye) जैसी अन्य समस्या होने पर एक आंख से पानी आना दर्द होना, लालिमा सूजन दिखने लगती हैं हालांकि यह समस्या कई दिनों तक बनी रह सकती हैं।

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बच्चे की दोनों आंखों से पानी आना

जन्म के बाद यदि आपके शिशु की दोनों आंखों से पानी आता है, तो इसके कई कारण हो सकते है, हालांकि न्यूबोर्न बेबी की आंखों से पानी आना आँसू नलिका का पूरी तरह न खुलने की वजह से ही कई दिनों तक आँसू व कीचड़ शुरुआती दिनों में आ सकते हैं। लेकिन कीचड़ और आँसू साफ करने के बाद भी बार-बार आता है, तो यह संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। जिसकी वजह से तनाव, सूजन और आंखों में लालिमा भी दिख सकती है।

यदि आपका बच्चा पहले ठीक था या उसकी उम्र एक साल या चार पांच साल का है और इस बीच उसकी दोनो आंखों से पानी आने लगा है, लेकिन आंखों में सूजन, गड़न चुभन और लालिमा जैसी कोई अन्य चिन्ताजनक लक्षण नही है केवल आँसू आता है या धूल डस्ट के चले जाने से ऐसा हो रहा है, तो यह आपकी देखभाल से आपके बच्चे की आँसू आने वाली समस्या ठीक हो सकती है।

लेकिन अगर आंख अत्यादिख लाल हो, गड़न-चुभन और खुजली जैसी समस्या होने के कारण बच्चा बार-बार आंख मलता है, तो यह आई फ़्लू, एलर्जी या (Blepharitis) जैसी चिन्ताजनक समस्या का संकेत हो सकता है।

बच्चों की आंखों से पानी आने का घरेलू उपचार

यदि आपके शिशु या बच्चे की आंखों से पानी आता है या फिर आंख में धूल डस्ट चला गया है और इसकी वजह से आँसू, कीचड़ या हल्की फुल्की लालिमा दिखे तो ऐसे में आप आसान और सुरछित घरेलू उपाय से अपने बच्चे की आंख को राहत दे सकते हैं:

नवजात शिशु की आंखों से पानी आने का घरेलु उपचार

1. आंखों की साफ-सफाई का ध्यान रखें

जन्म के बाद शिशु की आंखों के से पानी और कीचड़ आना सामान्य है, लेकिन सबसे पहले साफ सफाई पर ध्यान दें। यदि बच्चे की आंख के कोनों में कीचड़ या चिपचिपे पदार्थ दिखे तो उसको हल्के हाथों से साफ कपडे या टिसु से धीरे-धीरे साफ कर दें और प्रत्येक आंख के लिए अलग कपडे या टिसु का ही उपयोग करें, इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है।

यदि बच्चे की आंख में धूल डस्ट या कोई अन्य कण गया हो तो उस आंख को पानी से धोयें ऐसा करने से आंख साफ हो जायेगी और संक्रमण खतरा भी कम रहेगा।

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2. बच्चे को आंखें रगड़ने से रोकें

आंखों में पानी आने, खुजली या जलन होने पर बच्चा बार-बार आंख मल सकता है। यदि आपका शिशु या बच्चा बार-बार आंख मलता है, तो याद रखें आंख मलने से आंख अत्यधिक लाल हो सकती है और समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में अपने शिशु व बच्चे के हाथ साफ रखें नाखून समय-समय पर काटते रहें और आंखों पर हाथ न लगाने दें।

3. आंखों के आसपास की त्वचा को साफ और सूखा रखें

आंखों से अत्यधिक आँसू आने के कारण आस पास की त्वचा बहुत नरम हो जाती है ऐसे में उसे टिसु या रूमाल से साफ करते रहें। लेकिन बार-बार उस रुमाल से साफ न करें, क्योंकि गंदे रूमाल या कपड़े का उपयोग करने से समस्या बढ़ सकती है।

4. तौलिया और रूमाल साझा न करें

बच्चे के लिए अलग साफ तौलिया, रूमाल और आंख साफ करने वाला कपड़ा रखें और इसे दूसरे बच्चे या अपने लिए इस्तेमाल न करें खासकर अगर घर में किसी दूसरे शिशु या बच्चे की आंखों में आई फ़्लू जैसा संक्रमण हो, तो उसकी चीजें बच्चे के साथ साझा न करें।

5. धूल और धुएं से आंखों को बचाएं

आपका बच्चा घर से बाहर खेलने कूदने जाता है, तो धूल, धुआं, तेज हवा और अन्य आंखों को परेशान करने वाले पदार्थों के संपर्क में न आने दें। यदि बच्चा अभी बहुत छोटा है और ऐसे में घर से बाहर जाते या आते समय जरूरत के अनुसार बच्चे की आंखों को सुरक्षित रखें।

6. बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप न डालें

बहुत से माता-पिता सुने सुनाये उल्टा सीधा घरेलू उपचार व मेडिकल स्टोर से स्वयं आई ड्रॉप खरीदकर डालना शुरू कर देते हैं। लेकिन बिना आंखों की जाँच के और बिना डॉक्टर की सलाह के आंखों में दवा डालना खासकर शिशु व बच्चों की आंखों में आपके बच्चे की आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है।

खासकर अपनी मर्जी से कोई भी आई ड्रॉप ना यूज़ करें फिर चाहे ल्युब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स हो, एंटीबायोटिक ड्रॉप हो या स्टेरॉयड इन सबका अपनी मर्जी से न इस्तेमाल करें।

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घरेलू देखभाल के बजाय डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपके न्यूबोर्न बेबी की आंखों से पानी आता है और कई दिनों से यह समस्या बनी है, तो ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना ज्यादा उचित है। हालांकि अगर यही समस्या आपके बच्चे की आंखों में धूल डस्ट चले जाने कारण हो रही है या फिर आपकी देखभाल से बच्चे को आराम न मिले समस्या बढ़ती जाए तो ऐसी स्थिति में या निचे दिये गए निम्नलिखित लक्षण में से कोई भी अन्य चिन्ताजनक लक्षण दिखे तो अपने नज़दीकी आंखों के डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें:

बच्चों की उम्र के अनुसार आंखों की जाँच का वैज्ञानिक शेड्यूल

  • नवजात शिशु की आंख से पानी या कीचड़ कई दिनों से आ रहा हो।
  • आंख बहुत ज्यादा लाल हो जाए।
  • बच्चा आंख खोलने में परेशानी महसूस करे या बार-बार आंख मलता हो।
  • रोशनी या उजाले वाली जगह पर बच्चा परेशान हो।
  • आंख में सूजन दिखाई दे।
  • आंख में चोट लगी हो या कोई कण जाने के बाद परेशानी बनी रहे।
  • बच्चे की नजर या देखने के तरीके में बदलाव दिखाई दे।

नवजात शिशु या दौड़ने कूदने वाले बच्चे इनकी आंखों से पानी आना आंसू की नली बंद होना, एलर्जी, कंजंक्टिवाइटिस, कॉर्निया में खरोंच या अन्य आंखों की समस्या भी इसका कारण हो सकती है। इसलिए बार-बार या लगातार समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाना और सही कारण की जांच कराना जरूरी है।

डॉक्टर बच्चों की आंखों से पानी आने की जांच कैसे करते हैं?

बच्चे की आंखों से पानी आने की समस्या की जाँच कैसे की जाती है और क्या-क्या जाँच हो सकती है, ये आपका नेत्र विशेषज्ञ शिशु की आंख से पानी आने के कारण को पता करने के लिए जरूरत के अनुसार निम्न परीक्षण कर सकते हैं।

  • आंखों की सामान्य जांच: सबसे पहले आपका डॉक्टर आंखों की लालिमा, सूजन, पानी या कीचड़ आने, आंख की सतह और बच्चे की आंखों की सामान्य स्थिति की जांच करते हैं।
  • Tear Duct की जांच: यदि आंसू की नली बंद होने का संदेह हो, तो ऐसे में आपका डॉक्टर यह जांच कर सकते हैं कि Tear Duct (आंसू की नली) खुली है या उसमें रुकावट है।
  • Retinoscope और Ophthalmoscope से जाँच: यह जाँच खासकर न्यूबोर्न बेबी हो गया और दो से तीन साल के अधिक उम्र के बच्चों में अपवर्तक दोष को पता करने के लिए Retinoscope से जाँच कर सकते हैं और रेटीना की जाँच के लिए Ophthalmoscope
  • Slit Lamp से जाँच: अगर आपका बच्चा तीन चार साल का है या उससे अधिक उम्र का है, तो ऐसे में आपका डॉक्टर जरूरत पड़ने पर Slit Lamp जैसे विशेष उपकरण से आंखों की जाँच कर सकते हैं।
  • Fluorescein Strip Test: कुछ मामलों में खासकर धूल डस्ट चले जाने पर और चोट लगने पर आपका डॉक्टर आंख में Fluorescein Strip डालकर देख सकते हैं कि कहीं कॉर्निया पर चोट की वजह से तो यह समस्या नही हो रही है।
  • आंखों का दबाव IOP की जाँच: गिने चुने शिशु व बच्चों में देखी जाने वाली बीमारी जन्मजात ग्लूकोमा हो, जन्मजात मोतियाबिंद ऐसे में डॉक्टर आंखों के दबाव की भी जाँच कर सकते हैं। हालांकि आंखों में चोट लगने जैसी समस्या होने पर और समस्या के अनुसार ऐसे में भी (IOP) की जाँच कर सकते हैं।

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बच्चों की आंखों से पानी आने का मेडिकल उपचार

मेडिकल उपचार हो या सर्जिकल उपचार और फिर चाहे शिशु हो या बड़े बुजुर्ग की आंखों से सम्बंधित कोई बीमारी उसके मेडिकल उपचार से पहले जाँच और और बीमारी का सही निदान होने के बाद ही डॉक्टर उपचार शुरू करते हैं।

रही बात न्यूबोर्न शिशु या एक दो साल के बच्चे की आंख से पानी आने के उपचार की तो, उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस कारण से हो रही है, क्योंकि हर बच्चे को एक जैसा मेडिकल उपचार देने की आवश्यकता नहीं होती।

  • केवल निगरानी और नियमित देखभाल: डॉक्टर द्वारा जाँच पूरी होने पर यदि आपके नवजात शिशु में आंसू की नली बंद होना और गंभीर संक्रमण के लक्षण नहीं दीखते हैं, तो ऐसे कई मामलों में डॉक्टर केवल नियमित साफ सफाई, देखभाल और निगरानी की सलाह दे सकते हैं। जो माता की देख रेख में यह समस्या समय के साथ अपने आप ठीक हो सकती है।
  • Tear Duct Massage: कुछ बच्चों में आंसू की नली पूरी तरह खूली न होने कारण आँसू आने वाली समस्या में मसाज की सलह दे सकते हैं, जिसे (Crigler Massage) कहा जाता है। जो सही तरीके से की गई मालिश आंसू की नली को खुलने में मदद करती है। इसलिए छोटे बच्चों में अधिकतर डॉक्टर इसकी जरूरत पड़ने पर सलाह देते हैं। हालांकि इसे डॉक्टर द्वारा बताई गई विधि के अनुसार ही करना चाहिए।
  • Antibiotic Eye Drops या Ointment: यदि आंखों में संक्रमण हो गया या आंखों में चोट की वजह से पानी आता है, तो ऐसे में डॉक्टर जरूरत के अनुसार Antibiotic Eye Drops या आइंटमेंट लिख सकते हैं। लेकिन यह याद रखें बच्चे की आंखों में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप का इस्तेमाल नही करना चाहिए।
  • एलर्जी होने पर: अगर आपके बच्चे की आंखों से पानी आने का कारण एलर्जी जैसी समस्या के नाते हो रहा है, तो इस स्थिति में बच्चे को एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूर रखना, आंखों की उचित सफाई और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई Anti Allergy Eye Drops मदद कर सकती हैं।
  • Tear Duct Probing: यदि आंसू की नली लंबे समय तक बंद रहती है और समस्या मसाज के जरिये व देख रेख अपने आप ठीक नहीं होती, तो कुछ बच्चों में नेत्र विशेषज्ञ Nasolacrimal Duct Probing की सलाह दे सकते हैं। हालांकि यह बच्चे की उम्र, लक्षण और आंसू की नली की स्थिति के आधार पर की जाती है।
  • Silicone Tube: यदि प्रोबिंग से पर्याप्त लाभ न मिले या आंसू की नली दोबारा बंद हो जाए, तो कुछ बच्चों में Silicone Tube Intubation जैसे उपचारों की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि इनका निर्णय बच्चे की स्थिति के अनुसार ही डॉक्टर करते हैं।
  • सर्जिकल उपचार: बच्चों की आंखों का सर्जिकल उपचार गिने चुने बच्चों में ही देखा जाता है। खासकर जब अन्य उपचारों से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता है, तो ऐसे में डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

Tear Duct Massage (Crigler Massage) कैसे करें?

  • सबसे पहले अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
  • बच्चे की आंख और आंख के आसपास का हिस्सा साफ रखें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई तकनीक के अनुसार आंख के अंदरूनी कोने, यानी नाक के पास आंख की जड़ में आँसू जाने वाले रास्ते के ऊपर हल्के दबाव के साथ मालिश कर सकते हैं।
  • मालिश कितनी बार और कितने दिनों तक करनी है, यह डॉक्टर द्वारा बताए अनुसार ही करें।
  • मसाज करते समय आंख पर अत्यधिक दबाव न डालें और अपनी ओर से जोरदार मालिश न करें ये सोच कर की जल्दी ठीक हो जाएगा।

याद रखें अगर मालिश के दौरान बच्चे को तेज दर्द हो, आंख से खून आए, सूजन बढ़े या आंख अधिक लाल हो जाए, तो मालिश रोककर डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या बच्चों की आंखों से पानी आना अपने आप ठीक हो सकता है?

देखें न्यूबोर्न बेबी की आंखों से पानी आना या कीचड़ आना जन्म के बाद यह समस्या आम है जो देख रेख से ठीक हो जाती है। यदि जन्म के कई दिनों बाद या कई साल बाद यह समस्या होने लगी है, तो ऐसे में यह सोच कर छोड़ देना की ठीक हो जायेगा यह ठीक नही है। या फिर धूल, धुंआ, डस्ट के चले जाने पर और आंखों में चोट लगने पर आँसू आता है तो ऐसे में भी लापरवाही नही करनी चाहिए।

खासकर समस्या लंबे समय से बनी है और संक्रमण, सूजन, लालिमा या कोई अन्य गंभीर समस्या के के लक्षण दिखाई देने पर यह समस्या अपने आप ठीक नही हो सकती है और ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना जरुरी है।

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बच्चों की आंखों से पानी आने पर क्या नही करना चाहिए?

बच्चों की आंखों से आँसू आने पर या धूल डस्ट चले जाने पर और आंखों में चोट लगने पर ये सोच कर छोड़ देना की अपने आप ठीक हो जायेगा या फिर उल्टा सीधा और सुना सनाया उपचार करने की गलती नही करनी चाहिए। दरअसल ये गलतियां स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। खासकर निचे दी गलतियां तो बिल्कुल भी नही करना चाहिए:

  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप न डालें।
  • घरेलू नुस्खों जैसे शहद, गुलाब जल, नींबू का रस, दूध या किसी भी अन्य पदार्थ को आंखों में न डालें।
  • गंदे कपड़े या रूमाल से आंख साफ न करें।बच्चे को बार-बार आंखें मलने न दें।
  • किसी दूसरे व्यक्ति की और घर पर रखी कोई भी आई ड्रॉप का उपयोग न करें।
  • यदि समस्या कई दिनों से है या सूजन, लालिमा कीचड़ और आँसू की समस्या बढ़ रही हो, तो इलाज में देरी न करें।

यदि इलाज न कराया जाए तो क्या हो सकता है?

आंखों से पानी आने वाली समस्या अगर शिशु या बच्चे की आंखों में कई दिनों से है। अगर चोट या धूल डस्ट के चले जाने से यह समस्या कई दिनों से बनी है, तो ऐसे में डॉक्टर को न दिखाना और उपचार न करवाना आपके बच्चे की आंख की दृष्टि पर प्रभाव डाल सकती है। यदि समस्या खुद की देखभाल से ठीक न हो या फिर एक दो दिनों से ज्यादा समय से है। इसका उपचार और डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या बच्चों की आंखों से पानी आना एलर्जी के कारण भी हो सकता है?

हाँ। आंखों से पानी आने के साथ खुजली, लालिमा और बार-बार आंखें मलने जैसे अन्य लक्षण हो तो एलर्जी एक संभावित कारण हो सकता है। लेकिन सही कारण पता करने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना उचित है।

क्या बच्चे की आंखों से पानी आना या कीचड़ आना संक्रमण का संकेत है?

ऐसा हर बच्चे में नही होता हमेशा लेकिन अगर आँसू, कीचड़ पीला या हरा हो, बार-बार आए और आंख लाल या सूजी हुई हो, तो संक्रमण की संभावना हो सकती है।

नवजात शिशु की एक आंख से पानी क्यों आता है?

नवजात शिशु की केवल एक आंख से पानी आने का सबसे आम कारण Tear Duct Blockage (आंसू की नली का पूरी तरह न खुला होना) हो सकता है। इसमें आंख से लगातार या बार-बार पानी आ सकता है और कभी-कभी आंख के कोने में हल्का कीचड़ भी जमा हो सकता है।

नवजात शिशु की आंख से पानी और कीचड़ दोनों क्यों आते हैं?

आंसू की नली बंद होने पर आंसू ठीक से बाहर नहीं निकल पाते, जिससे आंख के कोने में पानी और चिपचिपा पदार्थ जमा हो सकता है। हालांकि, संक्रमण में भी पानी और कीचड़ आ सकता है, इसलिए अन्य लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

क्या बच्चे की आंख से पानी आना सर्दी-जुकाम के कारण हो सकता है?

हां, सर्दी-जुकाम के दौरान आंखों से पानी आ सकता है, खासकर यदि नाक बंद हो या आंखों में जलन हो। लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहती है या केवल एक आंख में बार-बार होती है, तो अन्य कारणों की जांच जरूरी हो सकती है।

संदर्भ:

American Academy of Ophthalmology (AAO) बच्चों की आंखों से पानी आना। Ophthalmia Neonatorum और जन्मजात बीमारियां।

Dr. Agrwal Eye Hospital: बाल नेत्र देखभाल

All Indian Ophthalmological Society Neonatal conjunctivitis और Blocked tear duct in babies