चश्मे का नंबर बढना एक चिन्ताजनक विषय है, परन्तु इसे प्राकृतिक रूप से पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन उचित देखभाल से नियंत्रित किया जा सकता है। जबकी अच्छी जीवनशैली, स्वस्थ आदतों, सही देखभाल और नेत्र विशेषज्ञ से नियमित परामर्श से हम निश्चित रूप से अपनी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। यदि आपका चश्मे का नंबर बढ़ रहा है या आपको किसी भी प्रकार की आंखों की समस्या हो रही है, तो आप अपने नजदीकी नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
चश्मे का नंबर कैसे कम करें
चश्मे का नंबर कैसे कम करें यह सवाल बहुत से लोगों के मन में होता है। खासकर जब चश्मे का नंबर लगातार बढ़ रहा हो या चश्मे की ज़रूरत पड़ने लगी हो, तो ऐसे में लोग डाइट, आंखों की एक्सरसाइज, घरेलू उपाय और बिना चश्मे के रहने जैसे तरीकों के बारे में जानना चाहते हैं।
मैं एक दृष्टि विशेषज्ञ होने के नाते बताना चाहता हूँ, की यदि आपको मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) या एस्टीग्मैटिज्म (दृष्टिवैषम्य) जैसी समस्या के कारण चश्मे का नंबर लग रहा है, तो केवल गाजर खाने, आंखों की एक्सरसाइज करने या घरेलू उपायों से चश्मे का नंबर स्थायी रूप से खतम नहीं किया जा सकता है। लेकिन अच्छी जीवनशैली, पर्याप्त पोषण, स्क्रीन इस्तेमाल की सही आदतें और नियमित आंखों की जांच आंखों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
हालांकि बच्चों और किशोरों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), एस्टीग्मैटिज्म (दृष्टिवैषम्य) जैसी समस्या होने पर चश्मे के नंबर की बढ़ने की गति को कम करने के लिए कुछ विशेष दवा, लेंस और उपाय भी उपलब्ध हैं। जबकि आज के समय LASIK सर्जरी भी चश्मे से छुटकारा दिलाने के लिए बहुत प्रचलित है, लेकिन इसके लिए सही उम्र और चश्मे का नंबर स्थिर होने जैसे कई प्रमुख चीज का फिट होना ज़रूरी होता है।
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क्या प्राकृतिक तरीके से चश्मे का नंबर कम हो सकता है?
सबसे पहले यह जान लें की चश्मे का नंबर आंखों की संरचना और प्रकाश को रेटिना पर फोकस करने की क्षमता से जुड़ा होता है। उदाहरण के लिए, आंख की लंबाई या कॉर्निया और लेंस की ऑप्टिकल पावर के कारण दूर की वस्तु या पास की वस्तु की तस्वीर रेटिना के आगे या पीछे जब फोकस करती है, तो वस्तु स्पष्ट नही दिखती है। ऐसी स्थिति में स्पष्ट देखने के लिए कॉन्टेक्ट लेंस या चश्मे की जरुरत पड़ने लगती है। परन्तु केवल आई एक्सरसाइज या किसी खास भोजन से आंख की संरचना को इस तरह बदलना संभव नहीं है कि चश्मे का नंबर स्थायी रूप से खत्म हो जाए।
हालांकि अक्सर यह देखा जाता है, की बच्चों और किशोरों में कभी-कभी चश्मे के नंबर में थोड़ा बदलाव हो ही जाता है। जिसका मुख्य कारण उम्र बढ़ना, जीवनशैली, आंखों की जांच में अंतर, परिस्थितियों और कई अन्य समस्या इसका कारण बन ही जाती है। इसलिए नंबर में बदलाव होने पर दोबारा आंखों की जांच कराना और बिना कोई बदलाव के बाद भी एक साल में एक मर्तबा आंखों की जांच कराना अच्छा और फायदे मंद साबित होता है।
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चश्मे का नंबर क्या होता है?
चश्मे के नंबर की जरूरत कई प्रकार के अपवर्तक त्रुटि के कारण दूर और नजदीक की नजर के लिए होती है। क्योंकि जब प्रकाश रेटिना के आगे या पीछे फोकस होने लगता है, तो वस्तु स्पष्ट नही दिखती है। निचे आसानी के लिए निम्नलिखित अपवर्तक त्रुटि के बारे में बताया गया है, जिसे आप पढ़ व समझ सकते हैं:
Myopia (निकट दृष्टि दोष)
मायोपिया जिसे (निकट दृष्टि दोष) भी कहा जाता है, इसकी वजह से व्यक्ति को दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं, लेकिन पास की वस्तुएं अपेक्षाकृत साफ दिखाई देती है और यह आज के समय एक बढ़ती समस्या है। हालांकि बच्चों और किशोरों में मायोपिया का नंबर बढ़ और घट भी सकता है। इसलिए इस उम्र में नियमित आंखों की जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Hypermetropia (दूर दृष्टि दोष)
हाइपरमेट्रोपिया होने पर पास की वस्तुओं को देखने में परेशानी होना, आंखों में खिंचाव, थकान और सिरदर्द जैसी समस्या होने लगती है। इस स्थिति में प्रकाश की किरणें रेटिना के पीछे केंद्रित होने लगती हैं। जबकि यह समस्या जन्म से भी हो सकती है और बचपन या किसी भी उम्र में सामने आ सकती है। परन्तु कुछ लोगों में लक्षण उम्र और आंखों की फोकस करने की छमता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
Astigmatism (दृष्टिवैषम्य)
जब आंख की कॉर्निया या लेंस पूरी तरह गोल होने के बजाय अंडाकार या अनियमित आकार का हो जाती है, तब यह समस्या होती है। इसकी वजह से आंख में प्रवेश करने वाली रोशनी रेटिना पर ठीक से केंद्रित नहीं हो पाती है, जिससे चीजें धुंधली या विकृत दिखाई देती हैं। इसे आम भाषा में लोग सिलेंडर नंबर भी कहते हैं।
Presbyopia (जरादूरदृष्टि)
उम्र बढ़ने के साथ आंखों की बारीकी चीज पर फोकस करने की छमता कम होना आम बात है, खासकर 38/40 साल की उम्र के बाद, जिसकी वजह से बारीकी काम करने में दिक्कत होना और आंखों को ज्यादा फोकस करना पड़ता है। जिसे प्रेसबायोपिया (जरादूरदृष्टि) कहा जाता है। दरअसल उम्र बढ़ने के साथ आँख के प्राकृतिक लेंस का लचीलापन कम हो जाता है।
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चश्मे का नंबर लगातार बढने के मुख्य कारण क्या होते हैं?
चश्मे का नंबर बढ़ने के कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। परन्तु निम्नलिखित कारण इसकी मुख्य वजह बन सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:
- लगातार आंखों पर तनाव: कुछ चीजें जैसे बहुत अधिक पढ़ना या लिखना और स्क्रीन को बहुत करीब से देखना आंखों पर तनाव पैदा कर सकता है। ऐसे में जब आंखें लंबे समय तक एक निश्चित दूरी पर केंद्रित रहती हैं तो आंखों की कई अन्य समस्याएं और चश्मे के नंबर बढ़ने का खतरा बढ़ जाता हैं।
- स्क्रीन का अधिक उपयोग: इस आधुनिक जीवन व डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है। जिसकी वजह से डिजिटल आई स्ट्रैन जैसी समस्या होने लगती है। जबकी स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी और स्क्रीन पर फोकस बनाये रखने के कारण आंखों पर दबाव पड़ने का खतरा और आंखों की कार्यक्षमता कम होने का खतरा बना रहेता है। इस कारण भी आंखों का नंबर बढ सकता है।
- उम्र के साथ बदलाव: आज के समय 38/40 साल उम्र के बाद अधिकतर लोगों में प्रेस्बायोपिया के लक्षण दीखने लगते हैं। हालांकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें आंख के लेंस की फ्लेक्सिबिलिटी कम होने लगती है और बारीकी वस्तु पर फोकस करने में दिक्कत होने लगती है, जैसे की पढ़ने लिखने में बहुत फोकस करना पड़ता है।
- अनुचित चश्मे का प्रयोग करने से: कभी-कभी जो लोग चश्मा पहनते हैं, ऐसे में गलत नंबर के चश्मे पहनने के कारण या अन्य ऑप्टिकल समस्याओं के कारण बढ़ सकता है। इसलिए सही चश्मा चुनने के लिए हमेशा किसी नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें और यह भी सुनिश्चित करें कि चश्मा बनने के बाद आपको वही नंबर मिला है जो आपके चश्मे व आंखों का एक्चुअल नंबर है।
- गलत जीवनशैली और खान पान: आज के इस भागदौड़ वाले युग में कुछ लोग अपने स्वास्थ्य पर ठीक से ध्यान नहीं देते, इसलिए उन्हें शारीरिक परेशानियां भी होने लगती हैं। यदि आप गलत आहार लेते हैं और अपनी आंखों के लिए आवश्यक विटामिनों को अपने आहार में शामिल नहीं करते हैं, तो नंबर आगे पीछे होने के साथ आंखों में कई अन्य समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं।
क्या आई एक्सरसाइज से चश्मे का नंबर कम हो सकता है?
सामान्य अपवर्तक त्रुटि को आई एक्सरसाइज से स्थायी रूप से खत्म करने का कोई प्रमाण नहीं है। परन्तु, लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या अन्य डिजिटल स्क्रीन पर काम करने से व देखने से होने वाली आंखों की थकान, तनाव और असहजता को कम करने के लिए कुछ आदतें मदद कर सकती हैं।
- 20-20-20 नियम: स्क्रीन पर लगातार काम करते समय हर 20 मिनट में लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखें ये आदत आंखों को आराम देने में मदद कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें कि यह नियम चश्मे का नंबर कम करने का इलाज नहीं है।
- पलकें झपकाना: स्क्रीन देखते समय पलक झपकाने की दर कम हो जाती है, ऐसे में ड्राई आई होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए निमित रूप से पलक झपकाना आंखों के तनाव और आंखों में सूखापन को कम करती है, लेकिन चश्मे का नंबर नही।
- आंखों को आराम दें: लगातार किसी वस्तु पर फोकस बनाय रखने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना आंखों के आराम के लिए बेहतर है।
चश्मे का नंबर कम करने के लिए क्या खाएं?
कोई ऐसा भोजन नहीं है जो सामान्य मायोपिया, प्रेस्बायोपिया और एस्टीग्मैटिज्म जैसी समस्या का एकदम ठीक कर दे। लेकिन संतुलित आहार आंखों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, इसलिए निम्नलिखित आहार को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें, लेकिन याद रखें इससे चश्मे का नंबर अपने आप खत्म नहीं होता।
- विटामिन A: विटामिन A आंखों के सामान्य स्वास्थ्य और सामान्य दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके स्रोतों में शामिल हैं, गाजर शकरकंद, पालक और अन्य हरी सब्जियां, पपीता, आम, अंडा और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ।
- ल्यूटिन और जेक्सैंथिन: हरी पत्तेदार सब्जियां ल्यूटिन और जेक्सैंथिन के स्रोत से भरी होतीं हैं, जो आंखों के लिए बहुत फायदे मंद साबित होतीं हैं।
- विटामिन C और E: फल, सब्जियां, मेवे और बीज विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व प्रदान करते हैं, इसे अपने संतुलित आहार का हिस्सा अवश्य बनाय।
- ओमेगा-3 फैटी एसिड: मछली, अखरोट, अलसी और चिया बीज ओमेगा-3 के स्रोत होते हैं। जो सामान्य स्वास्थ्य और आंखों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
बच्चों में चश्मे का नंबर बढ़ने के मुख्य कारण क्या है?
- जेनेटिक्स: यदि माता पिता में से किसी एक को मायोपिया या एस्टीग्मैटिज्म है, तो बच्चे में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि दोनों को चश्मा लगा है, तो यह जोखिम और भी ज्यादा हो जाता है।
- जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम: आजकल बच्चे अपना ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर या वीडियो गेम स्क्रीन के सामने बिताते हैं। यही स्क्रीन देखने की आदत से आंखों की मांसपेशियों पर भारी दबाव पड़ने लगता है, जो आंखों की फोकस करने की छमता को भी कम कर देती है और डिजिटल आई स्ट्रेन होने के खतरे को भी बढ़ा देती है।
- धूप और बाहरी खेलों की कमी: मेडिकल रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि प्राकृतिक रोशनी आंखों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन आज के समय अधिकतर बच्चों का बाहर खेलना कम हो गया है, खासकर शहर के बच्चों में और यही समस्या आंखों के फोकस करने की छमता को घटा देती है।
- पास का काम ज्यादा करना: लगातार बिना ब्रेक लिए पढ़ना, ड्रॉइंग करना या कोई भी ऐसा काम जिसमें आंखें एक ही जगह पर लंबे समय तक फोकस करती रहती हैं, वह मायोपिया को बढ़ावा देती है।
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बच्चों में चश्मे का नंबर बढ़ने से कैसे रोकें?
बच्चों में मायोपिया और दृष्टिवैषम्य जैसी समस्या होने के कारण चश्मे का नंबर बढ़ना एक महत्वपूर्ण और आम समस्या बन चुकी है। परन्तु ऐसी स्थिति में केवल चश्मा हटाने के घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय नियमित आंखों की जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
- बच्चों के लिए कुछ उपयोगी आदतें: रोजाना पर्याप्त समय बाहर प्राकृतिक रोशनी में बिताना, किताब या स्क्रीन को आंखों के बहुत पास न रखना, पढ़ते पर्याप्त रोशनी में पढ़ना लिखना, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचना, नियमित आई एग्जामिनेशन कराना, परन्तु अगर बच्चे का नंबर लगातार बढ़ रहा है, तो अपने डॉक्टर से मायोपिया और दृष्टिवैषम्य मैनेजमेंट के विकल्पों के बारे में भी पूछें।
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क्या चश्मा पहनने और न पहनने से नंबर बढ़ता है?
सही नंबर का चश्मा पहनने से आंखें कमजोर नहीं होतीं, लेकिन चश्मे पहनने से दृष्टि बनी रहेती है और आंखों पर जोर नही पड़ता है, रही चश्मे के नंबर बढ़ने की बात तो उम्र के कारण होने वाली प्रेस्बायोपिया जैसी समस्या में चश्मे का नंबर बढ़ता है, उम्र के अनुसार। जबकी बच्चों में मायोपिया और दृष्टिवैषम्य होने पर सही देख रेख न होने पर नंबर बढ़ सकता है। दरअसल पावर वाले चश्मे आंखों को सही फोकस करने में मदद करते है और स्पष्ट दिखाई देने में सहायता करते है। लेकिन चश्मा न पहनने पर आंखों को ज्यादा फोकस करना पड़ता है और स्पष्ट दिखाई भी नही देता ऐसी स्थिति में आंखों को ज्यादा फोकस करना पड़ता हैं।
आंखों के चश्मे का नंबर बढ़ने से रोकने के उपाय
- आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए: आंखें हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण इंद्रिय हैं। हर छह से बारह महीने में आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए। यदि आप नियमित रूप से आंखों की जांच कराते हैं, तो दृष्टि में बदलाव का पता चल जाता है और समय के साथ इसे रोका भी जा सकता है।
- Computer Glasses: जो लोग स्क्रीन के सामने बहुत अधिक समय बिताते हैं या स्क्रीन का बहुत अधिक उपयोग करते हैं, उन्हें आंखों पर तनाव से बचने के लिए कंप्यूटर ग्लासेस का उपयोग करना चाहिए।
- नजदीकी काम करते समय आराम: जो लोग लंबे समय तक लगातार पढ़ने या लिखने वाला काम करते हैं, उन्हें और बहुत करीब से पढ़ने या लिखने से बचना चाहिए, लेकिन रोशनी में पढ़ें या लिखें।
- 20-20-20 नियम का पालन करें: इस नियम के मुताबिक, 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 सेकंद के लिए 20 फीट दूर देखने से आंखों को आराम मिलता है।
- उचित आहार लें: विभिन्न पोषक तत्वों से भरपूर आहार विटामिन A, C, E जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड अपने भोजन में शामिल करना चाहिए, ये तत्व आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं।
- चश्मे का चुनाव अच्छा हो: चश्मे और लेंस का चुनाव सही होना चाहिए। क्योंकि अच्छी तरह से फिट न होने वाले चश्मे व उलटे सीधे नंबर आंखों पर अधिक दबाव डाल सकते हैं। इसलिए ऐसे चश्मे चुनें जो आपकी आंखों के लिए उपयुक्त हों।
मेडिकल विकल्प
यदि आप चश्मे से स्थायी रूप से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो डॉक्टर की सलाह से लेसिक LASIK (लेजर सर्जरी) का विकल्प चुन सकते हैं। जबकी बच्चों में आई ड्राप और लेंस कुछ हद तक चश्मे का नंबर अस्थाई रख सकते हैं।
क्या LASIK से चश्मे का नंबर खत्म हो सकता है?
कुछ उपयुक्त वयस्कों में LASIK, PRK और अन्य प्रकार की लेजर सर्जरी से चश्मे की निर्भरता काफी कम हो सकती है। लेकिन LASIK हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती, क्योंकि इसके लिए कॉर्निया की स्थिति, आंखों का स्वास्थ्य, नंबर की स्थिरता और अन्य फैक्टर्स की जांच की जाती है। जबकी सर्जरी के बाद भी कुछ लोगों को भविष्य में चश्मे की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए केवल चश्मा हटाने के लिए स्वयं निर्णय लेने के बजाय अपने डॉक्टर से सम्पूर्ण जानकारी के मुताबिक फैसला लेना ज्यादा उचित है।
यह लेख भी पढ़ें: LASIK सर्जरी के बारे में सभी प्रमुख बातें।
कब आंखों की जांच करानी चाहिए?
अगर चश्मे का नंबर अचानक बदल गया है या इनमें से कोई समस्या है, तो आंखों की जांच कराएं:
- अचानक धुंधला दिखाई देना
- एक आंख से कम दिखाई देना
- बार-बार सिरदर्द या आंखों में परेशानी
- चश्मे के बावजूद साफ न दिखाई देना
- आंखों में लगातार दर्द या लालिमा
- रोशनी की चमक दिखाई देना
- अचानक बहुत सारे floaters दिखाई देना
- नजर के सामने पर्दे या छाया जैसा दिखाई देना
- अचानक दृष्टि कम होना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या चश्मा न पहनने से नंबर बढ़ जाता है?
पावर वाले चश्मे न पहनने से नंबर अपने आप नहीं बढ़ता। लेकिन यदि आपको साफ देखने के लिए चश्मे की जरूरत है, तो उसे न पहनने पर धुंधला दिखाई देना, आंखों में तनाव और सिरदर्द जैसी परेशानी हो सकती है।
क्या ज्यादा मोबाइल चलाने से चश्मे का नंबर बढ़ता है?
लंबे समय तक नजदीकी काम करना और खासकर स्क्रीन का इस्तेमाल आंखों की थकान, सूखापन और असहजता से जुड़ी समस्या का कारण बन सकता है। जबकी बच्चों में लंबे समय तक नियर वर्क और कम आउटडोर टाइम मायोपिया से जुड़े कारकों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए स्क्रीन के दौरान ब्रेक और पर्याप्त आउटडोर एक्टिविटी की आदत उपयोगी मानी जाती है।
चश्मे का नंबर कितने समय में दोबारा चेक कराना चाहिए?
आंखों की जांच की जरूरत उम्र, मौजूदा अपवर्तक त्रुटि और आंखों की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि धुंधला दिखाई देने लगे, सिरदर्द हो, चश्मे से साफ न दिखे या नंबर बदलने की आशंका महसूस हो, तो निर्धारित समय का इंतजार किए बिना आंखों की जांच करवा लेना चाहिए।
क्या योग करने से चश्मे का नंबर कम हो सकता है?
योग और सामान्य शारीरिक गतिविधि शरीर और आंखों के लिए फायदेमंद है, लेकिन निकट दृष्टि दोष, दृष्टिवैषम्य और जरादूरदृष्टि जैसी अपवर्तक त्रुटि को केवल योग से स्थायी रूप से खत्म करने का कोई पर्याप्त प्रमाण नहीं है।
क्या आंखों का नंबर कम करने वाली दवा मिलती है?
सामान्य अपवर्तक त्रुटि को केवल किसी सामान्य टैबलेट या आई ड्राप से स्थायी रूप से खत्म करने का कोई स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट नहीं है। जबकी बच्चों में मयोपिया प्रोग्रेशन को धीमा करने के लिए कुछ ट्रीटमेंट्स , जैसे atropine ओ भी कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर की निगरानी में इस्तेमाल किए जाते हैं।
स्रोत और संदर्भ
National Institutes of Health – चश्मे के नंबर अपवर्तक त्रुटि प्रकार और उनकी प्रमुख बातें।
Docter Eye Institute – चश्मे का नंबर बढ़ने का कारण और उनके उपाय।
American Association for Pediatric Ophthalmology & Strabismus – बच्चों में निकट दृष्टि दोष, रोकथाम और उपचार।
Medical News Today – आंखों के लिए सबसे अच्छे व्यायाम।
Optometrist Network – क्या चश्मा पहनने और न पहनने से आंखें कमजोर हो जाती हैं।

