Dry Eye Syndrome क्या होता है: इसके प्रकार, कारण, लक्षण, इलाज और रोकथाम कैसे करें

ड्राई आई सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंखें पर्याप्त मात्रा में या गुणवत्तापूर्ण आंसू नहीं बना पातीं। इससे आंख की सतह सूखी, जलनयुक्त और असुरक्षित हो जाती है। जिसकी वजह से आखों में सूखापन, चुभन, लालिमा, थकान और धुंधला दिखने जैसी समस्या होने लगती हैं। ऐसे में इसके उपचार के लिए लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स (कृत्रिम आंसू), गरम सेकाई, जीवनशैली में बदलाव और कारण के अनुसार जरुरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा थेरेपी भी शामिल है।

इस लेख में ड्राई आई सिंड्रोम के कारण, लक्षण, प्रकार, जांच, इलाज, आई ड्रॉप्स, बचाव और डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए, इन सभी बातों को जानेंगे।

ड्राई आई सिंड्रोम क्या है?

ड्राई आई सिंड्रोम को आम भाषा में आंखों का सूखापन भी कहा जाता है। जबकी चिकित्सा क्षेत्र में इसे कई संदर्भों में Keratoconjunctivitis Sicca (KCS) भी कहा जाता है। यह तब होता है जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते, आंसू बहुत जल्दी वाष्पित हो जाते हैं या आंसुओं की गुणवत्ता ठीक न होना होता है। हालांकि ड्राई आई सिंड्रोम आज के समय आंखों की एक सामान्य समस्या बन चुकी है, लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आंखों की सतह पर इन्फ्लेमेशन और दृष्टि से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर सकती है।

दरअसल हम लोगों की आंखों की सतह पर आंसुओं की एक बहुत पतली परत होती है, जिसे Tear Film कहा जाता हैं, यह आंखों की सबसे ऊपरी परत को ढकती है, जो तरल पदार्थ की बनी होती है। इसी Tear Film में तीन परतें होती हैं, फैटी ऑइल्स, एक्वस फ्ल्युड और म्युकस, यह संयोजन, आंखों की सतह को चिकना, मुलायम और स्पष्ट बनाए रखती है। लेकिन इन्हीं परतों में से किसी के साथ भी समस्या होन पर ड्राय आईस का कारण बन सकता है।

ड्राई आई सिंड्रोम के विभन्न प्रकार

ड्राई आई सिंड्रोम मुख्य रूप से दो प्रमुख प्रकार होते हैं, एक्वियस-डेफिशिएंट ड्राई आई और इवैपोरेटिव ड्राई आई, लेकिन इन दोनों के अलावा, कुछ अन्य स्थितियाँ भी हैं, जो ड्राई आई के लक्षणों से जुड़ी हो सकती हैं और उन्हें बढ़ा सकती हैं।

एक्वियस-डेफिशिएंट ड्राई आई (Aqueous-Deficient Dry Eye)

एक्वियस-डेफिशिएंट ड्राई आई ऐसी स्थिति है, जिसमें आंखों की आँसू बनाने वाली ग्रंथियाँ पर्याप्त मात्रा में आँसू नहीं बना पाती हैं। इसके कारण आंखों की सतह को नम और चिकना बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। हालांकि एक्वियस-डेफिशिएंट ड्राई आई के कई कारण हो सकते हैं।

जैसे की, सजोग्रेन सिंड्रोम जैसी बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आँसू बनाने वाली ग्रंथियों को प्रभावित कर सकती है। उम्र बढ़ने के साथ आँसू बनने की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन आँसू बनने की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में रेडिएशन उपचार के कारण आँसू बनाने वाली ग्रंथियों को नुकसान पहुँच सकता है।

इवैपोरेटिव ड्राई आई (Evaporative Dry Eye)

इवैपोरेटिव ड्राई आई में आंखों में आँसू बनने के बावजूद वे सामान्य से जल्दी वाष्पित हो जाते हैं। ऐसा मुख्य रूप से आँसुओं की परत की गुणवत्ता या स्थिरता के ठीक न होने के कारण होता है। परन्तु इवैपोरेटिव ड्राई आई के प्रमुख कारण मेइबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन (MGD) पलकों की तेल बनाने वाली ग्रंथियों का ठीक से काम न करना। लंबे समय तक स्क्रीन पर फोकस बनाय रखना और हवा के लगातार संपर्क में रहने से आँसू जल्दी वाष्पित हो सकते हैं। जबकी इस स्थिति को अक्सर मेइबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन से जोड़ा जाता है।

मिक्स्ड ड्राई आई डिजीज (Mixed Dry Eye Disease)

कुछ लोगों में एक्वियस-डेफिशिएंट और इवैपोरेटिव ड्राई आई दोनों प्रकार की समस्याएँ एक साथ मौजूद हो सकती हैं और इस स्थिति को मिक्स्ड ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है। इसकी वजह से आँसू बनाने वाली ग्रंथियाँ पर्याप्त आँसू नहीं बना पातीं और जो आँसू बनते हैं, वे भी सामान्य से जल्दी वाष्पित हो सकते हैं। जबकी इसके संभावित कारण उम्र बढ़ना, मेइबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन, आँसू बनाने वाली ग्रंथियों का ठीक से काम न करना, कुछ ऑटोइम्यून बीमारियाँ, लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल और कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव।

न्यूरोपैथिक ड्राई आई (Neuropathic Dry Eye)

न्यूरोपैथिक ड्राई आई एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंखों में सूखापन, जलन या दर्द जैसे लक्षण तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न हो सकते हैं। जबकी सामान्य ड्राई आई में परेशानी अक्सर आँसुओं की कमी या उनकी परत के जल्दी वाष्पित होने से जुड़ी होती है। लेकिन न्यूरोपैथिक ड्राई आई में आंखों की नसों से मिलने वाले संकेतों और दर्द महसूस करने की प्रक्रिया में भी समस्या हो सकती है, इसके कारण व्यक्ति को तेज जलन, चुभन या दर्द महसूस हो सकता है।

हालांकि न्यूरोपैथिक ड्राई आई के संभावित कारण आंखों में चोट लगना, आंखों की कुछ सर्जरी के बाद नसों में बदलाव, तंत्रिकाओं को प्रभावित करने वाली कुछ बीमारियाँ जैसी अन्य समस्या इसका कारण बन सकती हैं।

न्यूरोट्रॉफिक केराटाइटिस (Neurotrophic Keratitis)

न्यूरोट्रॉफिक केराटाइटिस, जिसे न्यूरोट्रॉफिक केराटोपैथी भी कहा जाता है, यह आंख की पारदर्शी परत कॉर्निया को प्रभावित करने वाली एक दुर्लभ स्थिति है। कॉर्निया में संवेदनशील नसें होती हैं, जो आंख को चोट या बाहरी उत्तेजनाओं का एहसास कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। न्यूरोट्रॉफिक केराटाइटिस के Anil ट्राइजेमिनल नर्व को नुकसान पहुँचना, आंखों या चेहरे पर चोट लगना आंखों की किसी प्रकार की सर्जरी, हर्पीज संक्रमण से संबंधित तंत्रिका क्षति और कुछ ऐसी बीमारियाँ जो नसों को प्रभावित करती हैं, इसका मुख्य कारण बन सकती हैं।

आईएट्रोजेनिक ड्राई आई (Iatrogenic Dry Eye)

आईएट्रोजेनिक ड्राई आई ऐसी स्थिति है, जिसमें किसी दवा, चिकित्सा प्रक्रिया या उपचार के कारण ड्राई आई की समस्या उत्पन्न होती है या पहले से मौजूद समस्या बढ़ जाती है। दरअसल कुछ दवाएँ आँसू बनने की मात्रा को कम कर सकती हैं, जबकि कुछ आंखों की सतह या आँसुओं की परत को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर आंखों की कुछ सर्जरी के बाद अस्थायी या कभी-कभी लंबे समय तक सूखापन महसूस हो सकता है।

ड्राई आई कैसे होता है?

ड्राई आई मुख्य रूप से दो स्थितियों से जुड़ा हो सकता है, आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनना, आंसुओं का बहुत जल्दी वाष्पित होना, इसके अलावा आंसुओं की गुणवत्ता खराब होना होता है। लेकिन Tear Film का जल्दी टूटना और पलकों में मौजूद Meibomian Glands का ठीक से काम न करना भी ड्राई आई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

दरअसल जब हम लोग अपनी पलक झपकाते हैं, तो आंसुओं की परत आंख की सतह पर फैलती है और आंखों को नम बना कर रखती है। लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दौरान पलक झपकाने की दर कम हो जाती है, जिससे आंखों की सतह पर आंसुओं का वाष्पीकरण होने का खतरा बढ़ जाता है और ड्राई आई के लक्षण महसूस होने लगते हैं।

ड्राई आई के प्रमुख कारण

ड्राई आई के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की आपकी आदत, रहन सहन, खान पान, उम्र, वातावरण, कुछ दवाएं, कॉन्टैक्ट लेंस और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।

  • लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर देखना: आज के इस डिजिटल दौर में अधिकतर लोग मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप और टीवी जैसी डिजिटल स्क्रीन पर लंबे समय तक लगे रहते हैं। लेकिन इसी स्क्रीन पर फोकस करते समय व्यक्ति अक्सर कम पलक झपकाता है। दरअसल जब हम लोग पलक झपकाते हैं, तो आंसुओं की परत आँखों की सतह पर फैलती है, लेकिन स्क्रीन पर फोकस होने के कारण कम ब्लीकिंग की वजह से आंसुओं का असर आँखों की सतह पर ज्यादा समय तक नही रहेता। इसकी वजह से आँखों में थकान, भारिपन और आँख सूखी महसूस होने लगती हैं। जबकि यह समस्या खासकर उन लोगों में अधिक देखी जाती है, जो लोग कंप्यूटर, लैपटॉप पर ऑफिस में लंबे समय तक कार्य करते हैं उनमे और स्टूडेंट लोगों में।
  • उम्र बढ़ना: उम्र बढ़ने के साथ-साथ हार्मोनल बदलाव के कारण आँसू कम बनने लगते हैं, जो पुरषों और महिलाओं दोनो को उम्र बढ़ने के साथ ड्राई आई की समस्या हो सकती है। दरअसल जैसे-जैसे हम सब लोगों की उम्र बढ़ती है उसके साथ ही शरीर में कमजोरी दिखने लगती है, इन्हीं सब में शामिल है, बाल का सफ़ेद होना, स्कीन का का चिंगुरना और आँखों में उम्र बढ़ने के साथ आँसू का कम बनना, हालांकि यह समस्या अधिकतर बड़े बुजुर्ग लोगों में ज्यादा देखी जाती है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ और उम्रदराज लोगों में ड्राई आई की संभावना ज्यादा बनी रहेती है।
  • कॉन्टैक्ट लेंस: यदि आप कॉन्टेक्ट लेंस इस्तेमाल करते हैं, तो यह जान लें लबें समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से ड्राई आई के कारण बन सकते हैं और आंखों के अनुसार सही न होने वाला लेंस परेशानी पैदा कर सकता है। क्योंकि कॉन्टैक्ट लेंस आँखों की सतह पर आँसुओं की परत को प्रभावित कर सकता है, जिससे आँखें सूखी महसूस होती हैं और लंबे समय तक लेंस पहनने से सूखापन और असहजता बढ़ भी सकती है।
  • कुछ बीमारियां: जैसे की ब्लेफेराइटिस जिसे आम भाषा में पलकों की सूजन या पलकों का संक्रमण कहा जाता है। एंट्रोपियन जब पलकें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं, जिसके कारण पलकों के बाल आँख की सतह से रगड़ खाते हैं। एक्ट्रोपियन जब पलकें (आमतौर पर निचली पलक) आंख की पुतली से बाहर की ओर मुड़ जाती है या लटक जाती है। ऐसी स्थिति ड्राई आई सिंड्रोम का कारण बन जाती है। हालांकि अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजिस्ट के अनुसार रूमेटॉइड आर्थराइटिस, सजोग्रेन सिंड्रोम, थायरॉइड रोग और ल्यूपस जैसी बीमारी भी ड्राई आई कारण बन सकती है और समस्या को बढ़ा सकती है।
  • धूल धुआं और हवा: आज के समय एक बढ़ती समस्या यह है की अधिकतर जगह प्रदूषण की समस्या बनी पड़ी है और बढ़ती जा रही है। जबकि इसी धूल, धुआं के कारण हमारे शरीर पर बुरा असर तो पड़ता ही है, लेकिन इसी धूल, धुआं और हवा के कारण हमारी आंखों में जलन होने लगती है। लेकिन इसी धूल धुआँ और अत्यधिक शुष्क जलवायु में रहने से जैसे की AC, कूलर, फैन की सीधी हवा। ये बात याद रखें ये आंखों की सतह से आंसुओं के वाष्पीकरण को बढ़ा सकती हैं और बढ़ावा देती हैं। जो ड्राई आई का कारण बनते हैं और उसके लक्षणों को बढ़ा भी देते हैं।
  • कुछ दवाएं लेने से: यदि आप डॉक्टर द्वारा लिखी दवा का इस्तेमाल करते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा इस्तेमाल करते हैं, तो यह भी ड्राई आई सिंड्रोम कारण बन सकती हैं। खासकर अगर आप एलर्जी और सर्दी की दवा (एंटीहिस्टामाइन), नींद की गोली, चिंता और अवसादरोधी दवाएँ, सीने में जलन होने वाली दवा, हृदय संबंधी समस्याओं और उच्च रक्तचाप के लिए बीटा-ब्लॉकर्स जैसी स्थिति में उपयोग होने वाली दवा ड्राई आई का बन सकती हैं।
  • नेत्र सम्बंधित सर्जरी: चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी के बाद आंखों में ड्राईनेस होना, काला मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद, मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद और नाखुना जैसी बीमारी व सर्जरी के बाद ड्राई आई सिंड्रोम का कारण बन जाना अधिकतर लोगों में देखा जाता है और हो सकता है।

ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण क्या होते है?

ड्राई आई के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, परन्तु इसका अनुभव कैसा होता है, इसके सामान्य लक्षण निचे दिये गये हैं:

  • ऐसा महसूस होना जैसे की आंखों में चुभन या जलन हो रही हो।
  • धुंधली दृष्टि खासकर पढ़ते व लिखते समय।
  • आंखों में गर्माहट भी महसूस हो सकती है।
  • आंखों में चुभन ऐसा महसूस होना जैसे की आंख में कुछ चला गया हो।
  • आंखों में कुछ पड़ा होने जैसा महसूस होना जैसे की खुरदुरा या किरकिरापन।
  • आंख लाल होना साथ ही जलन होना।
  • धूल, धुंआ और हवा के संपर्क में आने पर यह समस्या बढ़ भी सकती है।
  • ऐसी स्थिति में कॉन्टैक्ट लेंस पहनने पर दर्द जलन और पानी आना।
  • आंखों में बलगम का जमाव।
  • तेज रोशनी से परेशानी महसूस होना।
  • आंखों में थकान विशेषकर लंबे समय तक पढ़ने और स्क्रीन पर फोकस बनाय रखने के कारण महसूस होना।
  • आंखों से पानी आना।

नोट:- आंखों से पानी आना यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन ड्राई आई सिंड्रोम होने पर आंखों से ज्यादा पानी भी आ सकता है। दरअसल जब आंखे सूखेपन से परेशान होती है, तो ऐसी स्थिति में अधिक आँसू बनने लगते हैं। लेकिन ये आँसू हमेशा सामान्य टियर फ़िल्म की तरह आंखों को लंबे समय तक लुब्रिकेट नहीं कर पाते।

जोखिम कारक

  • ड्राई आई सिंड्रोम का सबसे बड़ा जोखिम कारक उम्र बढ़ना है।
  • कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट जैसी डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग भी इसका एक बड़ा जोखिम कारक है।
  • ऐसी बीमारी जो आंसू बनाने की क्षमता को प्रभावित करती है, जैसे की सजोग्रेन सिंड्रोम, थायरॉइड, ल्यूपस, ब्लेफेराइटिस, एंट्रोपियन और एक्ट्रोपियन जैसी बीमारी।
  • जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, उनमे इसका जोखिम कारक बना रहेता है।
  • नेत्र सम्बंधित बीमारियों, सर्जरी के दुष्प्रभाव के रूप में और आंखों में चोट लगने पर जोखिम कारक बढ़ सकता है।
  • महिलाओं में ड्राई आई का जोखिम अधिक होता है, खासकर उन महिलाओं में जिनके गर्भभावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव हुए हों।
  • आहार में विटामिन ए की कमी भी इसका मुख्य जोखिम कारक बन सकता है।

ड्राई आई सिंड्रोम का घरेलु उपचार

यदि कभी कभार आंखों में सुखापन, भारिपन और तनाव जैसे लक्षण दिखें तो ऐसे में स्व-देखभाल से राहत मिल सकती है और इसके घरेलु उपचार में शामिल है:

  • आंखों को आराम दें: पढ़ते लिखते समय या कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप का उपयोग करते समय 20-20-20 नियम का पालन करें। हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के 20 फुट दूर किसी वस्तु को देखें, इससे आंखों को आराम मिलेगा और तनाव कम होगा।
  • आंखों पर गर्म सेक लगाएं: किसी भी मेडिकल स्टोर से या ऑनलाइन आंखों के लिए हीट मास्क खरीदें और इसे हर रोज सोने से पहले 10 मिनट के लिए अपनी आंखों पर लगाएं। यह ड्राई आई से राहत पाने के लिए सबसे ज्यादा और सुरक्षित तरीका है।
  • पर्यावरणीय कारकों से बचें: धूल, डस्ट और खासकर सिगरेट का धुआँ, चेहरे की ओर हवा फेंकने वाले वेंट, हवा और एलर्जी पैदा करने वाले अन्य पदार्च से बचें और घर से बाहर जाते समय चश्मा या धूप का चश्मा पहनना फायदेमंद हो सकता है ड्राई आई जैसी स्थिति में।
  • बेडरूम में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें: आप जहां रहते या सोते हैं, उसके आधार पर, अगर सर्दियों में आप हीटर का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके घर में नमी का स्तर बहुत कम हो सकता है। ऐसे में ह्यूमिडिफायर इसमें मदद कर सकता है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरे आहार लें: कुछ शोध बताते हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड आहार आँसू उत्पादन में सहायता कर सकते हैं और ड्राई आई के लक्षणों में मदद कर सकते हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम से बचाव और रोकथाम कैसे करें?

सूखी आंखों को हर स्थिति में पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन ऐसी स्थिति में आपकी कुछ आदतें इसके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: रोजाना 6-7 ग्लास पानी पियें, शरीर में पर्याप्त पानी बनाए रखना सामान्य स्वास्थ्य और आंखों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्क्रीन से नियमित ब्रेक लें: यदि आपका काम डिजिटल स्क्रीन पर है, तो ऐसे में लंबे समय तक बिना ब्रेक के मोबाइल या कंप्यूटर देखने से बचें।
  • नियमित रूप से पलक झपकाएं: कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल का इस्तेमाल करते समय या पढ़ते लिखते समय ज्यादा देर तक फोकस बनाए रखने के बजाए नियमित रूप से पलक झपकाने की आदत रखें।
  • AC और पंखे की हवा सीधे आंखों पर न आने दें: सीधी हवा आंसुओं के वाष्पीकरण को बढ़ा सकती है। यदि आपको ड्राई आई की समस्या लंबे समय से है, तो ऐसे में सीधी हवा से बचाव करें।
  • धूल, धुएं से बचें: यदि आप सिगरेट का सेवन करते हैं, या फिर कोई अन्य काम धूल, धुएं वाला करते हैं, तो इससे बचें क्योंकि इन सब से ड्राई आई के लक्षण बढ़ सकते हैं।
  • बाहर जाते समय चश्मे पहनें: धूप, हवा और धूल से आंखों को बचाने के लिए धूपी चश्मे पहने या UV प्रोटेक्शन वाला एक अच्छी क्वालिटी का चश्मा पहने इससे बचाव होगा और राहत मिलेगी।
  • कॉन्टैक्ट लेंस की सही देखभाल करें: अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं और ड्राई आई की समस्या बनी है, तो ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल न करें।

क्या ड्राई आई सिंड्रोम पूरी तरह ठीक हो सकता है?

आंखों में सूखापन की समस्या कुछ लोगों में हल्की फुल्की और कुछ समय सीमा तक बनी रह सकती और उपचार से ठीक हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में यही समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। हालांकि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और ऐसे में सबसे उपयुक्त उपचार के लिए कई अलग-अलग उपचार आज़माने पड़ सकते हैं। हालांकि यह एक तनावपूर्ण प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन प्रयास करना सार्थक है। यदि आपके वर्तमान उपचार कारगर नहीं हैं या आप अन्य विकल्पों पर चर्चा करना चाहते हैं, तो अपने चिकित्सक से बात करें।

ड्राई आई सिंड्रोम होने पर कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

यदि आपको निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें और घरेलु व आर्टिफीसियल टीयर्स जैसी लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स से राहत न मिले तो, ऐसी स्थिति में अपने नजदीकी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें:

  • आंखों में सुखापन कई दिनों से बना हो या समस्या बढ़ती जाए।
  • आंखों में लालिमा और जलन कई दिनों से बनी हो।
  • आंखों में दर्द होना और धुंधला दिखाई देने लगे।
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनना मुश्किल हो गया है या पहनने के बाद समस्या बढ़ जाए।
  • आंखों में चोट या कुछ चले जानें पर।
  • आंखों का किसी बीमारी का ऑपरेशन हुआ हो और उसके बाद या समस्या जन्म ले ले।
  • आंखों में सूखेपन की समस्या रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रही हो।
  • किसी बीमारी की दवा खाने के बाद समस्या और बढ़ने लगे।

ड्राई आई सिंड्रोम का निदान किस माध्यम से किया जाता है?

ड्राई आई का पता केवल लक्षणों के आधार पर नहीं लगाया जाता। इसलिए ऐसी स्थिति में आपका नेत्र चिकित्सक आपकी आंखों और आपके चिकित्सीय स्वास्थ्य का विस्तृत इतिहास जानेंगे और उन सभी स्थितियों पर ध्यान देगा जो आंखों में सूखेपन का कारण बन सकती हैं या इसे बढ़ा सकती हैं। ऐसे में आपकी आंखों की जांच के दौरान, आपका नेत्र चिकित्सक निम्नलिखित परीक्षण कर सकता है।

  • स्लिट लैंप माइक्रोस्कोप: एक विशेष माइक्रोस्कोप से आंखों की शुरुआती सम्पूर्ण जाँच आपका डॉक्टर कर सकते हैं। इस जाँच में आंखों की सामान्य और विस्तृत जांच की जाती है ताकि ड्राई आई के साथ आंखों की अन्य समस्याओं का भी पता लगाया जा सके।
  • शिर्मर परीक्षण: आपका चिकित्सक आपकी पलक के किनारे पर कागज का एक छोटा सा टुकड़ा रख सकते हैं, जिसे शिर्मर परीक्षण के नाम से जाना जाता है, इस जांच से आंसू बनने की मात्रा का अनुमान लगाया जाता है।
  • टीबीयूटी परीक्षण: यह परीक्षण यह जांचता है कि आपके आंसू कितनी जल्दी वाष्पित हो जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर आपकी आंख में डाई डालते हैं और माइक्रोस्कोप का उपयोग करके देखते हैं कि आपकी आंसू परत कितनी देर तक स्थिर रहती है।
  • फ्लोरेसिन स्ट्रिप: इस विशेष स्ट्रिप की मदद से आंख की सतह पर मौजूद कुछ असामान्यताओं और सरफेस डैमेज को देखा जाता है। लेकिन इस दौरान विभिन्न रंगों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे की रोज़ बेंगाल, लिसामाइन ग्रीन डाई।

ड्राई आई का इलाज कैसे किया जाता है?

ड्राई आई आंखों के सूखेपन का उपचार लक्षणों की गंभीरता और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं पर निर्भर करता है। परन्तु ऐसे में ड्राई आई से राहत पाने से पहले आपको कई अलग-अलग उपचार आज़माने पड़ सकते हैं और इसके उपचार में निम्नलिखित उपचार शामिल हो सकते हैं:

  • आई ड्रॉप्स: ड्राई आई के लिए कई प्रकार की आई ड्रॉप्स उपलब्ध हैं। जैसे की आर्टिफीसियल टीयर्स (कृत्रिम आँसू) जो आंखों को चिकनाई देते हैं और आराम पहुंचाते हैं, जिससे लक्षणों से अस्थायी रूप से राहत मिलती है। हालांकि ये बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिल जाती हैं।
  • ऑइंटमेंट: अगर सोते समय आंखें सूख जाती हैं या महसूस होती हैं, तो आप रात में किसी लुब्रिकेंट ऑइंटमेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन याद रखें लुब्रिकेंट ऑइंटमेंट लगाने के बाद कुछ समय के लिए चिपचिपा पन जैसा लग सकता है, इसलिए इन्हें अक्सर रात में इस्तेमाल किया जाता है।
  • पंक्टल ऑक्लूजन: यदि आंखें पर्याप्त आंसू नहीं बनाती हैं, तो ऐसी स्थिति में पंक्टल ऑक्लूजन एक सहायक विकल्प हो सकता है। लेकिन इसे बिना डॉक्टर की सलाह के अपने उपचार में शामिल करना ठीक नही है।
  • एक्यूपंक्चर: इस एक्यूपंक्चर उपचार से आंखों के सूखेपन के लक्षणों और संकेतों में सुधार करने में मदद मिल सकती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के नही।
  • स्क्लेरल लेंस: ये कॉन्टैक्ट लेंस आंख के सफेद भाग (स्क्लेरा) के संपर्क में आते हैं। जबकी ये आंखों की रक्षा और उन्हें चिकनाई प्रदान करने के साथ-साथ दृष्टि को भी बनाय रखते हैं।
  • आँसू की उत्पादन को बढ़ावा देना: पिलोकार्पिन नामक दवा आंसू उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है और शुष्क नेत्र रोग के लक्षणों में सुधार कर सकती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसे इस्तेमाल करना नुकसान दे साबित हो सकता है।
  • सर्जरी: बहुत गंभीर स्थिति में आपका चिकित्सक पलकों के गलत संरेखण को शल्य चिकित्सा द्वारा ठीक कर सकता है, परन्तु ये गंभीर मामलों में और आँसू वाष्पीकरण को कम करने के लिए ही सर्जरी कर सकते है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ड्राई आई कितने दिन में ठीक होता है?

ड्राई आई ठीक होने में लगने वाला समय उसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। हल्के लक्षण कुछ समय में कम हो सकते हैं, जबकि लंबे समय से चली आ रही समस्या में नियमित उपचार और देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।

क्या ड्राई आई से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है?

गंभीर या लंबे समय तक अनियंत्रित ड्राई आई में आंखों की सतह पर सूजन, कॉर्निया को नुकसान और दृष्टि संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार लक्षण होने पर नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

क्या ड्राई आई में गुलाब जल डालना चाहिए?

नहीं, आंखों में सामान्य या कॉस्मेटिक गुलाब जल डालना उचित नहीं है। यह आंखों के लिए स्टेराइल न हो सकता है और जलन या संक्रमण का जोखिम पैदा कर सकता है। ड्राई आई के लिए आंखों में इस्तेमाल हेतु बने उपयुक्त लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का चुनाव करें।

क्या महिलाओं में ड्राई आई की समस्या अधिक होती है?

महिलाओं में कुछ हार्मोनल बदलावों, विशेषकर रजोनिवृत्ति के आसपास, ड्राई आई का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकती है।

क्या ड्राई आई के लिए घरेलू उपचार अपनाना ठीक है?

हाँ, हल्के लक्षणों में स्क्रीन से नियमित ब्रेक लेना, पूरी तरह पलक झपकाना, हवा और धुएं से बचना तथा जरूरत के अनुसार लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है। लेकिन लगातार, गंभीर या बढ़ते लक्षणों में नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

स्रोत और संदर्भ
  1. Calveland Clinic – ड्राई आई सिंड्रोम क्या होता है इसके प्रमुख कारण और उपचार।
  2. American Academy of Ophthalmology – ड्राई आई सिंड्रोम के प्रमुख कारण और लक्षण।
  3. Miami Contact Lens Institute – ड्राई आई सिंड्रोम कितने प्रकार के होते हैं।
  4. National Library of Medicine – ड्राई आई सिंड्रोम की रोकथाम निदान और उपचार।
  5. Healthline – ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण, कारण और उपचार।

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